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कैनवास के जरिए बताया ‘अमूल्य जीवन निधि है जल’
Thu, 16 May 2019 11:48 PM IST
Prag Gupta
ब्यूरो, सहारनपुर
ब्यूरो, सहारनपुर
Published by: Prag Gupta
Updated Thu, 16 May 2019 11:48 PM IST
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चित्रकला प्रतियोगिता की विजेता छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल अभियान के तहत बृहस्पतिवार को एंग्लो हिंदुस्तानी पब्लिक इंटर कालेज में जल संरक्षण विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें छात्राओं ने जल बचाने के लिए अपने विचारों को कूंची की मदद से कैनवास पर उतारा। सुझाव दिए गए कि पानी व्यर्थ न बहाएं यह ब्रह्मांड के समस्त प्राणियों के लिए अमूल्य जीवन निधि है। प्रतियोगिता में कक्षा नौ से 12 तक की डेढ़ सौ छात्राओं ने भागेदारी की।
प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रधानाचार्य भूप सिंह, प्रवक्ता डा. अशोक राय और पूर्व प्रवक्ता शिव कुमार गुप्ता ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि जल प्रकृति द्वारा प्रदत्त नि:शुल्क जीवन तत्व है। लेकिन मनुष्य की स्वार्थ परकता के चलते जल स्तर लगातार गिरने के साथ ही यह दूषित भी हो रहा है।
जिले में ही कभी जीवन दायनी रही हिंडन और कृष्णा नदियां वर्तमान में बीमारियां परोस रही हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए सरकार पर निर्भरता छोड़ कर हमें सामूहिक प्रयास करते हुए इसे जनांदोलन बनाना होगा तभी हमें भू जल के स्तर और और इसकी गुणवत्ता को कायम रख सकते हैं। उन्होंने अमर उजाला के इस प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा भी की।
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उन्होंने कहा कि विशेषकर छात्राओं को अभियान से जोड़ कर अमर उजाला ने नारी शक्ति को सम्मान देने का काम किया है। कार्यक्रम में जगमाल सिंह, भूपेंद्र सिंह, भंवर सिंह पुंडीर, देवीदत्त शुक्ल, रामेश्वर पालीवाल, आशुतोष बहादुर, सुरेंद्र मोहन शर्मा, अजय शर्मा, प्रतिभा, किरण, अमित कुमार, राकेश, राजेश, धर्मेंद्र गेवाल, मधु पुंडीर आदि का सहयोग रहा।
इन छात्राओं की कृतियां रही सर्वश्रेष्ठ
जल संरक्षण विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा नौ से 12 तक की डेढ़ सौ छात्राओं ने प्रतिभाग किया। निर्णायक मंडल में रहे सेवानिवृत्त प्रवक्ता शिव कुमार गुप्ता, कु राखी और डा अशोक राय ने सभी कृतियों का अवलोकन किया। कक्षा नौ में आंचल, हिमानी, जोया, कक्षा दस में रितिका, जेबा, कक्षा 11 में सुमैया अंसारी, प्राची रोहिला, वैसिका सक्सेना, रितिका सैनी, कक्षा 12 में प्रिया कांबोज, महवीश को सर्वश्रेष्ठ कृति के लिए सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त मुस्कान, अंजलि, संजना, काजल, नेहा, सादिका, प्रवेश, आरती, निहारिका, अंशिका, वंशिका, शिल्पी, वर्षा, प्रियंका, शालू, कविता, अफ्सरा, स्वाति, निकिता, रमला, साया, शिवानी, खुशी, मोनिका, अंशु, नव ज्योति, आयुषी चौधरी, छवि धीमान, सारिका, पद्मश्री, गार्गी नोहट, किरण, मुस्कान, खुशी, दिव्या, आंचल, वंशिका रुहेला की कृतियां भी सराही गई।
अंधाधुंध जल का दोहन और नदियों का लगातार प्रदूषित होना ज्वलंत मुद्दा है। अमर उजाला इसके निदान के लिए चलाए जा रहे अभियान को जन आंदोलन बना रहा है। इसमें विशेषकर बालिकाओं की भागेदारी सराहनीय है। आम आदमी अपनी जिम्मेदारी समझे और जल संरक्षण के लिए खुद के घर से पहल करें। - भूप सिंह प्रधानाचार्य
जल संरक्षण पर बच्चों की भागेदारी सामाजिक चेतना में अहम भूमिका निभाएगी। समय की आवश्यकता है कि जल संरक्षण के लिए समाज आगे आए। बच्चे अपने अभिभावकों को भी पानी बचाने के लिए प्रेरित करें। अगर हम वक्त रहते नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ियां शुद्ध पानी के लिए तरसेंगी। - डा अशोक राय प्रवक्ता
जलाशयों का निर्माण और वृक्षारोपण पृथ्वी के गर्भ को फिर से पानी से भर सकता है। हम खुद भी पौधे लगाए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर जल संरक्षण के इस महायज्ञ में आहुति देने का काम करें। - इंदिरा राजेश अध्यापिका
कृषि के क्षेत्र में खेतों का समतली करण करके और पाइप लाइन से सिंचाई की विधि उपयोग में ला कर पानी के दुरुपयोग को रोका जा सकता है। इसमें भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढे़गी। गृहणियां भी बर्तन और कपड़े साफ करते वक्त विभिन्न तरीकों से पानी को बचा सकती हैं। - अल्पना पुंडीर अध्यापिका
भूमि पर वैसे तो सत्तर फीसदी जल है लेकिन इसमें पीने लायक केवल दो प्रतिशत ही है। प्रदूषण की बढ़ती समस्या के कारण इसमें भी लगातार गिरावट आ रही है। पृथ्वी का तापमान भी जल से ही नियंत्रित रहता है। हम वर्षा के जल को टांके बना कर संग्रहित कर सकते हैं। वाहनों को धोने, मिट्टी पर छिड़काव आदि न करके हम पानी की बर्बादी रोक सकते हैं। - धर्मेंद्र कुमार उप प्रधानाचार्य
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प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रधानाचार्य भूप सिंह, प्रवक्ता डा. अशोक राय और पूर्व प्रवक्ता शिव कुमार गुप्ता ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि जल प्रकृति द्वारा प्रदत्त नि:शुल्क जीवन तत्व है। लेकिन मनुष्य की स्वार्थ परकता के चलते जल स्तर लगातार गिरने के साथ ही यह दूषित भी हो रहा है।
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जिले में ही कभी जीवन दायनी रही हिंडन और कृष्णा नदियां वर्तमान में बीमारियां परोस रही हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए सरकार पर निर्भरता छोड़ कर हमें सामूहिक प्रयास करते हुए इसे जनांदोलन बनाना होगा तभी हमें भू जल के स्तर और और इसकी गुणवत्ता को कायम रख सकते हैं। उन्होंने अमर उजाला के इस प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा भी की।
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उन्होंने कहा कि विशेषकर छात्राओं को अभियान से जोड़ कर अमर उजाला ने नारी शक्ति को सम्मान देने का काम किया है। कार्यक्रम में जगमाल सिंह, भूपेंद्र सिंह, भंवर सिंह पुंडीर, देवीदत्त शुक्ल, रामेश्वर पालीवाल, आशुतोष बहादुर, सुरेंद्र मोहन शर्मा, अजय शर्मा, प्रतिभा, किरण, अमित कुमार, राकेश, राजेश, धर्मेंद्र गेवाल, मधु पुंडीर आदि का सहयोग रहा।
इन छात्राओं की कृतियां रही सर्वश्रेष्ठ
जल संरक्षण विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता में कक्षा नौ से 12 तक की डेढ़ सौ छात्राओं ने प्रतिभाग किया। निर्णायक मंडल में रहे सेवानिवृत्त प्रवक्ता शिव कुमार गुप्ता, कु राखी और डा अशोक राय ने सभी कृतियों का अवलोकन किया। कक्षा नौ में आंचल, हिमानी, जोया, कक्षा दस में रितिका, जेबा, कक्षा 11 में सुमैया अंसारी, प्राची रोहिला, वैसिका सक्सेना, रितिका सैनी, कक्षा 12 में प्रिया कांबोज, महवीश को सर्वश्रेष्ठ कृति के लिए सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त मुस्कान, अंजलि, संजना, काजल, नेहा, सादिका, प्रवेश, आरती, निहारिका, अंशिका, वंशिका, शिल्पी, वर्षा, प्रियंका, शालू, कविता, अफ्सरा, स्वाति, निकिता, रमला, साया, शिवानी, खुशी, मोनिका, अंशु, नव ज्योति, आयुषी चौधरी, छवि धीमान, सारिका, पद्मश्री, गार्गी नोहट, किरण, मुस्कान, खुशी, दिव्या, आंचल, वंशिका रुहेला की कृतियां भी सराही गई।
अंधाधुंध जल का दोहन और नदियों का लगातार प्रदूषित होना ज्वलंत मुद्दा है। अमर उजाला इसके निदान के लिए चलाए जा रहे अभियान को जन आंदोलन बना रहा है। इसमें विशेषकर बालिकाओं की भागेदारी सराहनीय है। आम आदमी अपनी जिम्मेदारी समझे और जल संरक्षण के लिए खुद के घर से पहल करें। - भूप सिंह प्रधानाचार्य
जल संरक्षण पर बच्चों की भागेदारी सामाजिक चेतना में अहम भूमिका निभाएगी। समय की आवश्यकता है कि जल संरक्षण के लिए समाज आगे आए। बच्चे अपने अभिभावकों को भी पानी बचाने के लिए प्रेरित करें। अगर हम वक्त रहते नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ियां शुद्ध पानी के लिए तरसेंगी। - डा अशोक राय प्रवक्ता
जलाशयों का निर्माण और वृक्षारोपण पृथ्वी के गर्भ को फिर से पानी से भर सकता है। हम खुद भी पौधे लगाए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर जल संरक्षण के इस महायज्ञ में आहुति देने का काम करें। - इंदिरा राजेश अध्यापिका
कृषि के क्षेत्र में खेतों का समतली करण करके और पाइप लाइन से सिंचाई की विधि उपयोग में ला कर पानी के दुरुपयोग को रोका जा सकता है। इसमें भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढे़गी। गृहणियां भी बर्तन और कपड़े साफ करते वक्त विभिन्न तरीकों से पानी को बचा सकती हैं। - अल्पना पुंडीर अध्यापिका
भूमि पर वैसे तो सत्तर फीसदी जल है लेकिन इसमें पीने लायक केवल दो प्रतिशत ही है। प्रदूषण की बढ़ती समस्या के कारण इसमें भी लगातार गिरावट आ रही है। पृथ्वी का तापमान भी जल से ही नियंत्रित रहता है। हम वर्षा के जल को टांके बना कर संग्रहित कर सकते हैं। वाहनों को धोने, मिट्टी पर छिड़काव आदि न करके हम पानी की बर्बादी रोक सकते हैं। - धर्मेंद्र कुमार उप प्रधानाचार्य