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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तैयार करेंगी शुष्क पोषाहार
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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बनाएंगी शुष्क पोषाहार
सहारनपुर। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कुपोषित बच्चों और गर्भवतियों के लिए शुष्क पोषाहार तैयार करेंगी। इसके लिए 889 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। गेहूं, चावल और दाल से पोषाहार बनाएंगी। इन्हें ट्रेनिंग दिया जाएगी।
अब तक पोषाहार के तैयार पैकेट बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के पास पहुंचते थे, जिनको कुपोषित, अति कुपोषित और गर्भवतियेां तक पहुंचाया जाता था। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह योजना बनाई गई है। यह महिलाएं पोषाहार को बाल एवं पुष्टाहार विभाग को देंगी और उनके बदले में इनको पैसा मिलेगा।
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शासन ने मांगा है डाटा
सहारनपुर शहर सहित 11 विकासखंड क्षेत्रों में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र और वर्तमान में विभाग की निगरानी में 27561 गर्भवती महिलाएं 20 हजार कुपोषित और पांच हजार अति कुपोषित बच्चे हैं। जबकि अत्यंत निमभन श्रेणी में 998 बच्चे हैं।
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नहीं खत्म हो सका कुपोषण का दंश
वर्ष----कुपोषित ----------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 ---------18105
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5550
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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गेहूं, दाल और चावल से शुष्क पोषाहार तैयार करेंगी। भविष्य में इनके द्वारा तैयार पोषाहार ही वितरित किया जाएगा। इसको लेकर शासन ने निर्देश जारी किए हैं और कुपोषित, अति कुपोषित एवं गर्भवती महिलाओं का डाटा भी मांगा है।
-आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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सहारनपुर। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कुपोषित बच्चों और गर्भवतियों के लिए शुष्क पोषाहार तैयार करेंगी। इसके लिए 889 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। गेहूं, चावल और दाल से पोषाहार बनाएंगी। इन्हें ट्रेनिंग दिया जाएगी।
अब तक पोषाहार के तैयार पैकेट बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के पास पहुंचते थे, जिनको कुपोषित, अति कुपोषित और गर्भवतियेां तक पहुंचाया जाता था। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह योजना बनाई गई है। यह महिलाएं पोषाहार को बाल एवं पुष्टाहार विभाग को देंगी और उनके बदले में इनको पैसा मिलेगा।
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शासन ने मांगा है डाटा
सहारनपुर शहर सहित 11 विकासखंड क्षेत्रों में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र और वर्तमान में विभाग की निगरानी में 27561 गर्भवती महिलाएं 20 हजार कुपोषित और पांच हजार अति कुपोषित बच्चे हैं। जबकि अत्यंत निमभन श्रेणी में 998 बच्चे हैं।
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नहीं खत्म हो सका कुपोषण का दंश
वर्ष----कुपोषित ----------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 ---------18105
2018------41869----------12547
2019------33825-----------6910
2020------21424 ----------5550
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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गेहूं, दाल और चावल से शुष्क पोषाहार तैयार करेंगी। भविष्य में इनके द्वारा तैयार पोषाहार ही वितरित किया जाएगा। इसको लेकर शासन ने निर्देश जारी किए हैं और कुपोषित, अति कुपोषित एवं गर्भवती महिलाओं का डाटा भी मांगा है।
-आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी