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Saharanpur News: किसानों के 238 करोड़ रुपये दबाए बैठीं जनपद की दो चीनी मिलें

Sun, 20 Aug 2023 10:08 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Aug 2023 10:08 PM IST
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Two sugar mills of the district are sitting on farmers' 238 crore rupees
- गांगनौली चीनी मिल पर सबसे अधिक गन्ना मूल्य बकाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। शासन-प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद जनपद की दो चीनी मिल बकाया गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरत रहीं हैं। इसके चलते गांगनौली और गागलहेड़ी चीनी मिल पर किसानों के करीब 238 करोड़ रुपये बकाया हैं। बकाया भुगतान नहीं होने से क्षेत्र के किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पेराई सत्र समाप्त होने के करीब तीन माह बीतने के बावजूद जनपद की सात में से दो चीनी मिलों पर किसानों का गन्ना मूल्य अभी भी बकाया है। इनमें गांगनौली चीनी मिल पर करीब 190 करोड़ रुपये और गागलहेड़ी चीनी मिल पर लगभग 48 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके अलावा इस पेराई सत्र का जिले की सात में से छह चीनी मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य पर 10.75 करोड़ रुपये ब्याज भी हो गया है। नियम के अनुसार चीनी मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के भीतर गन्ना मूल्य भुगतान हो जाना चाहिए। इसके बाद भुगतान करने पर बकाया गन्ना मूल्य पर 15 फीसदी की दर से ब्याज देने का प्रावधान है, लेकिन अधिकांश चीनी मिलें न तो समय पर गन्ना मूल्य भुगतान ही करती हैं और न ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज दे रहीं हैं।
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-- वर्जन --

जनपद में गांगनौली पर लगभग 190 करोड़ और गागलहेड़ी पर करीब 48 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य के बकाया हैं। भुगतान में कोताही बरतने पर दोनों बकाएदार चीनी मिलाें को नोटिस जारी किए गए हैं। यदि शीघ्र ही पूरे बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया तो संबंधित चीनी मिल के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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--- सुशील कमार, जिला गन्ना अधिकारी।
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बोले किसान ---
ग्राम सोहनचिड़ा निवासी किसान मोहम्मद तनवीर का कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से आर्थिक परेशानी हो गई है। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने की मांग को लेकर किसान संगठन कई बार मिल गेट पर धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। समय पर गन्ना मूल्य भुगतान नहीं करने वाली चीनी मिलों से बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज भी दिलाए।

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ग्राम इशहाकपुर निवासी किसान जगदीश प्रसाद का कहना है कि क्षेत्र के किसानों का 90 प्रतिशत से अधिक गन्ना चीनी मिलाें को सप्लाई होता है, लेकिन शुगर मिल गन्ना मूल्य भुगतान बहुत धीमी गति से कर रही हैं। आर्थिक जरूरत पूरी करने के लिए किसानों पर कर्ज हो गया है। सरकार या तो समय पर गन्ना मूल्य भुगतान कराए या बकाया पर ब्याज दिलाए।
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