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पांच को फांसी की सजा: यहां 1968 से नहीं खुला जिला कारागार में बने फांसी घर का दरवाजा, पढ़िए खास रिपोर्ट

Fri, 07 Jun 2024 01:07 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Fri, 07 Jun 2024 01:07 PM IST
सार

Saharanpur News : सहारनपुर में अधिवक्ता की हत्या के मामले में पांच दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। वहीं, इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो जनपद में 1968 से जिला कारागार में बने फांसी घर का दरवाजा नहीं खुला है।

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Door of hanging house in district jail has not been opened since 1968
सहारनपुर अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहारनपुर में कर्मवीर हत्याकांड के पांच दोषियों को फांसी की सजा हुई है। इससे पहले भी फांसी की सजा तो काफी लोगों को हो चुकी है, लेकिन जिले के रिकॉर्ड में फांसी पर केवल 11 लोगों को लटकाया गया। किसी को हाईकोर्ट से राहत मिल गई, जिस वजह से फांसी नहीं हुई। जिले में अंतिम बार फांसी 1968 में मोहल्ला शाहमदार निवासी इनाम को पत्नी की हत्या में दोषी पाए जाने पर दी गई थी।

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दरअसल, पुराने इतिहास पर नजर डालें तो 1949 से 1968 तक 11 लोगों को फांसी पर लटकाया जा चुका है। जिसमें देहरादून कोतवाली नगर के अंतर्गत मोहल्ला लक्खीबाग निवासी मोहम्मद याकूब, मुजफ्फरनगर के बिलासपुर निवासी समयदीन, बिहारीगढ़ निवासी धूम सिंह, जिला फतेहपुर के मरहा कल्याणपुर निवासी जगमोहन शामिल है।

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इसके अलावा बिजनौर गांव मंडावर निवासी बुद्दू, मेरठ के सदर बाजार निवासी रामफल, जिला शाहजहांपुर के लुकभावनपुर निवासी सोहन सिंह, जिला सहारनपुर निवासी दयाराम को डकैती और हत्या के दोष में फांसी पर लटकाया गया। हरिद्वार के थाना ज्वालापुर क्षेत्र के गांव भूराभूरी निवासी अली को हत्या के दोष में फांसी दी गई। आखरी बार सहारनपुर के मोहल्ला शाहमदार निवासी इनाम को पत्नी की हत्या में दोषी सिद्ध होने पर तीन जून 1968 की सुबह 4ः30 बजे फांसी दी गई थी।

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सजा हो चुकी है कई दोषियों को
जिले में हुए तिहरे हत्याकांड में 2004 में अदालत ने चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। वर्ष 2001 में थाना सरसावा के गांव मंधौर में पुरानी रंजिश के चलते तीन भाई भीम सिंह, धर्मपाल, जयपाल की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने 2004 में गांव के ही जसबीर, संजय, प्रदीप और रामभूल को साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, वह हाईकोर्ट से बरी हो गए थे। अब 20 साल बाद कर्मवीर हत्याकांड में पांच दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

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जिला कारागार में अंतिम फांसी 1968 में हुई थी। इसके बाद यहां किसी को फांसी नहीं दी गई है। - अमिता दुबे, वरिष्ठ जेल अधीक्षक

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