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Saharanpur News: हस्ताक्षर के साथ अधिकारी का मोबाइल नंबर भी होगा अंकित
Thu, 15 May 2025 01:04 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 15 May 2025 01:04 AM IST
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सहारनपुर। फर्जी हस्ताक्षर का मामला सुर्खियों में आने के बाद नगर निगम सतर्क हो गया है। नगर आयुक्त कार्यालय ने सभी अनुभागों के लिए निर्देश जारी किए हैं, जो भी पत्रावली नगर आयुक्त के सामने हस्ताक्षर के लिए आएगी। उस पर पहले पटल सहायक, संबंधित अधिकारियों, प्रभारी अधिकारी का नाम, पदनाम, हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर अंकित होगा, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका को कम किया जा सके।
नगर आयुक्त शिपू गिरि के कार्यालय से नगर निगम के सभी विभागों को एक सर्कुलर जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि नगर निगम के सभी अनुभागों द्वारा विभागीय स्वीकृति, अनुमोदन आदि प्रस्तुत करने से पहले सभी पत्रावलियों पर प्रकरण का विषय, प्रकरण में लिए गए निर्णय और पेज संख्या होनी चाहिए। जिन भी पेज पर हस्ताक्षर अंकित किए गए हैं। उन पर पटल सहायक, संबंधित अधिकारी, विभाग अध्यक्ष और प्रभारी अधिकारी के पूरे हस्ताक्षर, उसका नाम, पदनाम, मोबाइल नंबर की मुहर अनिवार्य रूप से लगी होनी चाहिए। उसके बाद ही फाइल नगर आयुक्त के सामने प्रस्तुत की जाए। नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
मालूम हो कि नगर निगम के गृहकर एवं जलकर अनुभाग के एक लिपिक द्वारा नामांतरण पत्रावली पर उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर करने का मामला सामने आया था, जिसमें निलंबन की कार्रवाई भी की गई थी। मामला अभी तक नगर निगम के गले की हड्डी बना हुआ है। इसमें अभी तक जांच चल रही हैं। नगर आयुक्त ने सप्ताहभर पहले खुद अधिकारियों और लिपिक से घंटाघर पूछताछ की थी।
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नगर आयुक्त शिपू गिरि के कार्यालय से नगर निगम के सभी विभागों को एक सर्कुलर जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि नगर निगम के सभी अनुभागों द्वारा विभागीय स्वीकृति, अनुमोदन आदि प्रस्तुत करने से पहले सभी पत्रावलियों पर प्रकरण का विषय, प्रकरण में लिए गए निर्णय और पेज संख्या होनी चाहिए। जिन भी पेज पर हस्ताक्षर अंकित किए गए हैं। उन पर पटल सहायक, संबंधित अधिकारी, विभाग अध्यक्ष और प्रभारी अधिकारी के पूरे हस्ताक्षर, उसका नाम, पदनाम, मोबाइल नंबर की मुहर अनिवार्य रूप से लगी होनी चाहिए। उसके बाद ही फाइल नगर आयुक्त के सामने प्रस्तुत की जाए। नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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मालूम हो कि नगर निगम के गृहकर एवं जलकर अनुभाग के एक लिपिक द्वारा नामांतरण पत्रावली पर उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर करने का मामला सामने आया था, जिसमें निलंबन की कार्रवाई भी की गई थी। मामला अभी तक नगर निगम के गले की हड्डी बना हुआ है। इसमें अभी तक जांच चल रही हैं। नगर आयुक्त ने सप्ताहभर पहले खुद अधिकारियों और लिपिक से घंटाघर पूछताछ की थी।
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