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उत्खनन में सुराही और पांच भट्ठियां मिलीं
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:25 AM IST
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उत्खनन का मैप तैयार करते पुरातत्व विद।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में आखिरी पड़ाव में चल रहे उत्खनन के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को पांच भट्ठियों के अलावा छोटे आकर के पाट के टुकड़े मिले हैं, जो चीनी के बर्तन जैसे प्रतीत हो रहे हैं।
बृहस्पतिवार को उत्खनन के दौरान बड़े आकार की सुराही के टुकड़े भी मिले, जिस पर शानदार नक्कासी की गई है। उत्खनन के आखिरी पड़ाव में बृहस्पतिवार को पांच भट्ठियां मिल चुकी हैं।
इसके अलावा बड़े आकार की सुराही के टुकड़े जिस पर शानदार नक्कासी की गई है। छोटे पाट के टुकड़े, जो चीनी के बर्तन जैसे दिखते हैं। पुरातत्व विभाग के पुरातत्वविद अधीक्षण डा. भुवन विक्रम ने बताया कि गांव सकतपुर में चार हजार वर्ष पूर्व का इतिहास दफन है।
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जांच में सभी अवशेष चार हजार वर्ष पूर्व के पाए गए हैं जिस पर अभी शोध जारी है। उन्होंने बताया कि उत्खनन में प्राप्त बर्तनों पर जिस प्रकार से शानदार नक्कासी की गई है।
उससे पता चलता है कि उस समय की सभ्यता के लोग कला के शौकीन रहे होंगे। भट्ठियों का उपयोग धातु को पिघलाने व मिट्टी के बर्तनों को पकाने के लिए किया जाता रहा होगा।
मौके पर उत्खनन का कार्य देख रहे डा. अर्खित प्रधान ने बताया कि उत्खनन का कार्य का आज अंतिम दिन है। सभी अवशेषों को आगरा भेजा गया है, जहां उन पर शोध किया जाएगा।
आज आगरा से पहुंचे डा. लोचन सिंह, मोहित कुमार, छायाकार वासु अग्रवाल, भवानी, धर्मेंद्र कुमार, शोध छात्र हिमांशु कुमार ने सभी 17 ट्रैंचों के छाया चित्र, मौके के ग्राफ तैयार किए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अमर उजाला को उत्खनन की शानदार कवरेज के लिए विभाग द्वारा प्रशस्ति पत्र जारी किया जाएगा।
उत्खनन में आज तक मिले मिट्टी के बर्तनों के टुकडे़, तांबे की चूड़ियां, पशु आकृति, जानवर का जबड़ा, सिल बट्टे, खिलौना गाड़ियों के पहिए, दाल के बीज, कोयला आदि प्राप्त हो चुके हैं।
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बृहस्पतिवार को उत्खनन के दौरान बड़े आकार की सुराही के टुकड़े भी मिले, जिस पर शानदार नक्कासी की गई है। उत्खनन के आखिरी पड़ाव में बृहस्पतिवार को पांच भट्ठियां मिल चुकी हैं।
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इसके अलावा बड़े आकार की सुराही के टुकड़े जिस पर शानदार नक्कासी की गई है। छोटे पाट के टुकड़े, जो चीनी के बर्तन जैसे दिखते हैं। पुरातत्व विभाग के पुरातत्वविद अधीक्षण डा. भुवन विक्रम ने बताया कि गांव सकतपुर में चार हजार वर्ष पूर्व का इतिहास दफन है।
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जांच में सभी अवशेष चार हजार वर्ष पूर्व के पाए गए हैं जिस पर अभी शोध जारी है। उन्होंने बताया कि उत्खनन में प्राप्त बर्तनों पर जिस प्रकार से शानदार नक्कासी की गई है।
उससे पता चलता है कि उस समय की सभ्यता के लोग कला के शौकीन रहे होंगे। भट्ठियों का उपयोग धातु को पिघलाने व मिट्टी के बर्तनों को पकाने के लिए किया जाता रहा होगा।
मौके पर उत्खनन का कार्य देख रहे डा. अर्खित प्रधान ने बताया कि उत्खनन का कार्य का आज अंतिम दिन है। सभी अवशेषों को आगरा भेजा गया है, जहां उन पर शोध किया जाएगा।
आज आगरा से पहुंचे डा. लोचन सिंह, मोहित कुमार, छायाकार वासु अग्रवाल, भवानी, धर्मेंद्र कुमार, शोध छात्र हिमांशु कुमार ने सभी 17 ट्रैंचों के छाया चित्र, मौके के ग्राफ तैयार किए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अमर उजाला को उत्खनन की शानदार कवरेज के लिए विभाग द्वारा प्रशस्ति पत्र जारी किया जाएगा।
उत्खनन में आज तक मिले मिट्टी के बर्तनों के टुकडे़, तांबे की चूड़ियां, पशु आकृति, जानवर का जबड़ा, सिल बट्टे, खिलौना गाड़ियों के पहिए, दाल के बीज, कोयला आदि प्राप्त हो चुके हैं।