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पाले की दस्तक से प्रभावित होंगी सब्जियां
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सहारनपुर। लगातार गिर रहे तापमान से पाले की दस्तक शुरू हो गई है। इसका सबसे अधिक प्रभाव सब्जियों की फसल पर पड़ने की आशंका है। यदि पाले का प्रकोप बढ़ा तो आलू, टमाटर, लौकी, पपीता सहित अन्य सब्जियों और केला आम, आडू एवं अमरूद सहित बागवानी पर विपरीत प्रभाव पडे़गा। इसके चलते सब्जियां मंहगी हो सकती है।
कड़ाके की सर्दी के साथ पाले ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है। जिसका सब्जियों की फसलों पर सबसे अधिक प्रभाव पडे़गा। इसके चलते आने वाले दिनों में महंगाई की वजह से सब्जियां बेस्वाद हो सकती हैं। जनपद में करीब 24 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सब्जियों की खेती होती है। इनमें लौकी, गौभी, टमाटर, आलू, मिर्च, बैंगन, मेथी, मटर, मूली, चकुं दर, पालक, सेम, पपीता आदि सब्जियों की फसल शामिल हैं। बागवानी में आम, अमरूद, आडू, केला आदि की फसल को पाले से नुकसान होने की आशंका रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुुशवाहा ने बताया कि जिस दिन आसमान साफ होता है, उस दिन पाला पड़ने की आशंका रहती है। पाले में पौधे की पत्तियों ओस की बूंदे और कोशिकाओं का पानी जम जाता है। जिससे पौधे की तमाम क्रियाएं रुक जाती है और फसल को काफी नुकसान पहुंचता है। सब्जियों और बागवानी की फसलों को पाला सर्वाधिक प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि पाले से बचाव के लिए फसल में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। ऐसे में यदि सल्फर की दो किलो मात्रा प्रति बीघा की दर से डाल दें तो वह पाले के प्रकोप से बचाव करने में खासा सहायक होता है। नर्सरी में रात के समय पौधों को प्लास्टिक के चादर या पुआल से ढक देना फायदेमंद रहता है। उन्होंने बताया कि पाले से बचाव के उपाय नहीं किए जाएं तो काफी नुकसान की आशंका रहती है।
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कड़ाके की सर्दी के साथ पाले ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है। जिसका सब्जियों की फसलों पर सबसे अधिक प्रभाव पडे़गा। इसके चलते आने वाले दिनों में महंगाई की वजह से सब्जियां बेस्वाद हो सकती हैं। जनपद में करीब 24 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सब्जियों की खेती होती है। इनमें लौकी, गौभी, टमाटर, आलू, मिर्च, बैंगन, मेथी, मटर, मूली, चकुं दर, पालक, सेम, पपीता आदि सब्जियों की फसल शामिल हैं। बागवानी में आम, अमरूद, आडू, केला आदि की फसल को पाले से नुकसान होने की आशंका रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुुशवाहा ने बताया कि जिस दिन आसमान साफ होता है, उस दिन पाला पड़ने की आशंका रहती है। पाले में पौधे की पत्तियों ओस की बूंदे और कोशिकाओं का पानी जम जाता है। जिससे पौधे की तमाम क्रियाएं रुक जाती है और फसल को काफी नुकसान पहुंचता है। सब्जियों और बागवानी की फसलों को पाला सर्वाधिक प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि पाले से बचाव के लिए फसल में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। ऐसे में यदि सल्फर की दो किलो मात्रा प्रति बीघा की दर से डाल दें तो वह पाले के प्रकोप से बचाव करने में खासा सहायक होता है। नर्सरी में रात के समय पौधों को प्लास्टिक के चादर या पुआल से ढक देना फायदेमंद रहता है। उन्होंने बताया कि पाले से बचाव के उपाय नहीं किए जाएं तो काफी नुकसान की आशंका रहती है।
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