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बुखार का कहर, हर दिन दम तोड़ रही जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 01 May 2017 12:01 AM IST
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जिला अस्पताल में भर्ती बुखार के मरीज।
- फोटो : amar ujala
सहारनपुर में बुखार ने एक बार फिर जिले के खादर क्षेत्र में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। अभी तक गंगोह के कुंडाकलां क्षेत्र में ही आधा दर्जन मौतें हो चुकी है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को मानने से इंकार कर रहा है। बुखार के इस कहर को थामने की बजाय स्वास्थ्य विभाग महज कागजी खानापूर्ति में जुटा हुआ है।
बता दें कि खादर क्षेत्र का सर्वाधिक जनसंख्या वाला गांव कुंडा कलां तीन वर्ष पूर्व बुखार से हुई सैकड़ों मौतों के चलते अचानक सुर्खियों में आ गया था। इसकी गूंज लखनऊ से दिल्ली तक पहुंची थी।
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शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ ही नेताओं ने गांव के दौरे किए थे। बीमारी की सबसे बड़ी वजह दूषित पेयजल और गंदगी को माना गया है। उस समय शुद्ध पेयजल आपूर्ति हेतु पानी की टंकी और पीएचसी स्वीकृत की थी।
ग्रामीणों को उक्त टंकी से शुद्ध पेयजल तो मिल रहा है। मगर सफाई व्यवस्था अब भी ज्यों की त्यों है। बुखार के इस प्रकोप ने क्षेत्र के गांव कुंडाखुर्द, नयाकुंडा, कुंडाबसी, दौलतपुर, लखनौती, हलवाना, धानवा आदि यमुना खादर के गांवों में तेजी से पैर पसार लिया है।
साढ़ौली कदीम, सरसावा, नकुड़, देवबंद आदि क्षेत्रों में भी यह बुखार तेजी से पैर पसार रहा है। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में हर दिन बड़ी संख्या में बुखार से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं।
कुंडा कलां के समीप गांव ढलावली में बनाई गई पीएचसी रामभरोसे चल रही है। इस पीएचसी पर किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं अभी तक गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव तक नहीं कराया गया है।
इसका खामियाजा ग्रामीणों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है। प्रतिवर्ष बुखार से अनेक मासूमों और ग्रामीणों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कराई गई जांच में अभी तक गंगोह के कुंडा कलां क्षेत्र में टीबी का प्रकोप पाया गया है। विभाग की ओर से रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। - डाॅ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।
क्षेत्र में बुखार का प्रकोप बढ़ा है। इस पर रोकथाम के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इस संदर्भ में जल्द ही शासन स्तर पर भी बातचीत कर बीमारी पर पूर्णतया अंकुश लगवाया जाएगा। - प्रदीप चौधरी, गंगोह विधायक।
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हालांकि स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को मानने से इंकार कर रहा है। बुखार के इस कहर को थामने की बजाय स्वास्थ्य विभाग महज कागजी खानापूर्ति में जुटा हुआ है।
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बता दें कि खादर क्षेत्र का सर्वाधिक जनसंख्या वाला गांव कुंडा कलां तीन वर्ष पूर्व बुखार से हुई सैकड़ों मौतों के चलते अचानक सुर्खियों में आ गया था। इसकी गूंज लखनऊ से दिल्ली तक पहुंची थी।
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शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ ही नेताओं ने गांव के दौरे किए थे। बीमारी की सबसे बड़ी वजह दूषित पेयजल और गंदगी को माना गया है। उस समय शुद्ध पेयजल आपूर्ति हेतु पानी की टंकी और पीएचसी स्वीकृत की थी।
ग्रामीणों को उक्त टंकी से शुद्ध पेयजल तो मिल रहा है। मगर सफाई व्यवस्था अब भी ज्यों की त्यों है। बुखार के इस प्रकोप ने क्षेत्र के गांव कुंडाखुर्द, नयाकुंडा, कुंडाबसी, दौलतपुर, लखनौती, हलवाना, धानवा आदि यमुना खादर के गांवों में तेजी से पैर पसार लिया है।
साढ़ौली कदीम, सरसावा, नकुड़, देवबंद आदि क्षेत्रों में भी यह बुखार तेजी से पैर पसार रहा है। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में हर दिन बड़ी संख्या में बुखार से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं।
कुंडा कलां के समीप गांव ढलावली में बनाई गई पीएचसी रामभरोसे चल रही है। इस पीएचसी पर किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं अभी तक गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव तक नहीं कराया गया है।
इसका खामियाजा ग्रामीणों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है। प्रतिवर्ष बुखार से अनेक मासूमों और ग्रामीणों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कराई गई जांच में अभी तक गंगोह के कुंडा कलां क्षेत्र में टीबी का प्रकोप पाया गया है। विभाग की ओर से रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। - डाॅ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।
क्षेत्र में बुखार का प्रकोप बढ़ा है। इस पर रोकथाम के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इस संदर्भ में जल्द ही शासन स्तर पर भी बातचीत कर बीमारी पर पूर्णतया अंकुश लगवाया जाएगा। - प्रदीप चौधरी, गंगोह विधायक।