{"_id":"632368e0aac9bf632479b4e4","slug":"veterinary-officers-will-take-refuge-in-the-court-saharanpur-news-mrt6054267180","type":"story","status":"publish","title_hn":"न्यायालय की शरण लेंगे पशु चिकित्साधिकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न्यायालय की शरण लेंगे पशु चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
सहारनपुर। जनपद के छह पशु चिकित्साधिकारियों का इस्तीफा राज्यपाल द्वारा मंजूर होने के मामले में चिकित्सक न्यायालय की शरण लेंगे। इससे पूर्व वह अपना पक्ष उच्चाधिकारियों के समक्ष रखेंगे।
उप्र पशु चिकित्सा संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि शासन की एकतरफा कार्रवाई के विरोध में सभी पशु चिकित्साधिकारी न्यायालय जाएंगे। क्योंकि, संघ और चिकित्सकों सामूहिक त्यागपत्र शासन-प्रशासन को भेजा ही नहीं था। सिर्फ सोशल मीडिया पर पत्र वायरल होने के बाद शासन ने इस्तीफे मंजूर कर लिए। उनका पक्ष सुने बिना इस्तीफे मंजूर करना अन्याय है। पशु चिकित्सक न्यायालय में जाने से पहले उच्चाधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखेंगे। उनका कहना है कि इन दिनों जिलों में गोवंशीय पशुओं में लंपी रोग फैल रहा है, जिससे पशु पालक परेशान हैं। वह मुसीबत की इस घड़ी में पशु पालकों को कैसे छोड़कर जा सकते हैं। उनकी प्राथमिकता गोवंशीय पशुओं को बचाना है। वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन बेवजह उत्पीड़न को भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
यह था मामला
जनपद अमरोहा में 63 गायों की मौत के मामले में पशु चिकित्साधिकारी को निलंबित किया गया था। उप्र पशु चिकित्सा संघ ने इसका विरोध जताया था और उन्हें बहाल करने की मांग की थी। इसी क्रम में जनपद के पशु चिकित्सकों ने सांकेतिक इस्तीफा का पत्र निदेशक प्रशासन एवं विकास पशुपालन विभाग लखनऊ के नाम तैयार किया, लेकिन इस पत्र को शासन और प्रशासन को नहीं भेजा गया था। इससे पूर्व यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद शासन ने उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी तहसील सदर डॉ. प्रमोद कुमार, पशुधन विकास अधिकारी डॉ. सुनील दत्त, पशु चिकित्साधिकारी स्वास्थ्य डॉ. मुकेश गुप्ता, डॉ. संजय चतुर्वेदी, डॉ. नागेंद्र और अखिलेश गुप्ता का इस्तीफा मंजूर कर लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
उप्र पशु चिकित्सा संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि शासन की एकतरफा कार्रवाई के विरोध में सभी पशु चिकित्साधिकारी न्यायालय जाएंगे। क्योंकि, संघ और चिकित्सकों सामूहिक त्यागपत्र शासन-प्रशासन को भेजा ही नहीं था। सिर्फ सोशल मीडिया पर पत्र वायरल होने के बाद शासन ने इस्तीफे मंजूर कर लिए। उनका पक्ष सुने बिना इस्तीफे मंजूर करना अन्याय है। पशु चिकित्सक न्यायालय में जाने से पहले उच्चाधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखेंगे। उनका कहना है कि इन दिनों जिलों में गोवंशीय पशुओं में लंपी रोग फैल रहा है, जिससे पशु पालक परेशान हैं। वह मुसीबत की इस घड़ी में पशु पालकों को कैसे छोड़कर जा सकते हैं। उनकी प्राथमिकता गोवंशीय पशुओं को बचाना है। वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन बेवजह उत्पीड़न को भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
विज्ञापन
यह था मामला
जनपद अमरोहा में 63 गायों की मौत के मामले में पशु चिकित्साधिकारी को निलंबित किया गया था। उप्र पशु चिकित्सा संघ ने इसका विरोध जताया था और उन्हें बहाल करने की मांग की थी। इसी क्रम में जनपद के पशु चिकित्सकों ने सांकेतिक इस्तीफा का पत्र निदेशक प्रशासन एवं विकास पशुपालन विभाग लखनऊ के नाम तैयार किया, लेकिन इस पत्र को शासन और प्रशासन को नहीं भेजा गया था। इससे पूर्व यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद शासन ने उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी तहसील सदर डॉ. प्रमोद कुमार, पशुधन विकास अधिकारी डॉ. सुनील दत्त, पशु चिकित्साधिकारी स्वास्थ्य डॉ. मुकेश गुप्ता, डॉ. संजय चतुर्वेदी, डॉ. नागेंद्र और अखिलेश गुप्ता का इस्तीफा मंजूर कर लिया था।
विज्ञापन