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तीन तलाक कानून ने दी ताकत, पीड़िताओं का हौसला बढ़ा

Wed, 29 Jul 2020 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2020 11:57 PM IST
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Three divorce laws gave strength, encouragement to victims
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज - फोटो : SAHARANPUR
तीन तलाक कानून ने दी ताकत, पीड़िताओं का हौसला बढ़ा
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सहारनपुर। मुस्लिम समाज में तीन तलाक पर पिछले साल बने कानून ने पीड़ित महिलाओं को बड़ी ताकत दी है। यह कानून बनने के बाद तीन तलाक के मामलों में कमी आई है। वहीं, इससे पीड़ित होने पर थाने से कोर्ट तक आवाज बुलंद करने के प्रति जागरूकता बढ़ी है। जिले में ऐसे मामलों की पैरवी करते आ रहे अधिवक्ताओं के अनुुुसार कानून बनने से पहले जहां हर महीने 30 से 35 केस आते थे, वहीं अब इनकी संख्या 10 से 12 तक ही है। इनमें भी अधिकतर मामले परिवार परामर्श केंद्र या निचली अदालत तक निपटाए जाते हैं।
महिला अधिवक्ता शहजाद बेगम कहती हैं कि निश्चित रूप से इस कानून से पीड़िताओं को बड़ी राहत मिली है। पहले से करीब 60 फीसदी मामले कम हुए हैं। जो आ रहे हैं, उनके पीछे या तो ससुराल के लोगों का हस्तक्षेप होता है या फिर अब बढ़ रही जागरूकता के कारण आ रहे हैं। अच्छी बात यह है कि अब पीड़ित महिलाएं खुलकर आगे आ पा रही हैं।
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वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी जानिसार अहमद कहते हैं कि जितने मामले कम होने चाहिए थे, उतने अभी नहीं हैं। अब भी तीन तलाक के मामले अन्य विवादों के साथ जुड़कर पहुंच रहे हैं। लॉकडाउन के कारण काफी समय तो अदालतों में काम ही नहीं हो पाया। इसलिए आगे ऐसे केस और आ सकते हैं। उनका मानना है कि कानून की सख्ती के साथ ही परिवार और समाज के लोगों की सोच भी ऐसे विवादों का कारण बनती है।
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पीड़ित महिलाओं की ताकत बना कानून : आतिया
तीन तलाक के मुद्दे पर सबसे पहले सहारनपुर से आवाज उठाने वाली तेली वाला चौक आली की चुंगी निवासी आतिया साबरी कहती हैं कि लंबी लड़ाई के बाद यह कानून उनके जैसी पीड़ित महिलाओं की ताकत बना है। उन्होंने वर्ष 2017 में तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सोशल साइंस से एमए करने वाली आतिया ने बताया कि दो बेटियां पैदा होने पर उसके पति वाजिद अली ने उससे नाता तोड़ लिया था। जब से इस पर कानून बना तो ऐसा करने वालों में खौफ और पीड़ित महिलाओं में हौसला बढ़ा है। वह अपनी बेटियों सादिया और सना के साथ बेहद खुश हैं और उनकी पढ़ाई पर ध्यान दे रही हैं। उनके भाई मो. रिजवान ने बताया कि आतिया के मामले में घरेलू हिंसा के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह का हर्जाना देने का आदेश हुआ था। यह न देने पर तीन लाख रुपये के हर्जाने का वारंट वाजिद के लिए जारी हुआ। लॉकडाउन लगने के कारण कोर्ट में प्रक्रिया जारी है।
कानून में कम से कम दस साल सजा की जाए : फरहा फैज
तीन तलाक के मामलों की पैरवी करने वाली और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज ने कहा कि कानून बनने के बाद से महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि वे अब समाज की बंदिशों से नहीं डरती हैं। लेकिन कानून में कुछ संशोधन की जरूरत अब भी है। उनके मुताबिक आरोपी को कम से कम 10 साल की सजा होनी चाहिए। तीन तलाक के केस का सेशन ट्रायल होना चाहिए। आरोपी को जमानत से पहले बांड भरवाया जाना चाहिए कि वह पत्नी को कितना हर्जाना या अन्य मदद देगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो आरोपी की जमानत खारिज कर दी जाए। तभी तीन तलाक जैसा कदम उठाने वालों में खौफ बढ़ेगा।
अब अन्य महिलाओं के लिए मिसाल बन गई खुर्शिदा
अधिवक्ता फरहा फैज बताती हैं कि शादी के करीब 35 साल बाद तीन तलाक दिए जाने से पीड़ित गागलहेड़ी क्षेत्र की खुर्शीदा तो अनूठा उदाहरण है। जिस समय वह इद्दत पर जा रही थी, उसी समय कानून बना था। उसे इसके बारे में बताया गया तो उसने इद्दत छोड़कर अपने शौहर मुस्तकीम के खिलाफ केस दायर किया। इसमें मौलाना को भी नामजद किया गया। क्षेत्र की महिलाओं के लिए तो खुर्शीदा मिसाल बन गई है। किसी भी तरह के उत्पीड़न पर यहां की अधिकतर महिलाएं भी खुर्शीदा की तरह केस करने की धमकी दे देती हैं। इसी कानून के सहारे ही फरहीन, नसीमा, राबिया सहित अन्य महिलाएं तीन तलाक के खिलाफ जंग शुरू कर चुकी हैं। कुछ के मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।
- मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि यह शरीयत का मामला है, हम सिर्फ शरीयत का कानून मानते हैं। जो कानून शरीयत से टकराएगा उसे नहीं मानेंगे। पहले भी तीन तलाक के मामले हमारे यहां नहीं थे। चुनिंदा महिलाओं के कंधे पर रखकर यह कानून बनाया गया था, जिसे हम मानते नहीं हैं। इस कानून की मुखालफत में 80 लाख महिलाओं ने हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लिया था, जबकि कानून के पक्ष में सिर्फ चार लाख महिलाएं ही थीं।

- मोहम्मद नसीम अंसारी एडवोकेट का कहना है कि तीन तलाक कानून से दिक्कत तो नहीं है, लेकिन जेल चले जाने का डर जरूर पैदा हुआ है। भाजपा ने वोटबैंक की राजनीति के चलते तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया। अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है।

अधिवक्ता शहजाद खान

अधिवक्ता शहजाद खान- फोटो : SAHARANPUR

आतिया साबरी बेटियों के साथ।

आतिया साबरी बेटियों के साथ।- फोटो : SAHARANPUR

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