{"_id":"cc4e7d5dcf116c2354832a1d516409e3","slug":"the-identity-will-be-on-the-emphasis-of-education-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा के बल पर बनेगी पहचान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा के बल पर बनेगी पहचान
ब्यूरो/अमर उजाला, नानौता
Updated Mon, 07 Dec 2015 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के देश सूरीनाम में तैनात भारतीय मूल के राजदूत सतेंद्र कुमार सहगल का उनके पैतृक गांव जंबूगढ़ में पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपने बच्चोें को शिक्षित कर उच्च पदों पर पहुंचाने पर जोर दिया।
जंबूगढ़ गांव स्थित एक स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में आयोजित स्वागत समारोह में सतेंद्र कुमार सहगल का भव्य स्वागत किया गया। सतेंद्र कुमार सहगल अपनी पत्नी संतोष देवी व एक पुत्री सांत्वना के साथ अपने पैतृक गांव में आए हुए है। स्वागत समारोह में राजदूत सतेंद्र कुमार सहगल ने कहा कि उनका उद्देश्य अपने पैतृक गांव व नानौता क्षेत्र की प्रतिभाओं को खेल व उच्च शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलानी है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में जल्द ही रिटायरमेंट के बाद वह अपना बाकी जीवन अपने गांव व क्षेत्र के बच्चों को समर्पित कर एक स्पोर्ट्स कॉलेज खुलवाकर क्षेत्र की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में काम करेंगे।
विज्ञापन
समारोह की अध्यक्षता जंबूगढ़ स्थित आश्रम के महंत ऋषिदास जी महाराज व संचालन जगपाल सिंह ने किया।
स्वागत समारोह में राजदूत की पत्नी संतोष देवी, पुत्री सांत्वना सहगल, भाई संजय सहगल, मेहर सहगल, व्यापारी नेता विवेक नामदेव, प्रधानाचार्य राजपाल सिंह, थानाध्यक्ष पवन कुमार शर्मा, यशवंत राणा, नरेंद्र कुमार जंधेडी, राकेश पुंडीर, ओमकुमार राणा, ओम सिंह, गुलशन गर्ग, प्रधान सुखराम सिंह, जितेंद्र कुमार, डॉ. सतपाल सिंह आदि की मौजूदगी रही।
दो शिक्षक भी रहे सहगल
मूल रूप से नानौता क्षेत्र के ग्राम जंबूगढ़ के रहने वाले सतेंद्र कुमार सहगल का जन्म 1958 में हुआ था। वे दो वर्ष तक शिक्षक के पद पर भी रहे। राजदूत के रूप में सबसे पहली तैनाती वर्ष 1986 दिसंबर में पाकिस्तान के कराची में हुई थी। इसके बाद सतेंद्र कुमार सहगल दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी, कोलंबो, आइसलैंड, हॉलैंड, जंजानिया सहित अनेक देशों में राजदूत के पद पर रहे चुके हैं।
विज्ञापन
जंबूगढ़ गांव स्थित एक स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में आयोजित स्वागत समारोह में सतेंद्र कुमार सहगल का भव्य स्वागत किया गया। सतेंद्र कुमार सहगल अपनी पत्नी संतोष देवी व एक पुत्री सांत्वना के साथ अपने पैतृक गांव में आए हुए है। स्वागत समारोह में राजदूत सतेंद्र कुमार सहगल ने कहा कि उनका उद्देश्य अपने पैतृक गांव व नानौता क्षेत्र की प्रतिभाओं को खेल व उच्च शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलानी है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि भविष्य में जल्द ही रिटायरमेंट के बाद वह अपना बाकी जीवन अपने गांव व क्षेत्र के बच्चों को समर्पित कर एक स्पोर्ट्स कॉलेज खुलवाकर क्षेत्र की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में काम करेंगे।
विज्ञापन
समारोह की अध्यक्षता जंबूगढ़ स्थित आश्रम के महंत ऋषिदास जी महाराज व संचालन जगपाल सिंह ने किया।
स्वागत समारोह में राजदूत की पत्नी संतोष देवी, पुत्री सांत्वना सहगल, भाई संजय सहगल, मेहर सहगल, व्यापारी नेता विवेक नामदेव, प्रधानाचार्य राजपाल सिंह, थानाध्यक्ष पवन कुमार शर्मा, यशवंत राणा, नरेंद्र कुमार जंधेडी, राकेश पुंडीर, ओमकुमार राणा, ओम सिंह, गुलशन गर्ग, प्रधान सुखराम सिंह, जितेंद्र कुमार, डॉ. सतपाल सिंह आदि की मौजूदगी रही।
दो शिक्षक भी रहे सहगल
मूल रूप से नानौता क्षेत्र के ग्राम जंबूगढ़ के रहने वाले सतेंद्र कुमार सहगल का जन्म 1958 में हुआ था। वे दो वर्ष तक शिक्षक के पद पर भी रहे। राजदूत के रूप में सबसे पहली तैनाती वर्ष 1986 दिसंबर में पाकिस्तान के कराची में हुई थी। इसके बाद सतेंद्र कुमार सहगल दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी, कोलंबो, आइसलैंड, हॉलैंड, जंजानिया सहित अनेक देशों में राजदूत के पद पर रहे चुके हैं।