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खारा परियोजना की शक्ति नहर की साइफन के किनारे से हटाई जाएगी सिस्ट
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खारा जल विद्युत परियोजना
- फोटो : SAHARANPUR
बेहट (सहारनपुर)। चार राज्यों की सीमा पर स्थित महत्वपूर्ण खारा जल विद्युत परियोजना की शक्ति नहर की लोई साइफन की सफाई के नाम पर की जा रही औपचारिकता की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद सिंचाई विभाग की नींद टूटी गई है। विभागीय अधिकारियों ने संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर साइफन की सफाई कर किनारे पर डाले सिल्ट को तत्काल हटाकर कार्य स्थल से दूर ले जाकर डालने और साइफन की पूरब दिशा में भी सफाई कार्य तीन दिन के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।
यूपी, हरियाणा हिमाचल एवं उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित 72 मेगावाट विद्युत उत्पादन करने वाली महत्वपूर्ण खारा जल विद्युत परियोजना की शक्ति नहर के नीचे से सुरंग (लोई साइफन) के जरिये बरसात में पहाड़ियों से आने वाला मलबा पानी के साथ बहकर यमुना नदी में चला जाता है। इससे नहर सुरक्षित रहती है। हर साल बरसात में यह साइफन बजरी, रेत व मिट्टी के मलबे (सिल्ट) से अट जाती है। इसकी सफाई के लिए बरसात से पहले लाखों रुपये का बजट शासन से स्वीकृत होता है। इस बार भी शक्ति नहर की सुरक्षा के मद्देनजर साइफन की सफाई के लिए शासन से 24 लाख रुपये का बजट विभाग को जारी किया, लेकिन सफाई कार्य के नाम पर औपचारिकता पूरी की। साइफन के एक छोर की सफाई कर सिल्ट को किनारे पर डाला, जबकि दूसरे छोर (पूरब दिशा) की सफाई अभी तक की ही नहीं और इस छोर पर सुरंग अटी है। किनारे पर डाली सिल्ट बरसात में बहकर फिर से साइफन में जम जाएगी, जबकि नियम यह है, कि साइफन की सफाई कर सिल्ट दूर ले जाकर डालना होता है।
महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजना की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की खबर अमर उजाला द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों की नींद टूटी। अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार के निर्देश पर संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया। एक्सईएन शिवराज सिंह ने बताया ठेकेदार को नोटिस जारी कर किनारे पर डाली सिल्ट को कार्यस्थल से दूर ले जाकर डालने और साइफन के दूसरे छोर की सफाई का कार्य तीन दिन में पूरा कराने के लिए कहा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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खारा जल विद्युत परियोजना पर 72 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता है। इस परियोजना पर विद्युत उत्पादन के लिए हिमाचल प्रदेश के कुल्हाल से परियोजना तक शिवालिक पहाड़ियों के बीच से वर्ष 1978 शक्ति नहर निकाली। इस नहर की सुरक्षा के लिए धौल तप्पड़ के पास नहर के नीचे से 124 मीटर लंबी, चार मीटर चौड़ी और 2.80 मीटर ऊंचाई की सुरंग निकाली। यह सुरंग यमुना नदी तक जाती है। इस सुरंग से बरसात में पहाड़ियों का मलबा पानी में बहकर यमुना नदी में चला जाता है। यदि सुरंग नहीं होती तो पहाड़ियों का मलबा सीधे शक्ति नहर में गिरता। नहर को सुरक्षित रखने के लिए इस सुरंग (साइफन) का निर्माण किया।
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यूपी, हरियाणा हिमाचल एवं उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित 72 मेगावाट विद्युत उत्पादन करने वाली महत्वपूर्ण खारा जल विद्युत परियोजना की शक्ति नहर के नीचे से सुरंग (लोई साइफन) के जरिये बरसात में पहाड़ियों से आने वाला मलबा पानी के साथ बहकर यमुना नदी में चला जाता है। इससे नहर सुरक्षित रहती है। हर साल बरसात में यह साइफन बजरी, रेत व मिट्टी के मलबे (सिल्ट) से अट जाती है। इसकी सफाई के लिए बरसात से पहले लाखों रुपये का बजट शासन से स्वीकृत होता है। इस बार भी शक्ति नहर की सुरक्षा के मद्देनजर साइफन की सफाई के लिए शासन से 24 लाख रुपये का बजट विभाग को जारी किया, लेकिन सफाई कार्य के नाम पर औपचारिकता पूरी की। साइफन के एक छोर की सफाई कर सिल्ट को किनारे पर डाला, जबकि दूसरे छोर (पूरब दिशा) की सफाई अभी तक की ही नहीं और इस छोर पर सुरंग अटी है। किनारे पर डाली सिल्ट बरसात में बहकर फिर से साइफन में जम जाएगी, जबकि नियम यह है, कि साइफन की सफाई कर सिल्ट दूर ले जाकर डालना होता है।
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महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजना की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की खबर अमर उजाला द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों की नींद टूटी। अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार के निर्देश पर संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया। एक्सईएन शिवराज सिंह ने बताया ठेकेदार को नोटिस जारी कर किनारे पर डाली सिल्ट को कार्यस्थल से दूर ले जाकर डालने और साइफन के दूसरे छोर की सफाई का कार्य तीन दिन में पूरा कराने के लिए कहा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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खारा जल विद्युत परियोजना पर 72 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता है। इस परियोजना पर विद्युत उत्पादन के लिए हिमाचल प्रदेश के कुल्हाल से परियोजना तक शिवालिक पहाड़ियों के बीच से वर्ष 1978 शक्ति नहर निकाली। इस नहर की सुरक्षा के लिए धौल तप्पड़ के पास नहर के नीचे से 124 मीटर लंबी, चार मीटर चौड़ी और 2.80 मीटर ऊंचाई की सुरंग निकाली। यह सुरंग यमुना नदी तक जाती है। इस सुरंग से बरसात में पहाड़ियों का मलबा पानी में बहकर यमुना नदी में चला जाता है। यदि सुरंग नहीं होती तो पहाड़ियों का मलबा सीधे शक्ति नहर में गिरता। नहर को सुरक्षित रखने के लिए इस सुरंग (साइफन) का निर्माण किया।