फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   The system's ambulance kept getting stuck, people kept sobbing inside

Saharanpur News: अटकती रही सिस्टम की एंबुलेंस, अंदर सिसकती रहीं सांसें

Tue, 14 Jan 2025 01:33 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Tue, 14 Jan 2025 01:33 PM IST
विज्ञापन
The system's ambulance kept getting stuck, people kept sobbing inside
मौत का इंतजार या लाचार सिस्टम : जिला अस्पताल में जिस समय पांचों को रेफर किया गया तो लखनऊ से आइड
सहारनपुर। जिंदगी के लिए छटपटा रहे तीन मासूम और दंपती के साथ जिला अस्पताल में जो हुआ वह मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर देने वाला था। पहले ट्रामा सेंटर के अंदर डॉक्टर सिर्फ प्राथमिक उपचार तक सीमित रहे। हद तो तब हो गई जब रेफर करने के लिए 108 एंबुलेंस में लिटा दिया गया और दोनों एंबुलेंस के ड्राइवरों को लखनऊ से आइडी ही नहीं मिली, जिस कारण 20 मिनट तक वहीं खड़े रहे और अंदर तीन मासूम और दंपती तड़पते रहे।
विज्ञापन

दरअसल, दोपहर करीब डेढ़ बजे पांचों पीड़ितों को जिला अस्पताल में लाया गया। वहां पर ट्रामा सेंटर में चार बेडों पर उन्हें लिटाया और प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया। पूरा परिवार तड़पता रहा, लेकिन उन्हें आईसीसीयू में भर्ती करना भी उचित नहीं समझा। वहां पर मौजूद डॉक्टर बार-बार कहते नजर आए कि रेफर करो। इसके बाद रेफर के लिए कागजी कार्रवाई शुरू हुई, जो करीब आधा घंटे तक चली। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दो 108 एंबुलेंस बुलवाई गई। एक एंबुलेंस में विकास और एक बेटी, जबकि दूसरी एंबुलेंस में रजनी और दोनों छोटे बच्चों को लिटा दिया गया।
विज्ञापन

ड्राइवरों ने बताया कि लखनऊ से आइडी मिलने के बाद ही चलेंगे। वह बार-बार लखनऊ फोन कर आइडी मांगते रहे। इस प्रक्रिया में करीब 20 मिनट लगे। 20 मिनट बाद बच्चों वाली एंबुलेंस चली गई। जिस एंबुलेंस में दंपती थे वह महज 10 मीटर दूर जाकर फिर खड़ी हो गई। बताया कि आइडी में कोई समस्या है। करीब पांच मिनट तक खड़ी रही और तब जाकर मेडिकल के लिए रवाना हुई। इस दौरान परिजन और वहां मौजूद हर व्यक्ति यह कहता नजर आया कि पांच जिंदगी का सवाल है, जल्दी लेकर जाओ।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह होती है आइडी
किसी एंबुलेंस को बाहर भेजने से पहले लखनऊ से आइडी पासवर्ड मिलता है। उसमें कॉलर की डिटेल होती है। आइडी में गाड़ी व मोबाइल नंबर दर्ज होता है। क्योंकि हर एंबुलेंस में जीपीएस सिस्टम लगा है। लखनऊ से हरी झंडी मिलने पर एंबुलेंस रवाना होती है।

सहमे रहे दूसरे मरीज, मची रही चीख-पुकार
ट्रामा सेंटर में पांचों की चीख-पुकार सुनकर दूसरे बेड पर भर्ती मरीज भी सहमे नजर आए। छजपुरा गांव की महिला सुमन भी वहां पर भर्ती थी। उसके पास वाले बेड पर एक तरफ विकास और दूसरी तरफ बेड पर विकास की पत्नी रजनी थी। दोनों बार-बार उल्टियां कर रहे थे। इसी तरह दूसरी तरफ बेड पर भर्ती एक मरीज पूरे सवा घंटे तक कंबल के अंदर मुंह ढककर लेटा रहा। किसी ने भी यह नहीं सोचा कि दूसरे मरीजों को एक तरफ कर दिया जाए। इतनी चीख-पुकार सुनककर उन पर क्या बीत रही होगी, वह भी तो मरीज ही थे।

यह भी पहुंचे
मामले का पता चलते ही सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार, एसीएमओ डॉ. कपिल देव, दो बाल रोग विशेषज्ञ, एसएसपी रोहित सिंह सजवाण और एसपी सिटी व्योम बिंदल भी मौके पर पहुंचे।
बार-बार पेट पर हाथ मारता रहा डेढ़ वर्षीय विवेक
ट्रामा सेंटर में करीब सवा घंटा ऐसा बीता कि कुछ देर के लिए विकास, रजनी, दोनों बेटी परी और पलक भी चुप हो गए, लेकिन सबसे छोटा डेढ़ वर्षीय मासूम विवेक तड़पता रहा। वह बार-बार पेट पर हाथ मार रहा था। मासूम को इस हालत में देखकर वहां पर मौजूद हर व्यक्ति यही कह रहा था कि आखिर इसका क्या कसूर था। विकास ने यह गलत किया। बच्चों की क्या गलती थी जो इन्हें इस हालत में पहुंचा दिया।


...हम तो मरने के लिए निकले थे, कर्ज के दबाव से तंग आ गया
जिला अस्पताल में भर्ती विकास की हालत सबसे ज्यादा खराब थी। जब उससे पूछा गया कि कहां जा रहे थे और ये सब क्यों किया तब उसने लड़खड़ाते शब्दों में कहा हम तो मरने के लिए निकले थे, जिंदा रहकर भी क्या करें। कर्ज के दबाव ने बर्बाद कर दिया है। बस बच्चों को बचा लो। रजनी का भी बार-बार कह रही थी कि मेरे बच्चों को बचा लो। जब पूछा गया कि जहर क्यों खाया तो बोली कि क्या करते, तंग आ चुके थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed