सहारनपुर: जेल में क्षमता 523 की, बंदी 1790 तो कैसे रुकेगा कोरोना, डीआईजी लव कुमार ने किया निरीक्षण
डीआईजी जेल लव कुमार ने सभी जेलों में कोरोना संक्रमण को हर हाल में रोकने के प्रयास के निर्देश दिए हैं। यहां भी रविवार को ही उन्होंने जिला कारागार का निरीक्षण किया। मगर जिला जेल की मौजूदा हालत को देखें तो अब तक चार बंदी संक्रमित मिल चुके हैं। क्षमता से ज्यादा बंदी जेल में हैं, जिस कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी कठिन है।
सहारनपुर में देहरादून रोड पर रोहिला वंश के शासनकाल में निर्मित किले को ही वर्ष 1870 से कारागार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। बताया जाता है कि रोहिला वंश के समय में इस जगह को घुड़साल के रूप में भी प्रयुक्त किया जाता था।
राष्ट्रीय धरोहर के रूप में इसकी महत्ता को देखते हुए ही भारतीय पुरातत्व विभाग ने कुछ साल पहले इसे राष्ट्रीय स्मारक के रूप में संरक्षित करने के लिए जेल वाली जमीन को खाली करने का नोटिस भी जारी किया था। इसके साथ ही नए निर्माण और मरम्मत पर रोक लगाई थी।
भूमि चयन प्रक्रिया पर कोराना काल में लगा ब्रेक
जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. विरेश राज शर्मा बताते हैं कि जिला जेल के लिए बेहट, नागल, देहरादून रोड सहित अन्य जगहों पर जमीन की तलाश शुरू की गई थी। इसमें सरकारी जमीन को प्राथमिकता दी जा रही है। मगर कोरोना काल के कारण इसमें ब्रेक लगा हुआ है।
कम से कम चाहिए 80 एकड़ जमीन
जिला जेल में नौ बैरक हैं, जबकि नई जगह पर कम से कम 25 बैरक का प्रयास किया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि अगले 25 साल तक बंदियों के लिए जेल में जगह कम न पड़ जाए और मानकों से अधिक बंदी न रखने पड़ें। इसके लिए करीब 80 एकड़ जमीन की जरूरत होगी।
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