{"_id":"6056413f8ebc3ecfdd542701","slug":"trends-in-sugarcane-plantation-and-mushroom-cultivation-saharanpur-news-mrt5308928136","type":"story","status":"publish","title_hn":"तैयार कर रहीं गन्ने की पौध, मशरूम की खेती में भी रुझान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तैयार कर रहीं गन्ने की पौध, मशरूम की खेती में भी रुझान
विज्ञापन
खेत में पौध लगाती महिलाए
- फोटो : SAHARANPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। महिलाएं न सिर्फ परंपरागत खेती में परिवार का सहयोग कर रहीं हैं बल्कि अलग प्रयोग कर आत्मनिर्भर भी बन रहीं हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं जहां बड चिप विधि से गन्ने की पौध तैयार कर मुनाफा कमा रहीं। वहीं मशरूम की खेती को अपना रही हैं।
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सिंगल बड चिप विधि से गन्ना पौध तैयार कर बढ़िया आय प्राप्त कर रही हैं। शरदकालीन गन्ना बुवाई सत्र में ही मंडल के 113 समूहों की 1103 महिलाओं ने 48,22,303 पौध तैयार की और करीब डेढ़ करोड़ रुपये में उसे बेचा है। इसमें महिलाओं को प्रति पौधा तीन रुपये मिलते हैं। इसमें से डेढ़ रुपया गन्ना विभाग और डेढ़ रुपया पौध खरीदने वाला किसान देता है। पौध तैयार करने में आई लागत निकालकर प्रति पौधा 50 पैसे से एक रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। इसके चलते महिलाओं को न सिर्फ रोजगार मिल रहा है बल्कि वे आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही हैं।
रोजगार के साथ आर्थिक लाभ मिला
जगरोशनी लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और बबली आशा स्वयं सहायता समूह की बबली की सदस्य हैं। उनका कहना कि वे महिलाओं के साथ मिलकर गन्ना पौध तैयार करती हैं। इससे उन्हें घर पर ही रोजगार मिल रहा है। पौध बेचकर मिलने वाली धनराशि सीधे बैंक खाते में आती है।
विज्ञापन
मशरूम की खेती कर कमा रहीं मुनाफा
महिलाएं मशरूम की खेती से भी बढ़िया मुनाफा कमा रहीं हैं। गांव मुर्तजापुर की पूजा सैनी, उनाली की मुनेश, बिहारीगढ़ की प्रियंका और उसंड की शिखा जनपद में सफलतापूर्वक मशरूम की खेती कर रहीं हैं। उनका कहना है कि मशरूम की खेती को कम लागत से शुरू किया जा सकता है। साथ ही इसमें आय भी बढ़िया प्राप्त हो रही है।
जनपद में कई महिलाएं मशरूम की सफलतापूर्वक खेती कर रहीं हैं। इसमें लागत कम है और मुनाफा अच्छा होने से महिलाओं का रुझान इसकी खेती की ओर बढ़ रहा है। इसकी खेती करना अन्य फसलों की अपेक्षा आसान भी है। -- डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी केवीके।
गन्ना विभाग, चीनी मिल और गन्ना शोध केंद्र स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को गन्ना पौध तैयार करने के लिए प्रशिक्षण देते हैं। महिलाएं एक स्थान पर गन्ने की पौध तैयार करती हैं। प्रति पौध करीब 50 पैसे से एक रुपये की बचत हो जाती है। इसका भुगतान सीधा महिलाओं के बैंक खाते में होता है। -- डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।
विज्ञापन
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सिंगल बड चिप विधि से गन्ना पौध तैयार कर बढ़िया आय प्राप्त कर रही हैं। शरदकालीन गन्ना बुवाई सत्र में ही मंडल के 113 समूहों की 1103 महिलाओं ने 48,22,303 पौध तैयार की और करीब डेढ़ करोड़ रुपये में उसे बेचा है। इसमें महिलाओं को प्रति पौधा तीन रुपये मिलते हैं। इसमें से डेढ़ रुपया गन्ना विभाग और डेढ़ रुपया पौध खरीदने वाला किसान देता है। पौध तैयार करने में आई लागत निकालकर प्रति पौधा 50 पैसे से एक रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। इसके चलते महिलाओं को न सिर्फ रोजगार मिल रहा है बल्कि वे आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही हैं।
विज्ञापन
रोजगार के साथ आर्थिक लाभ मिला
जगरोशनी लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और बबली आशा स्वयं सहायता समूह की बबली की सदस्य हैं। उनका कहना कि वे महिलाओं के साथ मिलकर गन्ना पौध तैयार करती हैं। इससे उन्हें घर पर ही रोजगार मिल रहा है। पौध बेचकर मिलने वाली धनराशि सीधे बैंक खाते में आती है।
विज्ञापन
मशरूम की खेती कर कमा रहीं मुनाफा
महिलाएं मशरूम की खेती से भी बढ़िया मुनाफा कमा रहीं हैं। गांव मुर्तजापुर की पूजा सैनी, उनाली की मुनेश, बिहारीगढ़ की प्रियंका और उसंड की शिखा जनपद में सफलतापूर्वक मशरूम की खेती कर रहीं हैं। उनका कहना है कि मशरूम की खेती को कम लागत से शुरू किया जा सकता है। साथ ही इसमें आय भी बढ़िया प्राप्त हो रही है।
जनपद में कई महिलाएं मशरूम की सफलतापूर्वक खेती कर रहीं हैं। इसमें लागत कम है और मुनाफा अच्छा होने से महिलाओं का रुझान इसकी खेती की ओर बढ़ रहा है। इसकी खेती करना अन्य फसलों की अपेक्षा आसान भी है। -- डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी केवीके।
गन्ना विभाग, चीनी मिल और गन्ना शोध केंद्र स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को गन्ना पौध तैयार करने के लिए प्रशिक्षण देते हैं। महिलाएं एक स्थान पर गन्ने की पौध तैयार करती हैं। प्रति पौध करीब 50 पैसे से एक रुपये की बचत हो जाती है। इसका भुगतान सीधा महिलाओं के बैंक खाते में होता है। -- डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।