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मोहम्मद साहब की फोटो छापने पर जताया रोष
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- सहारनपुर में अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते बसपा सांसद, नायब शहर काजी और अन्य लोग।
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। विद्या प्रकाशन मंदिर दिल्ली की पुस्तक ‘इनक्रेडिबल वर्ल्ड’ में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के फोटो को प्रकाशित किए जाने पर बसपा सांसद, मुस्लिम समाज और उलमा ने रोष जताया है। एडीएम को ज्ञापन सौंपकर इसके प्रकाशक और लेखक के खिलाफ कार्रवाई करने और पुस्तक को बाजार से हटाने की मांग की है। यह पुस्तक कक्षा चार में पढ़ाई जा रही है। दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने पुस्तक को कोर्स में शामिल नहीं करने और सरकार से प्रकाशक और लेखक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
इस संबंध में बसपा सांसद फजलुर्रहमान के नेतृत्व में मुस्लिमों के एक प्रतिनिधि मंडल ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने कहा है कि विद्या प्रकाशन मंदिर दिल्ली द्वारा प्रकाशित और कक्षा चार की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के पृष्ठ संख्या-89 पर इस्लाम धर्म के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का फोटो लगाया है, जिससे इस्लाम धर्म के अनुयायियों में रोष है। इस्लाम में किसी भी चित्र, चलचित्र पर पाबंदी है और पैगंबर साहब के चित्र प्रकाशन को तौहीन समझा जाता है। ज्ञापन देने वालों में बसपा सांसद के अलावा नायब शहर काजी नदीम अख्तर, मौलाना अब्दुल मलिक मुगीसी, मौलाना फरीद मजाहिरी, हुमैद खान सरोहा, मजहर खान, अमजद अली, वजाहत अली खान, राव मुस्तकीम, अमर राजा, गयूर आलम आदि शामिल रहे।
लेखक प्रकाशक की मंशा क्या, जांच हो: नोमानी
देवबंद। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि शैक्षिक संस्थाओं पर शांतिपूर्वक दबाव बनाया जाए कि वह उक्त पुस्तक को कोर्स में शामिल न करें, साथ ही उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से प्रकाशक व लेखक के खिलाफ कार्रवाई करने और पुस्तक को प्रतिबंधित किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर ऐसे काम कर रहे हैं, जिससे देश को बिखराव के रास्ते पर खड़ा कर सकें। पुस्तक के प्रकाशक और लेखक का यह कृत्य बर्दाश्त के लायक नहीं है। इस बात की जांच होनी चाहिए कि इस तरह की हरकतों के पीछे प्रकाशक और लेखक की क्या मंशा है। संवाद
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नई किताबें भेजी जा रहीं
-कोरोना काल के समय कुछ पुस्तकों में यह त्रुटि सामने आई थी। इसके बाद सभी किताबों को वापस मंगवाकर संपादित कर नई किताबें बाजार में भेजी दी थी। शिकायतकर्ताओं को क्षमा पत्र भी भेज दिया था। यदि अभी भी किसी के पास पुरानी किताब हैं तो वो उसे वापस दे सकते हैं। -सौरभ जैन, प्रबंध निदेशक विद्या प्रकाशन
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इस संबंध में बसपा सांसद फजलुर्रहमान के नेतृत्व में मुस्लिमों के एक प्रतिनिधि मंडल ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने कहा है कि विद्या प्रकाशन मंदिर दिल्ली द्वारा प्रकाशित और कक्षा चार की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के पृष्ठ संख्या-89 पर इस्लाम धर्म के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का फोटो लगाया है, जिससे इस्लाम धर्म के अनुयायियों में रोष है। इस्लाम में किसी भी चित्र, चलचित्र पर पाबंदी है और पैगंबर साहब के चित्र प्रकाशन को तौहीन समझा जाता है। ज्ञापन देने वालों में बसपा सांसद के अलावा नायब शहर काजी नदीम अख्तर, मौलाना अब्दुल मलिक मुगीसी, मौलाना फरीद मजाहिरी, हुमैद खान सरोहा, मजहर खान, अमजद अली, वजाहत अली खान, राव मुस्तकीम, अमर राजा, गयूर आलम आदि शामिल रहे।
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लेखक प्रकाशक की मंशा क्या, जांच हो: नोमानी
देवबंद। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि शैक्षिक संस्थाओं पर शांतिपूर्वक दबाव बनाया जाए कि वह उक्त पुस्तक को कोर्स में शामिल न करें, साथ ही उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से प्रकाशक व लेखक के खिलाफ कार्रवाई करने और पुस्तक को प्रतिबंधित किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर ऐसे काम कर रहे हैं, जिससे देश को बिखराव के रास्ते पर खड़ा कर सकें। पुस्तक के प्रकाशक और लेखक का यह कृत्य बर्दाश्त के लायक नहीं है। इस बात की जांच होनी चाहिए कि इस तरह की हरकतों के पीछे प्रकाशक और लेखक की क्या मंशा है। संवाद
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नई किताबें भेजी जा रहीं
-कोरोना काल के समय कुछ पुस्तकों में यह त्रुटि सामने आई थी। इसके बाद सभी किताबों को वापस मंगवाकर संपादित कर नई किताबें बाजार में भेजी दी थी। शिकायतकर्ताओं को क्षमा पत्र भी भेज दिया था। यदि अभी भी किसी के पास पुरानी किताब हैं तो वो उसे वापस दे सकते हैं। -सौरभ जैन, प्रबंध निदेशक विद्या प्रकाशन

मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, मोहतमिम दारुल उलूम- फोटो : DEVBAND