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लौटती छड़ियों के बसेरों की होती थी धूम
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गंगोह रोड स्थित म्हाड़ी पर चौधरन छड़ी के स्थल पर बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज को दूध का भोग लगान?
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार गंगोह रोड स्थित श्री जाहरवीर गोगा महाराज की म्हाड़ी पर तीन दिवसीय मेला नहीं लगा। द्वादशी पर तीसरे सभी 26 छड़ियां म्हाड़ी से लौटती थी और रात में बड़ी संख्या में छड़ियों के बसेरे होते थे, लेकिन इस बार कोरोना काल की वजह से बसेरे आयोजित नहीं हो सके।
हर वर्ष गंगोह रोड स्थित बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज की म्हाड़ी पर शुक्ल पक्ष की दशमी पर मेला लगता था। इस बार शुक्ल पक्ष की दशमी 28 अगस्त की थी। इस दिन शहर में अलग-अलग स्थानों से ढोल और बैंडबाजों के साथ नेजे की अगुवाई में सभी 26 छड़ियां म्हाड़ी पर पहुंचती थी। तब, तीन दिवसीय मेला शुरू होता था, जिसमें पांच लाख से अधिक श्रद्धालु निशान चढ़ाने पहुंचते थे। तीसरे दिन द्वादशी पर सभी छड़ियां लौट आती थीं और रात में श्रद्धालु अपने घरों में लौटती छड़ियों के बसेरे कराते थे। रविवार को द्वादशी थी। मगर, इस बार कोरोना की वजह से लौटती छड़ियों के बसेरे नहीं हो सके।
पुरानी चुंगी स्थित बिंद्रा प्रेमवाली छड़ी के भक्त पंकज उपाध्याय, सरदार छड़ी के भक्त विनोद प्रकाश, चौधरन छड़ी के भक्त गुलशन सागर, ताराचंद सैनी, अनिल सैनी ने बताया कि लौटती छड़ियों के बसेरे नहीं हो पाए। क्योंकि, छड़ियों के भ्रमण की अनुमति नहीं है। म्हाड़ी पर भी छड़ियां नहीं जा सकी हैं। रविवार को द्वादशी पर म्हाड़ी पर सिर्फ भक्तों ने पूजन किया। इसी पूर्व शनिवार की शाम पूजन हुआ और रात 12 बजे बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज को दूध का भोग लगाया गया। म्हाड़ी पर मेला न लगने की वजह से श्रद्धालुुओं ने छड़ियों के स्थानों पर पहुंचकर प्रसाद चढ़ाया। मोहल्ला गणपत सराय स्थित नेजे और सरदार छड़ी के स्थान पर पहुंचकर पूजा कर श्रद्धालुओं ने प्रसाद बांटा। इसी तरह समस्त छड़ियों के स्थानों पर तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। अभी दो दिन तक छड़ियों की पूजा अर्चना होगी और श्राद्ध से एक दिन पहले डोरियां खोलकर विधिवत पूजन कर छड़ियों को विश्राम दिया जाएगा।
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हर वर्ष गंगोह रोड स्थित बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज की म्हाड़ी पर शुक्ल पक्ष की दशमी पर मेला लगता था। इस बार शुक्ल पक्ष की दशमी 28 अगस्त की थी। इस दिन शहर में अलग-अलग स्थानों से ढोल और बैंडबाजों के साथ नेजे की अगुवाई में सभी 26 छड़ियां म्हाड़ी पर पहुंचती थी। तब, तीन दिवसीय मेला शुरू होता था, जिसमें पांच लाख से अधिक श्रद्धालु निशान चढ़ाने पहुंचते थे। तीसरे दिन द्वादशी पर सभी छड़ियां लौट आती थीं और रात में श्रद्धालु अपने घरों में लौटती छड़ियों के बसेरे कराते थे। रविवार को द्वादशी थी। मगर, इस बार कोरोना की वजह से लौटती छड़ियों के बसेरे नहीं हो सके।
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पुरानी चुंगी स्थित बिंद्रा प्रेमवाली छड़ी के भक्त पंकज उपाध्याय, सरदार छड़ी के भक्त विनोद प्रकाश, चौधरन छड़ी के भक्त गुलशन सागर, ताराचंद सैनी, अनिल सैनी ने बताया कि लौटती छड़ियों के बसेरे नहीं हो पाए। क्योंकि, छड़ियों के भ्रमण की अनुमति नहीं है। म्हाड़ी पर भी छड़ियां नहीं जा सकी हैं। रविवार को द्वादशी पर म्हाड़ी पर सिर्फ भक्तों ने पूजन किया। इसी पूर्व शनिवार की शाम पूजन हुआ और रात 12 बजे बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज को दूध का भोग लगाया गया। म्हाड़ी पर मेला न लगने की वजह से श्रद्धालुुओं ने छड़ियों के स्थानों पर पहुंचकर प्रसाद चढ़ाया। मोहल्ला गणपत सराय स्थित नेजे और सरदार छड़ी के स्थान पर पहुंचकर पूजा कर श्रद्धालुओं ने प्रसाद बांटा। इसी तरह समस्त छड़ियों के स्थानों पर तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। अभी दो दिन तक छड़ियों की पूजा अर्चना होगी और श्राद्ध से एक दिन पहले डोरियां खोलकर विधिवत पूजन कर छड़ियों को विश्राम दिया जाएगा।

मोहल्ला गणपत सराय में अपने स्थान पर खड़े नेजा जी और सरदार छड़ी।- फोटो : SAHARANPUR
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