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यूक्रेन ने भारतीय मूल के छात्रों को उनके हाल पर छोड़ा
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यूक्रेन से बस से बॉर्डर के लिए रवाना होते सहारनपुर के इरफान।
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे भारतीय नागरिकों को रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचाने के लिए यूक्रेन सरकार या किसी अन्य स्तर से कोई मदद नहीं मिल रही है। वहां की सरकार और विश्वविद्यालयों ने छात्रों को उनके भरोसे छोड़ दिया है। यूक्रेन के तेरनोपिल शहर में एमबीबीएस कर रहे सहारनपुर के माहीपुरा निवासी छात्र इरफान ने फोन पर अपना दर्द बयां किया।
अमर उजाला ने यूक्रेन में फंसे इरफान के फोन पर संपर्क कर उनसे बात की। इरफान ने बताया कि उसके साथ भारतीय मूल के 22 छात्र तेरनोपिल मेडिकल विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते हैं। वह जिस शहर में रहते हैं उससे मात्र 100 किलोमीटर की दूरी पर हमले हुए हैं। यूक्रेन सरकार के साथ ही विश्वविद्यालय ने भी उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। तेरनोपिल शहर से रोमानिया बॉर्डर की दूरी करीब 480 किलोमीटर है, जहां के लिए उसे और उसके 22 साथियों को एक लाख रुपये में बस किराए पर करनी पड़ी है। इरफान का आरोप है कि उन्हें बॉर्डर तक लाने के लिए किसी प्रकार की मदद न तो भारतीय सरकार से मिली है और न ही यूक्रेन सरकार से। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। कुछ छात्र ऐसे हैं, जिनके पास पर्याप्त पैसा भी नहीं है। इरफान का दावा है कि उनके कुछ साथी पहले ही रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच चुके हैं, जिनको भटकाया जा रहा है। वह सभी डरे हुए हैं।
‘अपने वतन जिंदा लौट आएं दुआ करें’
इरफान ने बताया कि यूक्रेन में हालात गंभीर हैं। लगातार हमले हो रहे हैं, जिनकी गूंज सुनाई दे रही है। ऐसे में वह और उसके सभी साथी छात्र घबराए हुए हैं। इरफान ने भारतीयों से अपील की है कि वह यूक्रेन में फंसे भारतीयों के लिए दुआ करें कि वह अपने वतन में जिंदा लौट आएं।
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चिकित्सक की बेटी भी यूक्रेन में है
सहारनपुर। एसबीडी जिला चिकित्सालय के रेडियोलोजिस्ट डॉ. गजेंद्र सिंह की बेटी निहारिका भी यूक्रेन में है। वह वहां एमबीबीएस कर रही है। डॉ. सिंह ने बताया कि बेटी को दो दिन पहले एयरप्लेन का टिकट हो गया था, मगर युद्ध शुरू होने के कारण वह एयरपोर्ट तक नहीं पहुंची। परिजन बेटी को लेकर चिंतित हैं, वो उसे लगातार हौसला बनाए रखने को कह रहे हैं।
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अमर उजाला ने यूक्रेन में फंसे इरफान के फोन पर संपर्क कर उनसे बात की। इरफान ने बताया कि उसके साथ भारतीय मूल के 22 छात्र तेरनोपिल मेडिकल विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते हैं। वह जिस शहर में रहते हैं उससे मात्र 100 किलोमीटर की दूरी पर हमले हुए हैं। यूक्रेन सरकार के साथ ही विश्वविद्यालय ने भी उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। तेरनोपिल शहर से रोमानिया बॉर्डर की दूरी करीब 480 किलोमीटर है, जहां के लिए उसे और उसके 22 साथियों को एक लाख रुपये में बस किराए पर करनी पड़ी है। इरफान का आरोप है कि उन्हें बॉर्डर तक लाने के लिए किसी प्रकार की मदद न तो भारतीय सरकार से मिली है और न ही यूक्रेन सरकार से। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। कुछ छात्र ऐसे हैं, जिनके पास पर्याप्त पैसा भी नहीं है। इरफान का दावा है कि उनके कुछ साथी पहले ही रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच चुके हैं, जिनको भटकाया जा रहा है। वह सभी डरे हुए हैं।
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‘अपने वतन जिंदा लौट आएं दुआ करें’
इरफान ने बताया कि यूक्रेन में हालात गंभीर हैं। लगातार हमले हो रहे हैं, जिनकी गूंज सुनाई दे रही है। ऐसे में वह और उसके सभी साथी छात्र घबराए हुए हैं। इरफान ने भारतीयों से अपील की है कि वह यूक्रेन में फंसे भारतीयों के लिए दुआ करें कि वह अपने वतन में जिंदा लौट आएं।
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चिकित्सक की बेटी भी यूक्रेन में है
सहारनपुर। एसबीडी जिला चिकित्सालय के रेडियोलोजिस्ट डॉ. गजेंद्र सिंह की बेटी निहारिका भी यूक्रेन में है। वह वहां एमबीबीएस कर रही है। डॉ. सिंह ने बताया कि बेटी को दो दिन पहले एयरप्लेन का टिकट हो गया था, मगर युद्ध शुरू होने के कारण वह एयरपोर्ट तक नहीं पहुंची। परिजन बेटी को लेकर चिंतित हैं, वो उसे लगातार हौसला बनाए रखने को कह रहे हैं।