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तीनों नसें बंद होने पर भी स्टेंट से संभव है इलाज : डॉ. राज प्रताप
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आईएमए की मासिक बैठक में जानकारी देते हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राज प्रताप सिंह। स्रोत-एसोसिएशन
- आईएमए की मासिक बैठक में हृदय रोग और रोबोटिक सर्जरी पर दी गई जानकारी
फोटो समाचार -
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की मासिक बैठक जीपीओ रोड स्थित एक होटल में हुई। इस दौरान देहरादून से आए वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ ने हृदय रोग और सर्जरी के क्षेत्र में हो रही नई तकनीकों की जानकारी दी। बताया कि तीनों नसें बंद होने पर भी स्टेंट से इलाज संभव है।
देहरादून से आए वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राज प्रताप सिंह ने बताया कि अब यदि हृदय की तीनों नसें बंद हों तो स्टेंट के माध्यम से उन्हें खोलना संभव है। उन्होंने कहा कि मरीज की धड़कन को बहुत छोटे आकार के पेसमेकर की मदद से भी नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने हृदय रोगियों को खानपान पर विशेष ध्यान देने और नियमित व्यायाम करने की सलाह दी। वरिष्ठ गैस्ट्रिक सर्जन डॉ. सचिन अरोड़ा ने पित्त की थैली में पथरी को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में पित्त की थैली की पथरी गंभीर समस्या का कारण बन सकती है, इसलिए चिकित्सीय सलाह लेकर समय पर सर्जरी कराना जरूरी है।
मासिक बैठक में आईएमए सचिव डॉ. नीरज आर्य, वैज्ञानिक सचिव डॉ. कलीम अहमद, डॉ. अनुपम मलिक, डॉ. मनदीप सिंह, डॉ. मोहन पांडेय, डॉ. महेश ग्रोवर, डॉ. डीके तिवारी, डॉ. वंदना वर्मा, डॉ. संजय यादव, डॉ. स्वर्णजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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सहारनपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की मासिक बैठक जीपीओ रोड स्थित एक होटल में हुई। इस दौरान देहरादून से आए वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ ने हृदय रोग और सर्जरी के क्षेत्र में हो रही नई तकनीकों की जानकारी दी। बताया कि तीनों नसें बंद होने पर भी स्टेंट से इलाज संभव है।
देहरादून से आए वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राज प्रताप सिंह ने बताया कि अब यदि हृदय की तीनों नसें बंद हों तो स्टेंट के माध्यम से उन्हें खोलना संभव है। उन्होंने कहा कि मरीज की धड़कन को बहुत छोटे आकार के पेसमेकर की मदद से भी नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने हृदय रोगियों को खानपान पर विशेष ध्यान देने और नियमित व्यायाम करने की सलाह दी। वरिष्ठ गैस्ट्रिक सर्जन डॉ. सचिन अरोड़ा ने पित्त की थैली में पथरी को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में पित्त की थैली की पथरी गंभीर समस्या का कारण बन सकती है, इसलिए चिकित्सीय सलाह लेकर समय पर सर्जरी कराना जरूरी है।
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मासिक बैठक में आईएमए सचिव डॉ. नीरज आर्य, वैज्ञानिक सचिव डॉ. कलीम अहमद, डॉ. अनुपम मलिक, डॉ. मनदीप सिंह, डॉ. मोहन पांडेय, डॉ. महेश ग्रोवर, डॉ. डीके तिवारी, डॉ. वंदना वर्मा, डॉ. संजय यादव, डॉ. स्वर्णजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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