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Saharanpur News: .....तुम क्या गए शब्द भी स्वर भी अस्त व्यस्त हुए
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-गीतकार राजेंद्र राजन एवं विभा मिश्रा की स्मृति में हुआ कवि सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नवांकुर नाट्य संस्था की ओर से प्रख्यात गीतकार राजेन्द्र राजन और उनकी कवयित्री पत्नी विभा मिश्रा की स्मृति में कवि सम्मेलन हुआ। लब्ध प्रतिष्ठित कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा, उन दोनों का जाना हिन्दी कविता के लिए अपूर्णीय क्षति है। राजन के गीतों का मर्म श्रोता के हृदय को सहज ही छू लेता था। उन्हें दुनिया भर में बड़े चाव से सुना जाता था।
डॉ. मिश्र ने उनकी स्मृति को कुछ इस तरह नमन किया-‘तुम क्या गए नख्त गीतों के असमय अस्त हुए, एक-एक कर आखर सारे लकवाग्रस्त हुए, तुम क्या गए शब्द भी स्वर भी अस्त व्यस्त हुए,।
आवास विकास सभागार में हुए कार्यक्रम में का शुभारंभ डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा, शिव कुमार गौड़, केएल अरोड़ा, दिनेश सेठी, यशपाल भाटिया, योगेश दहिया एवं शिक्षाविद् डॉ. ओपी गौड़ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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कार्यक्रम संयोजक प्रशांत राजन ने दोनों कवियों की जीवन व काव्य यात्रा पर प्रकाश डाला। अजय भारद्धाज ने राजेंद्र राजन का एक गीत और दीपा जैन ने विभा मिश्रा का गीत सुनाया।
मुख्य अतिथि, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने कहा कि उन्होंने बचपन से ही उनके गीतों का रसास्वादन किया है। वे अपने गीतों, ग़ज़लों के माध्यम से हमेशा हमारे बीच रहेंगे। शीतलवाणी के संपादक डॉ.वीरेन्द्र आज़म ने कहा कि राजन राजन ने प्रेम गीतों के अलावा सामाजिक सरोकारों को भी अपने गीतों, ग़ज़लों और मुक्तकों में पिरोकर समाज को दिशा देने का काम किया।
डॉ. ओपी सारस्वत ने इन पंक्तियों से भावांजलि दी-‘अब तक हमको विश्वास नहीं, नयनों का तारा चला गया, खुशबू करती थी प्यार जिसे, वह चमन हमारा चला गया।’
डॉ.विजेंद्रपाल शर्मा ने पढ़ा-‘वह इतना प्यारा था, गीतों के नभ का, अनुपम ध्रुवतारा था।’ विनोद भृंग ने कहा-‘सरस मंचों के अधरों की सरल मुस्कान थे राजन। नरेंद्र मस्ताना, हरिराम पथिक, प्रतिभा त्रिपाठी , करुणा प्रकाश,’संजीव झींगरन, आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस दौरान नीलांजना किशोर, कुलदीप धमीजा, सुमेधा नीरज, अलका शर्मा, मंजू जैन,केके गर्ग, राकेश शर्मा, जावेद सरोहा, अनुपमा चौधरी, गीता सिंह, आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नवांकुर नाट्य संस्था की ओर से प्रख्यात गीतकार राजेन्द्र राजन और उनकी कवयित्री पत्नी विभा मिश्रा की स्मृति में कवि सम्मेलन हुआ। लब्ध प्रतिष्ठित कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा, उन दोनों का जाना हिन्दी कविता के लिए अपूर्णीय क्षति है। राजन के गीतों का मर्म श्रोता के हृदय को सहज ही छू लेता था। उन्हें दुनिया भर में बड़े चाव से सुना जाता था।
डॉ. मिश्र ने उनकी स्मृति को कुछ इस तरह नमन किया-‘तुम क्या गए नख्त गीतों के असमय अस्त हुए, एक-एक कर आखर सारे लकवाग्रस्त हुए, तुम क्या गए शब्द भी स्वर भी अस्त व्यस्त हुए,।
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आवास विकास सभागार में हुए कार्यक्रम में का शुभारंभ डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा, शिव कुमार गौड़, केएल अरोड़ा, दिनेश सेठी, यशपाल भाटिया, योगेश दहिया एवं शिक्षाविद् डॉ. ओपी गौड़ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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कार्यक्रम संयोजक प्रशांत राजन ने दोनों कवियों की जीवन व काव्य यात्रा पर प्रकाश डाला। अजय भारद्धाज ने राजेंद्र राजन का एक गीत और दीपा जैन ने विभा मिश्रा का गीत सुनाया।
मुख्य अतिथि, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने कहा कि उन्होंने बचपन से ही उनके गीतों का रसास्वादन किया है। वे अपने गीतों, ग़ज़लों के माध्यम से हमेशा हमारे बीच रहेंगे। शीतलवाणी के संपादक डॉ.वीरेन्द्र आज़म ने कहा कि राजन राजन ने प्रेम गीतों के अलावा सामाजिक सरोकारों को भी अपने गीतों, ग़ज़लों और मुक्तकों में पिरोकर समाज को दिशा देने का काम किया।
डॉ. ओपी सारस्वत ने इन पंक्तियों से भावांजलि दी-‘अब तक हमको विश्वास नहीं, नयनों का तारा चला गया, खुशबू करती थी प्यार जिसे, वह चमन हमारा चला गया।’
डॉ.विजेंद्रपाल शर्मा ने पढ़ा-‘वह इतना प्यारा था, गीतों के नभ का, अनुपम ध्रुवतारा था।’ विनोद भृंग ने कहा-‘सरस मंचों के अधरों की सरल मुस्कान थे राजन। नरेंद्र मस्ताना, हरिराम पथिक, प्रतिभा त्रिपाठी , करुणा प्रकाश,’संजीव झींगरन, आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस दौरान नीलांजना किशोर, कुलदीप धमीजा, सुमेधा नीरज, अलका शर्मा, मंजू जैन,केके गर्ग, राकेश शर्मा, जावेद सरोहा, अनुपमा चौधरी, गीता सिंह, आदि मौजूद रहे।