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Saharanpur News: यह है नगर निगम, यहां नहीं चलता तीन साल में पटल बदलने का नियम
Sun, 03 Dec 2023 10:52 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 03 Dec 2023 10:52 PM IST
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- जब तक गंभीर आरोप या गड़बड़ी की शिकायत न हो तो तब तक नहीं बदलता पटल
- लिपिकों को कार्य देने में भी झोल, किसी पर तीन-तीन विभाग, कोई खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर में तीन साल में लिपिकों के पटल बदलने के शासन के आदेश बेमाने साबित हो रहे हैं। यहां जब तक किसी लिपिक पर गंभीर आरोप या गड़बड़ी की शिकायत न हो तब तक उसका पटल नहीं बदलता है। यही वजह है कि कई लिपिक चार और पांच साल से एक ही पटल पर जमे हैं। इसके अलावा कई लिपिकों पर दो से तीन विभागों की अहम जिम्मेदारियां हैं, जबकि कुछ लिपिक टाइम पास कर रहे हैं। यानी उन्हें निचले अधिकारियों का स्टेनो आदि बनाकर रखा हुआ है।
नगर निगम में करीब दो दर्जन लिपिक हैं। शासन के आदेश हैं कि जिस लिपिक को किसी पटल पर तीन साल से अधिक हो जाएं तो उसका पटल परिवर्तन कर दिया जाए, लेकिन शासन के ये आदेश नगर निगम सहारनपुर में पूरी तरह लागू नहीं हो रहे हैं। यहां करीब आठ साल से शासन के आदेशों के अनुरूप लिपिकों के पटल नहीं बदले जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इन आठ साल में पटल नहीं बदले गए हैं। यदि किसी लिपिक द्वारा गड़बड़ी करने या फिर अन्य किसी प्रकार की शिकायत होती है तो संबंधित का पटल बदला जाता है। अन्यथा जिस लिपिक की कोई शिकायत नहीं है वह चार से पांच साल से एक ही पटल पर जमा है। दूसरा मामला यह है कि कुछ लिपिकों को तीन-तीन महत्वपूर्ण विभाग दिए हुए हैं। जबकि कुछ लिपिक जिम्मेदारी मिलने के इंतजार में हैं।
- तीन साल में पटल बदलने का आदेश है, लेकिन लिपिकों को उनकी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी दी जाती है। कुछ लिपिक ऐसे होते हैं, जो दो से तीन विभागों को अच्छे से संभाल लेते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं, जो एक जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभा पाते हैं। इसी वजह से कुछ मामलों में पटल परिवर्तन करना मुश्किल रहता है, क्योंकि मुख्य उद्देश्य काम को आगे बढ़ाना होता है। - एसके तिवारी, प्रभारी अधिकारी कार्मिक/अपर नगरायुक्त।
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- लिपिकों के पटल बदलने का विचार शुरू में ही मेरे मन में आया था, लेकिन वह जल्दबाजी होती। मेरा मानना है कि पहले लिपिकों की काबिलियत देख ली जाए कि कौन किस काबिल है। अब हमने सबको समझ और देख लिया है। जल्द ही उनकी क्षमता के अनुसार पटल परिवर्तन किया जाएगा, किसी भी लिपिक को एक ही पटल पर ज्यादा दिन नहीं देने दिया जा सकता। शासन की भी यही मंशा है। -डॉ. अजय कुमार, महापौर।
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- लिपिकों को कार्य देने में भी झोल, किसी पर तीन-तीन विभाग, कोई खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर में तीन साल में लिपिकों के पटल बदलने के शासन के आदेश बेमाने साबित हो रहे हैं। यहां जब तक किसी लिपिक पर गंभीर आरोप या गड़बड़ी की शिकायत न हो तब तक उसका पटल नहीं बदलता है। यही वजह है कि कई लिपिक चार और पांच साल से एक ही पटल पर जमे हैं। इसके अलावा कई लिपिकों पर दो से तीन विभागों की अहम जिम्मेदारियां हैं, जबकि कुछ लिपिक टाइम पास कर रहे हैं। यानी उन्हें निचले अधिकारियों का स्टेनो आदि बनाकर रखा हुआ है।
नगर निगम में करीब दो दर्जन लिपिक हैं। शासन के आदेश हैं कि जिस लिपिक को किसी पटल पर तीन साल से अधिक हो जाएं तो उसका पटल परिवर्तन कर दिया जाए, लेकिन शासन के ये आदेश नगर निगम सहारनपुर में पूरी तरह लागू नहीं हो रहे हैं। यहां करीब आठ साल से शासन के आदेशों के अनुरूप लिपिकों के पटल नहीं बदले जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इन आठ साल में पटल नहीं बदले गए हैं। यदि किसी लिपिक द्वारा गड़बड़ी करने या फिर अन्य किसी प्रकार की शिकायत होती है तो संबंधित का पटल बदला जाता है। अन्यथा जिस लिपिक की कोई शिकायत नहीं है वह चार से पांच साल से एक ही पटल पर जमा है। दूसरा मामला यह है कि कुछ लिपिकों को तीन-तीन महत्वपूर्ण विभाग दिए हुए हैं। जबकि कुछ लिपिक जिम्मेदारी मिलने के इंतजार में हैं।
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- तीन साल में पटल बदलने का आदेश है, लेकिन लिपिकों को उनकी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी दी जाती है। कुछ लिपिक ऐसे होते हैं, जो दो से तीन विभागों को अच्छे से संभाल लेते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं, जो एक जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभा पाते हैं। इसी वजह से कुछ मामलों में पटल परिवर्तन करना मुश्किल रहता है, क्योंकि मुख्य उद्देश्य काम को आगे बढ़ाना होता है। - एसके तिवारी, प्रभारी अधिकारी कार्मिक/अपर नगरायुक्त।
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- लिपिकों के पटल बदलने का विचार शुरू में ही मेरे मन में आया था, लेकिन वह जल्दबाजी होती। मेरा मानना है कि पहले लिपिकों की काबिलियत देख ली जाए कि कौन किस काबिल है। अब हमने सबको समझ और देख लिया है। जल्द ही उनकी क्षमता के अनुसार पटल परिवर्तन किया जाएगा, किसी भी लिपिक को एक ही पटल पर ज्यादा दिन नहीं देने दिया जा सकता। शासन की भी यही मंशा है। -डॉ. अजय कुमार, महापौर।