{"_id":"61e5b44efa05a77bd97f0a7a","slug":"winter-increased-trouble-winter-diarrhea-and-cough-in-children-increased-cold-saharanpur-news-mrt5737686179","type":"story","status":"publish","title_hn":"सर्दी ने बढ़ाई मुसीबत, बच्चों में विंटर डायरिया और खांसी, जुकाम बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सर्दी ने बढ़ाई मुसीबत, बच्चों में विंटर डायरिया और खांसी, जुकाम बढ़ा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। सर्दी के साथ ही बच्चों में विंटर डायरिया तथा खांसी और जुकाम की समस्या भी बढ़ गई है। एसबीडी जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंच रहे बच्चों में से ज्यादातर को उल्टी और दस्त की शिकायत है। इसके अलावा खांसी और जुकाम की भी शिकायत बड़ी संख्या में देखने को मिल रही है।
एसबीडी जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विरेंद्र भट्ट ने बताया कि करीब एक माह से ज्यादातर बच्चों में खांसी और जुकाम के साथ ही वायरल फीवर की भी शिकायत देखने को मिल रही है। वायरल फीवर में अब कुछ कमी है। अब नई समस्या विंटर डायरिया की है। बड़ी संख्या में बच्चे उल्टी और दस्त की समस्या से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि सर्दियों में विंटर डायरिया एक बाम बात है। माता-पिता को सचेत हो जाना चाहिए। विंटर डायरिया लापरवाही के कारण होता है और होने के बाद लापरवाही बच्चे को और नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में बच्चों के खानपान के साथ ही उनको सर्दी से बचाने के लिए जरूरी कपड़े पहनाए जाए।
उन्होंने बताया कि डायरिया होने के प्रमुख करण सफाई की कमी, बच्चों में कमजोरी व सही समय पर सही इलाज नहीं मिलना है। डायरिया 60-80 प्रतिशत मौकों पर वायरस जनित ही होता है। विंटर डायरिया सर्दी के मौसम में रोटावायरस इंफेक्शन से होता है।
विज्ञापन
विंटर डायरिया के लक्षण
- बच्चे को बार-बार दस्त आना।
- उल्टी के साथ ही उबकाई भी आना।
- बार-बार दस्त और उल्टी आने से पेशाब का कम आना।
यह सावधानियां बरतें
बच्चों को विंटर डायरिया से बचाने के लिए उन्हें सर्दी की शुरुआत में सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनाएं। उल्टी दस्त होने की वजह से बच्चों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में उन्हें अधिकतम ओआरएस का घोल पिलाते रहे। नवजात बच्चों की माताओं को चाहिए कि वह ऐसी चीजों का सेवन ना करें, जिससे बच्चे का पेट खराब हो। साथ ही कोई भी परेशानी होने पर तुरंत नजदीकी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
विज्ञापन
एसबीडी जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विरेंद्र भट्ट ने बताया कि करीब एक माह से ज्यादातर बच्चों में खांसी और जुकाम के साथ ही वायरल फीवर की भी शिकायत देखने को मिल रही है। वायरल फीवर में अब कुछ कमी है। अब नई समस्या विंटर डायरिया की है। बड़ी संख्या में बच्चे उल्टी और दस्त की समस्या से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि सर्दियों में विंटर डायरिया एक बाम बात है। माता-पिता को सचेत हो जाना चाहिए। विंटर डायरिया लापरवाही के कारण होता है और होने के बाद लापरवाही बच्चे को और नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में बच्चों के खानपान के साथ ही उनको सर्दी से बचाने के लिए जरूरी कपड़े पहनाए जाए।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि डायरिया होने के प्रमुख करण सफाई की कमी, बच्चों में कमजोरी व सही समय पर सही इलाज नहीं मिलना है। डायरिया 60-80 प्रतिशत मौकों पर वायरस जनित ही होता है। विंटर डायरिया सर्दी के मौसम में रोटावायरस इंफेक्शन से होता है।
विज्ञापन
विंटर डायरिया के लक्षण
- बच्चे को बार-बार दस्त आना।
- उल्टी के साथ ही उबकाई भी आना।
- बार-बार दस्त और उल्टी आने से पेशाब का कम आना।
यह सावधानियां बरतें
बच्चों को विंटर डायरिया से बचाने के लिए उन्हें सर्दी की शुरुआत में सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनाएं। उल्टी दस्त होने की वजह से बच्चों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में उन्हें अधिकतम ओआरएस का घोल पिलाते रहे। नवजात बच्चों की माताओं को चाहिए कि वह ऐसी चीजों का सेवन ना करें, जिससे बच्चे का पेट खराब हो। साथ ही कोई भी परेशानी होने पर तुरंत नजदीकी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।