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Saharanpur News: लकड़ी हस्तशिल्प निर्यातकों की सरकार से बातचीत, राहत की उम्मीद
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- आम और बबूल की लकड़ी को ईयूडीआर से बाहर करने का रखा सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। यूरोपियन यूनियन के ईयूडीआर (यूरोपियन यूनियन डिफोरेस्टेशन रेगुलेशन) पर निर्यातकों को सरकार से राहत की उम्मीद है। मंगलवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय जलवायु मंत्री से भी मुलाकात की। उन्होंने सुझाव दिया कि आम और बबूल की लकड़ी को ईयूडीआर से बाहर रखा जाए।
जिले से बड़ी संख्या में वुडन हैंडीक्राफ्ट का निर्यात होता है। सबसे अधिक निर्यात अमेरिका और फिर यूरोपियन देशों को किया जाता है। ईयू ने लकड़ी के उत्पाद के लिए (यूरोपियन यूनियन डिफोरेस्टेशन रेगुलेशन) सर्टिफिकेट लागू किया है। इसके तहत लकड़ी, प्लाईवुड पैकेजिंग, मटेरियल व अन्य संबंधित उत्पादों के स्रोत से ट्रैसबिलिटी, जियो टैग लोकेशन और संपूर्ण प्रक्रिया को प्रमाणित करना जरूरी होगा। ऐसे में जिन निर्यातकों के पास ईयूडीआर सर्टिफिकेट नहीं होगा, वे यूरोप के देशों को माल नहीं भेज सकेंगे।
केंद्रीय मंत्री से प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हमारे यहां पर आमतौर पर आम, बबूल और शीशम की लकड़ी से उत्पाद तैयार होते हैं, जो वनों की कटाई से दूर होते हैं। जिले के निर्यातकों को उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी। जिले के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ से बड़ा असर पड़ा है। इसके अलावा ईयूडीआर से यूरोपियन यूनियन के देशों में निर्यात पर संकट खड़ा हो गया है।
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- बोले निर्यातक
ईपीसीएच सदस्य और निर्यातक मोहम्मद औसाफ ने बताया कि ईयूडीआर पर सरकार से प्रतिनिधिमंडल ने बात की है। सरकार के साथ वुडकार्विंग उद्योग की परेशानियों को साझा किया गया है। ईयू से ईयूडीआर के संबंध में चर्चा कर समस्या का हल निकालने पर बात हुई है। बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई है। उम्मीद है जल्द ही कोई हल निकलेगा।
- ईपीसीएच सदस्य और निर्यातक अनावर अहमद ने बताया कि यूरोपियन यूनियन के ईयूडीआर ने जिले के साथ अन्य राज्यों के निर्यातकों के सामने भी समस्या खड़ी की है। हमने सरकार से आग्रह किया है कि वह अपने स्तर पर ईयू से बात करें। जिससे समस्या का हल निकाल सके। केंद्रीय मंत्री से अच्छे माहौल में बातचीत हुई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। यूरोपियन यूनियन के ईयूडीआर (यूरोपियन यूनियन डिफोरेस्टेशन रेगुलेशन) पर निर्यातकों को सरकार से राहत की उम्मीद है। मंगलवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय जलवायु मंत्री से भी मुलाकात की। उन्होंने सुझाव दिया कि आम और बबूल की लकड़ी को ईयूडीआर से बाहर रखा जाए।
जिले से बड़ी संख्या में वुडन हैंडीक्राफ्ट का निर्यात होता है। सबसे अधिक निर्यात अमेरिका और फिर यूरोपियन देशों को किया जाता है। ईयू ने लकड़ी के उत्पाद के लिए (यूरोपियन यूनियन डिफोरेस्टेशन रेगुलेशन) सर्टिफिकेट लागू किया है। इसके तहत लकड़ी, प्लाईवुड पैकेजिंग, मटेरियल व अन्य संबंधित उत्पादों के स्रोत से ट्रैसबिलिटी, जियो टैग लोकेशन और संपूर्ण प्रक्रिया को प्रमाणित करना जरूरी होगा। ऐसे में जिन निर्यातकों के पास ईयूडीआर सर्टिफिकेट नहीं होगा, वे यूरोप के देशों को माल नहीं भेज सकेंगे।
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केंद्रीय मंत्री से प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हमारे यहां पर आमतौर पर आम, बबूल और शीशम की लकड़ी से उत्पाद तैयार होते हैं, जो वनों की कटाई से दूर होते हैं। जिले के निर्यातकों को उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी। जिले के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ से बड़ा असर पड़ा है। इसके अलावा ईयूडीआर से यूरोपियन यूनियन के देशों में निर्यात पर संकट खड़ा हो गया है।
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- बोले निर्यातक
ईपीसीएच सदस्य और निर्यातक मोहम्मद औसाफ ने बताया कि ईयूडीआर पर सरकार से प्रतिनिधिमंडल ने बात की है। सरकार के साथ वुडकार्विंग उद्योग की परेशानियों को साझा किया गया है। ईयू से ईयूडीआर के संबंध में चर्चा कर समस्या का हल निकालने पर बात हुई है। बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई है। उम्मीद है जल्द ही कोई हल निकलेगा।
- ईपीसीएच सदस्य और निर्यातक अनावर अहमद ने बताया कि यूरोपियन यूनियन के ईयूडीआर ने जिले के साथ अन्य राज्यों के निर्यातकों के सामने भी समस्या खड़ी की है। हमने सरकार से आग्रह किया है कि वह अपने स्तर पर ईयू से बात करें। जिससे समस्या का हल निकाल सके। केंद्रीय मंत्री से अच्छे माहौल में बातचीत हुई है।