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Saharanpur News: तीन फरवरी को होना था निकाह, 20 जनवरी को हो गया एनकाउंटर
Thu, 23 Jan 2025 12:16 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 23 Jan 2025 12:16 AM IST
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सहारनपुर के बाढ़ी माजरा में गमजदा बैठे अरशद के बड़े भाई राशिद वअन्य
गंगोह/सहारनपुर। मेरठ एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में ढेर हुए एक लाख के इनामी बदमाश अरशद का शव पोस्टमार्टम के बाद बुधवार सुबह बाढ़ी माजरा गांव में पहुंचा। बेटे का शव घर पहुंचते ही उसकी मां हुसैना लिपटकर रोने लगी। इसके बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अरशद की मौत को लेकर परिजनों का कहना है कि वह तो नई जिंदगी शुरू करना चाहता था। तीन फरवरी को देहरादून में उसका निकाह भी होना था, लेकिन इससे पहले ही उसकी जिंदगी का अंत हो गया।
अरशद चार भाइयों में सबसे छोटा था। बड़े भाई राशिद ने बताया कि शुरुआत में वह गलत संगत में पड़ गया था। मुस्तफा उर्फ कग्गा के साथ मिलकर अपराध किया था, जिसकी उसने 14 साल तक सजा भी काटी थी। करीब छह माह पहले वह जेल से आया था। अब वह शांति का जीवन जीना चाहता था। वह हमेशा निकाह के लिए मना करता था, लेकिन कुछ समय पहले उसने सहमति जता दी थी कि वह निकाह के लिए तैयार है।
इसके बाद देहरादून में रिश्ता भी तय कर दिया था। तीन फरवरी को निकाह होना था। दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन क्या पता था कि यह सब हो जाएगा। राशिद ने बताया कि 20 जनवरी को शाम करीब पांच बजे अरशद से फोन पर बात हुई थी। अरशद ने बताया था कि वह पानीपत के राना माजरा गांव में बहन के यहां पर है।
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जेल से आने के बाद अक्सर वह बहन के यहां पर जाता रहता था। 21 जनवरी को सुबह पता चला कि वह मुठभेड़ में मारा गया। बता दें कि शामली में मुठभेड़ का पता चलते ही मंगलवार सुबह उसके तीनों भाई राशिद, साजिद और वाजिद शव लेने के लिए चले गए थे, जो बुधवार सुबह शव लेकर लौटे।
मुठभेड़ पर उठाए सवाल, बोले जाएंगे अदालत
अरशद के भाई राशिद ने मुठभेड़ पर भी सवाल उठाए। राशिद का कहना है कि यह मुठभेड़ फर्जी है। मुठभेड़ में पुलिस पैर में गोली मारती है, लेकिन अरशद के पैर में गोली नहीं मारी गई, उसे सीधे मौत के घाट उतार दिया। राशिद ने यह भी आरोप लगाए कि 2011 में शामली में डकैती के बाद अरशद ने कोई अपराध नहीं किया। पुलिस ने जेल में रहते हुए उस पर कई मामले दर्ज किए। मुठभेड़ को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
18 दिसंबर को हुआ था एक लाख का इनाम
बेहट स्थित फाइनेंस कंपनी में 29 नवंबर की रात डकैती हुई थी। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान इस मामले में अरशद का नाम सामने आया। इसके बाद 13 दिसंबर को गंगोह कोतवाली में हिस्ट्रीशीट खोली गई। पुलिस की तरफ से 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया। 18 दिसंबर को इनाम की राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई। पुलिस तभी से उनकी तलाश में जुटी हुई थी।
कग्गा ने युवाओं को धकेला अपराध की दलदल में
बाढ़ी माजरा गांव के अरशद समेत चार बदमाशों की मुठभेड़ के बाद ग्रामीणों का कहना है कि यह सब गांव के ही कुख्यात बदमाश मुस्तफा उर्फ कग्गा की देन है। कग्गा 2009 में सक्रिय हुआ था। इसके बाद उसने ताबड़तोड़ वारदात कर पुलिस को चुनौती दी। यहां तक कि कई पुलिसकर्मियों की हत्या भी की। ग्रामीणों का कहना है कि कग्गा ने गांव के कई युवाओं की जिंदगी बर्बाद की। उन्हें लालच देकर अपराध की दलदल में उतारा। अरशद भी उन्हीं युवाओं में से एक था। किताबें थामने की उम्र में उसने इन युवाओं के हाथों में तमंचे पकड़ाए और मोटे पैसे और नाम कमाने के सब्जबाग दिखाकर उन्हें अपने गिरोह में शामिल कर लिया। इनमें से इसरान और राशिद आज भी जेल में हैं, जबकि एक अन्य बदमाश असजद गैंगवार में मारा जा चुका है। हालांकि इनमें से कुछ ने समय रहते अपराध की दुनिया से तौबा कर मेहनत-मजदूरी शुरू कर दी।
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अरशद चार भाइयों में सबसे छोटा था। बड़े भाई राशिद ने बताया कि शुरुआत में वह गलत संगत में पड़ गया था। मुस्तफा उर्फ कग्गा के साथ मिलकर अपराध किया था, जिसकी उसने 14 साल तक सजा भी काटी थी। करीब छह माह पहले वह जेल से आया था। अब वह शांति का जीवन जीना चाहता था। वह हमेशा निकाह के लिए मना करता था, लेकिन कुछ समय पहले उसने सहमति जता दी थी कि वह निकाह के लिए तैयार है।
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इसके बाद देहरादून में रिश्ता भी तय कर दिया था। तीन फरवरी को निकाह होना था। दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन क्या पता था कि यह सब हो जाएगा। राशिद ने बताया कि 20 जनवरी को शाम करीब पांच बजे अरशद से फोन पर बात हुई थी। अरशद ने बताया था कि वह पानीपत के राना माजरा गांव में बहन के यहां पर है।
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जेल से आने के बाद अक्सर वह बहन के यहां पर जाता रहता था। 21 जनवरी को सुबह पता चला कि वह मुठभेड़ में मारा गया। बता दें कि शामली में मुठभेड़ का पता चलते ही मंगलवार सुबह उसके तीनों भाई राशिद, साजिद और वाजिद शव लेने के लिए चले गए थे, जो बुधवार सुबह शव लेकर लौटे।
मुठभेड़ पर उठाए सवाल, बोले जाएंगे अदालत
अरशद के भाई राशिद ने मुठभेड़ पर भी सवाल उठाए। राशिद का कहना है कि यह मुठभेड़ फर्जी है। मुठभेड़ में पुलिस पैर में गोली मारती है, लेकिन अरशद के पैर में गोली नहीं मारी गई, उसे सीधे मौत के घाट उतार दिया। राशिद ने यह भी आरोप लगाए कि 2011 में शामली में डकैती के बाद अरशद ने कोई अपराध नहीं किया। पुलिस ने जेल में रहते हुए उस पर कई मामले दर्ज किए। मुठभेड़ को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
18 दिसंबर को हुआ था एक लाख का इनाम
बेहट स्थित फाइनेंस कंपनी में 29 नवंबर की रात डकैती हुई थी। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान इस मामले में अरशद का नाम सामने आया। इसके बाद 13 दिसंबर को गंगोह कोतवाली में हिस्ट्रीशीट खोली गई। पुलिस की तरफ से 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया। 18 दिसंबर को इनाम की राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई। पुलिस तभी से उनकी तलाश में जुटी हुई थी।
कग्गा ने युवाओं को धकेला अपराध की दलदल में
बाढ़ी माजरा गांव के अरशद समेत चार बदमाशों की मुठभेड़ के बाद ग्रामीणों का कहना है कि यह सब गांव के ही कुख्यात बदमाश मुस्तफा उर्फ कग्गा की देन है। कग्गा 2009 में सक्रिय हुआ था। इसके बाद उसने ताबड़तोड़ वारदात कर पुलिस को चुनौती दी। यहां तक कि कई पुलिसकर्मियों की हत्या भी की। ग्रामीणों का कहना है कि कग्गा ने गांव के कई युवाओं की जिंदगी बर्बाद की। उन्हें लालच देकर अपराध की दलदल में उतारा। अरशद भी उन्हीं युवाओं में से एक था। किताबें थामने की उम्र में उसने इन युवाओं के हाथों में तमंचे पकड़ाए और मोटे पैसे और नाम कमाने के सब्जबाग दिखाकर उन्हें अपने गिरोह में शामिल कर लिया। इनमें से इसरान और राशिद आज भी जेल में हैं, जबकि एक अन्य बदमाश असजद गैंगवार में मारा जा चुका है। हालांकि इनमें से कुछ ने समय रहते अपराध की दुनिया से तौबा कर मेहनत-मजदूरी शुरू कर दी।