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वारदात की याद आते ही सिहर जाता है परिवार

Wed, 26 May 2021 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 26 May 2021 12:39 AM IST
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The family tremble as soon as they remember the incident
सहारनपुर। एक दिन बाद 27 मई को सहगल परिवार हत्याकांड की बरसी है। परिवार के पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी, जिससे सहारनपुर सिहर गया था और लखनऊ तक इसकी गूंज गई थी। बेशक इस वारदात को अंजाम देने वाले हत्यारों को आठ साल बाद अदालत ने उम्र कैद की सजा सुना दी, लेकिन 10 साल बाद भी इस परिवार के लोग वारदात को याद करते हैं तो गला रुंध जाता है और कुछ कहने की स्थिति नहीं बन पाती है।
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जिलाधिकारी आवास के निकट न्यू भगत सिंह कॉलोनी में 27 मई 2011 को परिवार के मुखिया रमेश सहगल (60) उनके बडे़ बेटे प्रदीप सहगल (40), बहू प्रीति सहगल (37), पुत्र प्रतीक सहगल (15) और प्रज्जवल सहगल (11) की लोहे की रॉड से पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी। पांचों के शव घर में पड़े मिले थे।
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इस परिवार में प्रदीप सहगल के भाई कमल सहगल बीएचईएल में नौकरी करते हैं, वह वारदात के कुछ समय बाद ही हरिद्वार जनपद में ही रहने लगे थे। कमल सहगल की बहन सीमा वर्मा शहर के नुमाइश कैंप में रहती हैं। उनके पति हरीश वर्मा से जब फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि ताउम्र उस वारदात को भूल पाना मुश्किल है, समय आगे बढ़ता जा रहा है, लेकिन वह घटना नहीं भूलती और ऐसा लगता है, जैसे कल ही यह सब हुआ हो।
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वहीं, प्रीति सहगल के भाई नितीश कपूर का भी यही कहना है कि याद करने पर आज भी वह मंजर आंखों में घूमने लगता है, जब घटना की सूचना पर हम घर पर पहुंचे थे और घर के अंदर पांच लाशें पड़ीं थीं।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर हुई थी सजा
पुलिस ने 10 जून 2011 को जनता रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास से फाती उर्फ फतेह ग्राम माजरा गागनौली थाना रमाला, नियाज उर्फ शेरा, मेहरबान उर्फ जोधन उर्फ ददिया उर्फ नौशाद और इरशाद निवासी हुसैनपुर गंगोह को गिरफ्तार किया था, जो गिरोह के सदस्य थे। मामले में 23 दिसंबर 2019 को अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश चंद भारती की अदालत ने चार हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और तीन लाख दस हजार का अर्थदंड भी लगाया था। खास बात यह है कि इस घटना का कोई चश्मदीद नहीं था, जिस कारण परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सजा हुई थी।
ऐसे अंजाम दी थी वारदात
कमल सहगल की तरफ से जनकपुरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। घटना के दिन पड़ोसी ने फोन पर कमल को सूचना दी थी कि उसके घर का दरवाजा अंदर से बंद है। बाद में पुलिस के साथ जब घर के दरवाजे को तोड़कर देखा गया तो रमेश सहगल, प्रदीप सहगल, प्रीति सहगल, प्रतीक सहगल और प्रज्जवल सहगल के खून से लथपथ शव पड़े थे। इन सभी की लोहे की रॉड से हमला करते हुए हत्या की गई थी। घर में खून और मांस के लोथड़े देखकर लोग सहम गए थे। गिरफ्तार होने पर हत्यारों ने पुलिस को बताया था कि वह घर में लूट करने गए थे और विरोध होने पर लोहे की रॉड से पीट पीटकर परिवार के पांचों सदस्यों की हत्या कर दी थी।
एसएसपी, सीओ और एसओ हुए थे निलंबित
इस हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने तत्कालीन सहारनपुर एसएसपी विनोद कुमार, सीओ मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष जनकपुरी ओमवीर सिंह सिरोही को निलंबित कर दिया था। वारदात के अगले ही दिन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी सहारनपुर पहुंचे थे।

पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो रही जगह
न्यू भगत सिंह कॉलोनी स्थित जिस कोठी में परिवार सहगल रहता था, आज वहां मकान के नाम पर कुछ नहीं है। वारदात के कुछ समय बाद परिवार के लोगों ने मकान को बेच दिया था। मकान खरीदने वाले ने भी इसमें रहना मुनासिब नहीं समझा, बाद में इस मकान को ध्वस्त करा दिया गया और अब उसे वाहन खड़े करने के लिए पार्किंग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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