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बच्ची की मौत पर परिजनों का अस्पताल पर हंगामा
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सहारनपुर: माधव नगर स्थित घर में बने नर्सिंग होम में बालिका की मौत के बाद विलाप करता पिता और मॉ
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। माधवनगर में स्थित एक निजी चिकित्सालय में उपचाराधीन बच्ची की मौत पर परिजनों और अन्य लोगों ने काफी हंगामा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची के इलाज में लापरवाही बरती गई और बच्ची की मौत के बाद भी उन्हें देरी से इसकी सूचना दी गई। हंगामे के बाद पुलिस ने पहुंचकर मामला शांत कराया। पुलिस का कहना है कि घटना की जांच कराई जा रही है।
हंगामा कर रहे लोगों में शामिल नकुड़ क्षेत्र के गांव रेतगढ़ निवासी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उसकी बेटी वंशिका के पैर में मवाद आ रहा था। उसके पैर में काफी दर्द था। उसे सेफ्टिक हो गया था। कुछ लोगों के कहने पर वह बेटी को उपचार के लिए माधव नगर स्थित निजी चिकित्सालय में लाया था। उसने कहा कि वह काफी गरीब है। उसके पास ज्यादा पैसे नहीं थे। इसके बावजूद उसने बच्ची के उपचार के लिए 50 हजार रुपये की व्यवस्था की। इसके बावजूद उसकी बच्ची की जान चली गई। परिजनों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि बच्ची की मौत होने के बावजूद उन्हें इसकी सही सूचना देने में देरी की गई। हंगामे की सूचना पर पहुंची नगर कोतवाली पुलिस ने लोगों को शांत कराया और जांच का आश्वासन दिया।
कुछ अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि यहां आवास पर ही क्लीनिक भी है। इसकी जांच करानी चाहिए। नगर कोतवाल अभिषेक सिरोही ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चिकित्सक को साथ लेकर आ गई थी। प्रकरण की जांच अभी की जा रही है। इस घटना पर निजी चिकित्सक डॉ. राजीव गुप्ता का कहना है कि परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप सही नहीं है। उनकी ओर से बेहतर उपचार के प्रयास किए गए। हालत गंभीर होने के कारण सुबह नौ बजे उसे रेफर करने की सलाह दी गई थी, लेकिन परिजनों ने तब इससे इंकार कर दिया था।
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उधर, सीएमओ डा. बीएस सोढ़ी ने कहा कि उपचार के दौरान मौत के मामलों को लेकर न्यायिक स्तर पर कुछ नई व्यवस्थाएं की गई हैं। इसलिए जब तक बच्ची की मौत का सही कारण, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और अन्य जानकारियां उपलब्ध नहीं होतीं तब तक किसी चिकित्सक पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। पीड़ित पक्ष की ओर से भी अभी कोई जानकारी उन्हें नहीं दी गई है।
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हंगामा कर रहे लोगों में शामिल नकुड़ क्षेत्र के गांव रेतगढ़ निवासी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उसकी बेटी वंशिका के पैर में मवाद आ रहा था। उसके पैर में काफी दर्द था। उसे सेफ्टिक हो गया था। कुछ लोगों के कहने पर वह बेटी को उपचार के लिए माधव नगर स्थित निजी चिकित्सालय में लाया था। उसने कहा कि वह काफी गरीब है। उसके पास ज्यादा पैसे नहीं थे। इसके बावजूद उसने बच्ची के उपचार के लिए 50 हजार रुपये की व्यवस्था की। इसके बावजूद उसकी बच्ची की जान चली गई। परिजनों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि बच्ची की मौत होने के बावजूद उन्हें इसकी सही सूचना देने में देरी की गई। हंगामे की सूचना पर पहुंची नगर कोतवाली पुलिस ने लोगों को शांत कराया और जांच का आश्वासन दिया।
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कुछ अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि यहां आवास पर ही क्लीनिक भी है। इसकी जांच करानी चाहिए। नगर कोतवाल अभिषेक सिरोही ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चिकित्सक को साथ लेकर आ गई थी। प्रकरण की जांच अभी की जा रही है। इस घटना पर निजी चिकित्सक डॉ. राजीव गुप्ता का कहना है कि परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप सही नहीं है। उनकी ओर से बेहतर उपचार के प्रयास किए गए। हालत गंभीर होने के कारण सुबह नौ बजे उसे रेफर करने की सलाह दी गई थी, लेकिन परिजनों ने तब इससे इंकार कर दिया था।
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उधर, सीएमओ डा. बीएस सोढ़ी ने कहा कि उपचार के दौरान मौत के मामलों को लेकर न्यायिक स्तर पर कुछ नई व्यवस्थाएं की गई हैं। इसलिए जब तक बच्ची की मौत का सही कारण, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और अन्य जानकारियां उपलब्ध नहीं होतीं तब तक किसी चिकित्सक पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। पीड़ित पक्ष की ओर से भी अभी कोई जानकारी उन्हें नहीं दी गई है।

माधव नगर स्थित घर में बने नर्सिंग होम में बालिका की मौत के बाद शव से लिपटकर विलाप करता पिता।- फोटो : SAHARANPUR