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चुनौतीपूर्ण रहेगा टॉप 20 में आना

Wed, 30 Sep 2015 12:01 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर Updated Wed, 30 Sep 2015 12:01 AM IST
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Will remain challenging in the top 20 come
स्मार्ट सिटी योजना के तहत पहले चरण में विकसित किए जाने वाले देश के 20 शहरों में शामिल होने के लिए सहारनपुर को कड़ी मशक्कत करनी होगी। नगर निगम के साथ ही नगर के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व बनता है कि वह इसमें अपना योगदान दे। इसी मकसद से नगर निगम की ओर से दिल्ली रोड स्थित एक होटल सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन पत्रकारों और व्यापारियों को आमंत्रित किया गया, जिसमें उनसे स्मार्ट सिटी पर लिखित रूप से सुझाव मांगे गए।
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कार्यशाला में नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला ने स्मार्ट सिटी का पूरा खाका पत्रकारों और व्यापारियों के समक्ष रखा। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से जनता को स्मार्ट सिटी की खूबियां बताईं। साथ ही पत्रकारों और व्यापारियों से सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए सहारनपुर दो बाधाएं पार कर चुका है, मगर तीसरी बाधा काफी कठिन है, जिसे पार करने के लिए उन्हें नगर के प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग और सुझाव चाहिए।
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पहले विकसित किए जाने वाले 20 शहरों में सहारनपुर को शामिल कराने के लिए उन्होंने तीन बिंदुओं पुन: संयोजन (रिट्रोफिटिंग), पुनर्विकास और हरित क्षेत्र विकास में से किन्हीं दो बिंदुओं को कंपलीट करने की जरूरत बताई। पुन: संयोजन के तहत वर्तमान निर्मित क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए, अन्य उद्देश्यों के साथ-साथ योजना को शुरू किया जाएगा, जिससे वर्तमान क्षेत्र को अधिक सक्षम और रहने योग्य बनाया जा सके।
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इसके तहत शहर में 24 घंटे बिजली और पेयजल, सोलर लाइट और भूकंपरोधी भवन हों। पैदल वालों के लिए फुटपाथ, साइकिल वालों के लिए अलग से ट्रैक, सुपर मार्केट, सुविधाजनक पार्क, जगह-जगह शौचालय और बेहतर स्कूल और चिकित्सा व्यवस्था हो। पुनर्विकास के लिए शहर में कहीं भी 50 एकड़ एरिया को समतल कर यानी किसी मलिन बस्ती को वहां के निवासियों की सहमति से ध्वस्त कर उसे नए सिरे से डेवलप किया जाना, जिसके तहत 30 फीसदी एरिया में मकान हो और बाकी 70 फीसदी एरिया खुला हो, जिसमें हरियाली, पार्क आदि हों। इसके लिए उन्होंने मुंबई के भिंडी बाजार का उदाहरण दिया। इसके अलावा हरित क्षेत्र के तहत कम से कम ढाई सौ एकड़ भूमि पर नई कॉलोनी की स्थापना करना, जिसमें बेहतर सुविधाएं हों। इस प्रकार इन तीन बिंदुओं में से तीन पर कंपलीट होना जरूरी है। सहारनपुर को पहले 20 शहरों में शामिल कराने के लिए, जो काफी कठिन काम है। नगरायुक्त ने इसके लिए आम से लेकर खासजन तक से सुझाव मांगे हैं। इस दौरान डॉ. पीके शर्मा ने भी प्रोजेक्टर के माध्यम से स्मार्ट सिटी का खाका पेश किया।

नगर निगम को भी दिखानी होगी स्मार्टनेस
सहारनपुर में इस समय विकास की चार बड़ी योजनाएं चल रही हैं। इनमें अटल आवास योजना, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी योजनाएं काम कर रही हैं। नगर निगम को इन योजनाओं के बीच ऐसा सामंजस्य बिठाना होगा, जिससे कोई भी योजना एक-दूसरे को क्रॉस न करे। उदाहरण के तौर पर अमृत योजना के तहत पेयजल, पार्किंग, ट्रैफिक और सिवरेज सिस्टम को दुुरुस्त किया जाना है। स्मार्ट सिटी योजना में भी यह सब शामिल है। ऐसे में नगर निगम अमृत योजना के तहत इन कार्यों को कराकर स्मार्ट सिटी योजना में आने वाले इस कार्य के पैसे को अन्य कार्यों में लगाकर स्मार्टनेस दिखा सकता है।

शर्तें पूरी न करने वाले शहर होंगे बाहर
स्मार्ट सिटी योजना के तहत पहले चरण में विकसित करने के लिए 20 शहरों का चयन किया जाएगा। बाकी 80 शहरों को उनकी वह खामियां बताई जाएंगी, जिनकी वजह से उनका चयन नहीं हुआ है और उन्हें खामियों को एक वर्ष के भीतर दूर करने को कहा जाएगा। दूसरे चरण में शेष 80 शहरों में से शर्तें पूरी करने वाले 40 शहरों को चुना जाएगा। इनमें से शेष बचे 40 शहरों को खामियां दूर करने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा। यदि वह उस अंतराल में खामियां दूर कर शर्तें पूरी नहीं कर पाते हैं तो सरकार चयनित हुए 100 शहरों में से बाहर के शहरों को शामिल कर सकती है।

हर शहर अलग तरीके से बनेगा स्मार्ट
स्मार्ट बनने वाले शहरों जरूरी नहीं एक जैसा विकास और विस्तार पाएं। प्रत्येक शहर के स्मार्ट बनने की परिभाषा अलग होगी। नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला ने बताया कि प्रत्येक शहर को उसकी खूबियों के हिसाब से डेवलप किया जाएगा, जैसे सहारनपुर को वुड कार्विंग, फल उद्योग या रायवाला के कपड़ा उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है। मेरठ को खेल उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है। बाकी के सड़क, बिजली, सीवर और कचरा प्रबंधन जैसे विकास कार्य साथ-साथ चलेंगे।


सुझाव के लिए होगा कंपटीशन
अपना स्मार्ट सिटी कैसा हो? इसके लिए नगर निगम शहर में कंपटीशन कराएगा। इसमें प्रतिभागियों को स्मार्ट सिटी पर अपने सुझाव देने होंगे। जिसका सुझाव सबसे बेहतर होगा उसे 21 हजार रुपये, दूसरे नंबर पर रहने वाले को 15 हजार रुपये और तीसरे नंबर पर रहने वाले को दस हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा 25 लोगों की एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें शिक्षक, छात्र प्रतिनिधि, व्यापारी, उद्यमी, रिक्श, टेंपो, टैक्सी और बस यूनियन, सीनियर सिटीजन, महिला आदि के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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