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दो घंटे की रह जाएगी दिल्ली और सहारनपुर के बीच की दूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 17 May 2017 12:14 AM IST
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सहारनपुर में छह साल से लटका दिल्ली-सहारनपुर-यमुनौत्री हाईवे के निर्माण का कार्य जल्द शुरू होगा। नया यह है कि अब यह स्टेट हाईवे नहीं रहा है, बल्कि केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद नेशनल हाईवे हो गया है, जिसकी कागजी कार्रवाई चल रही है।
हाईवे के बनने के बाद सहारनपुर की दिल्ली से दूरी मात्र दो घंटे की रह जाएगी। यानी सीधे तौर पर सहारनपुर की जनता को हाईवे बनने का बड़ा फायदा होने वाला है।
बसपा सरकार ने दिल्ली-सहारनपुर-यमुनौत्री हाईवे को हरी झंडी दी थी। एक कंपनी को इसके निर्माण का ठेका दिया गया था। कंपनी ने हाईवे को फोरलेन बनाने का काम शुरू कर दिया था।
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मगर कंपनी को हाईवे के दोनों ओर खड़े पेड़ों को काटने के लिए एनओसी नहीं मिल सकी थी। इसकी वजह से काम लटक गया था। हालांकि कंपनी ने मार्ग के बीच में पड़ने वाली अनेक पुलियाओं का निर्माण करा दिया था।
सहारनपुर में भी कई पुलिया बनी थी। मगर काम इससे आगे नहीं बढ़ सका। फरवरी 2017 में निर्माण कंपनी द्वारा कागजों में ही हाईवे बना देने और 455 करोड़ रुपये हड़पने का मामला सामने आया, जिससे हड़कंप मच गया।
उपशा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद राज्य सरकार ने इस हाईवे को केंद्र सरकार को सौंप दिया है। यानी अब यह स्टेट हाईवे से नेशनल हाइवे में बदल गया है।
अप्रैल 2017 में केंद्र सरकार ने इस पर अपनी स्वीकृति भी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि अब इसकी कागजी कार्रवाई कर रही है, जिसके बाद इस एनएच को नंबर मिल जाएगा। नंबर तय होने के बाद सरकार इसपर काम शुरू कराएगी। पिछले छह साल से चार जिलों की जनता इसके इसके बनने का इंतजार है।
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हाईवे के बनने के बाद सहारनपुर की दिल्ली से दूरी मात्र दो घंटे की रह जाएगी। यानी सीधे तौर पर सहारनपुर की जनता को हाईवे बनने का बड़ा फायदा होने वाला है।
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बसपा सरकार ने दिल्ली-सहारनपुर-यमुनौत्री हाईवे को हरी झंडी दी थी। एक कंपनी को इसके निर्माण का ठेका दिया गया था। कंपनी ने हाईवे को फोरलेन बनाने का काम शुरू कर दिया था।
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मगर कंपनी को हाईवे के दोनों ओर खड़े पेड़ों को काटने के लिए एनओसी नहीं मिल सकी थी। इसकी वजह से काम लटक गया था। हालांकि कंपनी ने मार्ग के बीच में पड़ने वाली अनेक पुलियाओं का निर्माण करा दिया था।
सहारनपुर में भी कई पुलिया बनी थी। मगर काम इससे आगे नहीं बढ़ सका। फरवरी 2017 में निर्माण कंपनी द्वारा कागजों में ही हाईवे बना देने और 455 करोड़ रुपये हड़पने का मामला सामने आया, जिससे हड़कंप मच गया।
उपशा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद राज्य सरकार ने इस हाईवे को केंद्र सरकार को सौंप दिया है। यानी अब यह स्टेट हाईवे से नेशनल हाइवे में बदल गया है।
अप्रैल 2017 में केंद्र सरकार ने इस पर अपनी स्वीकृति भी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि अब इसकी कागजी कार्रवाई कर रही है, जिसके बाद इस एनएच को नंबर मिल जाएगा। नंबर तय होने के बाद सरकार इसपर काम शुरू कराएगी। पिछले छह साल से चार जिलों की जनता इसके इसके बनने का इंतजार है।