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Saharanpur News: मंचों से उठने लगी आवाज, सियासत में चाहिए हिस्सेदारी
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सहारनपुर। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले जिले में विभिन्न बिरादरियों के बड़े आयोजनों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। गुर्जर, सैनी और त्यागी-भूमिहार ब्राह्मण समाज समेत कई बिरादरियां सामाजिक सम्मेलनों के जरिये अपनी एकजुटता दिखाने के साथ राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग भी उठा रही हैं।
इन कार्यक्रमों के मंचों से समाज की ताकत का एहसास कराने और राजनीतिक दलों तक अपनी अपेक्षाएं पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
पिछले दिनों देवबंद में आयोजित त्यागी-भूमिहार ब्राह्मण समाज के महाकुंभ में भी प्रतिनिधित्व का सवाल प्रमुखता से गूंजा। इसके अलावा गुर्जर और सैनी समाज की ओर से भी विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से एकजुटता का आह्वान किया जा रहा है। दूसरी बिरादरियां भी अपने आयोजनों के जरिये सामाजिक प्रभाव और राजनीतिक दावेदारी सामने रखने में जुटी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इन कार्यक्रमों के पीछे समाज को एक मंच पर लाने के साथ नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी मजबूत करने की मंशा भी है।
चुनाव में टिकट किसे मिले, संगठन और सत्ता में किसे जगह मिले, इन सवालों पर सामाजिक संगठनों की सक्रियता राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
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इन कार्यक्रमों के मंचों से समाज की ताकत का एहसास कराने और राजनीतिक दलों तक अपनी अपेक्षाएं पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
पिछले दिनों देवबंद में आयोजित त्यागी-भूमिहार ब्राह्मण समाज के महाकुंभ में भी प्रतिनिधित्व का सवाल प्रमुखता से गूंजा। इसके अलावा गुर्जर और सैनी समाज की ओर से भी विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से एकजुटता का आह्वान किया जा रहा है। दूसरी बिरादरियां भी अपने आयोजनों के जरिये सामाजिक प्रभाव और राजनीतिक दावेदारी सामने रखने में जुटी हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इन कार्यक्रमों के पीछे समाज को एक मंच पर लाने के साथ नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी मजबूत करने की मंशा भी है।
चुनाव में टिकट किसे मिले, संगठन और सत्ता में किसे जगह मिले, इन सवालों पर सामाजिक संगठनों की सक्रियता राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।