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Saharanpur News: जिन अधिकारियों पर आरोप उन्हीं को सौंप दी जांच
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- पीड़ितों ने दर्ज कराई आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सर्किट हाउस मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के लिए तोड़े गए अनुसूचित जाति के लोगों के मकानों के मामले में जिलाधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। पीड़ितों ने जांच कमेटी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में वाद प्रचलित है, उन्हीं को जांच अधिकारी कैसे बनाया जा सकता है। जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान को भेजे पत्र में पीड़ितों ने कहा कि जांच समिति में नगर आयुक्त, सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, सिटी मजिस्ट्रेट, अधिशासी अभियंता अपर खंड पूर्व नगर, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को शामिल गया है। कहा कि इन अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में वाद प्रचलित है।
उन्होंने बताया कि सभी को सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा अपना पक्ष रखने के लिए सभी जमीनी दस्तावेजों व साक्ष्यों सहित 18 मई को अपने कार्यालय में बुलाया गया है। उनकी मांग है कि सरकारी दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए। मामले की जांच तीसरा पक्ष करे, जिसमें समिति में शामिल अधिकारियों से उच्च अधिकारी शामिल हों। उन्होंने जिलाधिकारी से जांच कमेटी को निरस्त कर उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की समिति बनाने की मांग की है।
- यह था मामला
वीवीआईपी के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन सर्किट हाउस रोड का चौड़ीकरण करा रहा है। चूंकि सड़क के बीचो बीच रजबहा है। ऐसे में इसकी दोनों पटरियों का स्वामित्व सिंचाई विभाग के पास है। सिंचाई विभाग ने ही चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण पर निशान लगाए थे। अतिक्रमणकारियों को खुद अतिक्रमण हटा लेने के लिए चार अप्रैल तक का समय दिया गया था, लेकिन प्रशासन ने चार अप्रैल तक का इंतजार नहीं किया और एक अप्रैल में ही जेसीबी ले जाकर अतिक्रमण बताते हुए दर्जनों लोगों के मकान के हिस्से तोड़ दिए थे। इसके बाद पीड़ित हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने पीड़ितों के पुनर्वास के आदेश दिए थे। इसके बावजूद प्रशासन सड़क पर नाला निर्माण में लग गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सर्किट हाउस मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के लिए तोड़े गए अनुसूचित जाति के लोगों के मकानों के मामले में जिलाधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। पीड़ितों ने जांच कमेटी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में वाद प्रचलित है, उन्हीं को जांच अधिकारी कैसे बनाया जा सकता है। जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान को भेजे पत्र में पीड़ितों ने कहा कि जांच समिति में नगर आयुक्त, सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, सिटी मजिस्ट्रेट, अधिशासी अभियंता अपर खंड पूर्व नगर, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को शामिल गया है। कहा कि इन अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में वाद प्रचलित है।
उन्होंने बताया कि सभी को सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा अपना पक्ष रखने के लिए सभी जमीनी दस्तावेजों व साक्ष्यों सहित 18 मई को अपने कार्यालय में बुलाया गया है। उनकी मांग है कि सरकारी दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए। मामले की जांच तीसरा पक्ष करे, जिसमें समिति में शामिल अधिकारियों से उच्च अधिकारी शामिल हों। उन्होंने जिलाधिकारी से जांच कमेटी को निरस्त कर उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की समिति बनाने की मांग की है।
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- यह था मामला
वीवीआईपी के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन सर्किट हाउस रोड का चौड़ीकरण करा रहा है। चूंकि सड़क के बीचो बीच रजबहा है। ऐसे में इसकी दोनों पटरियों का स्वामित्व सिंचाई विभाग के पास है। सिंचाई विभाग ने ही चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण पर निशान लगाए थे। अतिक्रमणकारियों को खुद अतिक्रमण हटा लेने के लिए चार अप्रैल तक का समय दिया गया था, लेकिन प्रशासन ने चार अप्रैल तक का इंतजार नहीं किया और एक अप्रैल में ही जेसीबी ले जाकर अतिक्रमण बताते हुए दर्जनों लोगों के मकान के हिस्से तोड़ दिए थे। इसके बाद पीड़ित हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने पीड़ितों के पुनर्वास के आदेश दिए थे। इसके बावजूद प्रशासन सड़क पर नाला निर्माण में लग गया।
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