{"_id":"66f1d5f834cd0874c40694b4","slug":"the-path-to-salvation-is-not-easy-crematoriums-are-running-on-debt-saharanpur-news-c-30-1-sha1002-132128-2024-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: मोक्ष की राह नहीं आसान, उधारी में चल रहे श्मशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: मोक्ष की राह नहीं आसान, उधारी में चल रहे श्मशान
Tue, 24 Sep 2024 02:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 24 Sep 2024 02:26 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। सरकारें आई और चली गई, गांव की चौधर भी बदलती रही, लेकिन नहीं बदले तो वह है गांवों के हालात। इससे विकट स्थिति क्या हो सकती है कि कई गांव ऐसे भी जहां अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट नहीं है। उन्हें दूसरे गांवों के श्मशान घाट में जाकर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। इसके अलावा कई गांवों के श्मशानों में छतरी तक नहीं है। बारिश के मौसम में लोगों को अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ता है। इसे लेकर जिले में पड़ताल की तो कुछ ऐसे ही स्थिति नजर आई।
इन गांवों में नहीं है श्मशान घाट
शाकंभरी के गांव समशपुर एवं रजापुर नौगांवा में श्मशान घाट नहीं है। ग्रामीण नदी किनारे ही अंतिम संस्कार करते हैं। बारिश या नदी में पानी आने पर पड़ोसी गांव हसनपुर गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। बिहारीगढ़ के गांव दामोदराबाद और तोता टांडा में श्मशान नहीं है। रामदासपुर उर्फ नागल के ग्रामीणों को गांव बढे़डी कोली के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने जाना पड़ता है। पुवांरका क्षेत्र के गांव सलेमपुर गाड़ा के ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए पास के गांव जमालपुर जाते हैं। बेहट के गांव हीराहेड़ी में ग्रामीण नदी किनारे शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। रामपुर मनिहारान के गांव अमोली में ग्रामीणों को गांव टिपरा के श्मशान घाट में जाना पड़ता है।
यहां पर नहीं है छत, बारिश में होती है परेशानी
नानौता के भारी दीनदानपुर और लंढौरा में श्मशान घाट में छतरी नहीं है। बारिश में अंतिम संस्कार करने में काफी दिक्कत आती है। गागलहेड़ी में श्मशान घाट हिंडन नदी के दूसरी ओर बनाया गया है। बरसात के दिनों में नदी का पानी आने के कारण शव का अंतिम संस्कार करना बहुत मुश्किल होता है। अंबेहटा के गांव शंभूगढ़, गांव लखनौती खुर्द, गांव गोकलपुर, नकुड़ के गांव गोकलपुर, चिलकाना के गांव नथमलपुर, बरथाकायस्थ तथा रावणपुर खुर्द के श्मशान घाटों में छतरी नहीं है।
विज्ञापन
सभी ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत सक्षम है। उन्हें इसका निर्माण कराना चाहिए। ऐसी ग्राम पंचायतों का चिन्हित किया जाएगा। यदि जिला स्तर से कोई योजना आती है तो इसके तहत निर्माण कराया जाएगा।
- मनीष बंसल, जिलाधिकारी
तिरपाल में करनी पड़ी अंतिम संस्कार की क्रिया
देवबंद क्षेत्र के कुरलकी गांव में श्मशान घाट नहीं है। 13 अगस्त को गांव में शरबती धीमान (70) की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। भारी बारिश के बीच परिजनों ने तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार की क्रिया की। जिसकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
विज्ञापन
इन गांवों में नहीं है श्मशान घाट
शाकंभरी के गांव समशपुर एवं रजापुर नौगांवा में श्मशान घाट नहीं है। ग्रामीण नदी किनारे ही अंतिम संस्कार करते हैं। बारिश या नदी में पानी आने पर पड़ोसी गांव हसनपुर गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। बिहारीगढ़ के गांव दामोदराबाद और तोता टांडा में श्मशान नहीं है। रामदासपुर उर्फ नागल के ग्रामीणों को गांव बढे़डी कोली के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने जाना पड़ता है। पुवांरका क्षेत्र के गांव सलेमपुर गाड़ा के ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए पास के गांव जमालपुर जाते हैं। बेहट के गांव हीराहेड़ी में ग्रामीण नदी किनारे शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। रामपुर मनिहारान के गांव अमोली में ग्रामीणों को गांव टिपरा के श्मशान घाट में जाना पड़ता है।
विज्ञापन
यहां पर नहीं है छत, बारिश में होती है परेशानी
नानौता के भारी दीनदानपुर और लंढौरा में श्मशान घाट में छतरी नहीं है। बारिश में अंतिम संस्कार करने में काफी दिक्कत आती है। गागलहेड़ी में श्मशान घाट हिंडन नदी के दूसरी ओर बनाया गया है। बरसात के दिनों में नदी का पानी आने के कारण शव का अंतिम संस्कार करना बहुत मुश्किल होता है। अंबेहटा के गांव शंभूगढ़, गांव लखनौती खुर्द, गांव गोकलपुर, नकुड़ के गांव गोकलपुर, चिलकाना के गांव नथमलपुर, बरथाकायस्थ तथा रावणपुर खुर्द के श्मशान घाटों में छतरी नहीं है।
विज्ञापन
सभी ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत सक्षम है। उन्हें इसका निर्माण कराना चाहिए। ऐसी ग्राम पंचायतों का चिन्हित किया जाएगा। यदि जिला स्तर से कोई योजना आती है तो इसके तहत निर्माण कराया जाएगा।
- मनीष बंसल, जिलाधिकारी
तिरपाल में करनी पड़ी अंतिम संस्कार की क्रिया
देवबंद क्षेत्र के कुरलकी गांव में श्मशान घाट नहीं है। 13 अगस्त को गांव में शरबती धीमान (70) की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। भारी बारिश के बीच परिजनों ने तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार की क्रिया की। जिसकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।