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कोल्हू चले, हवा में घुलने लगी गरम गुड़ की खुशबू

Thu, 06 Oct 2022 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Oct 2022 11:21 PM IST
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The crusher went on, the smell of hot jaggery started dissolving in the air
शम्भूराम - फोटो : SAHARANPUR
कोल्हू चले, हवा में घुलने लगी गरम गुड़ की खुशबू
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बड़गांव (सहारनपुर)। गुड़ खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उससे कहीं अधिक मन मोहने वाली इसकी खुशबू होती है। क्षेत्र में कोल्हू चल गए हैं और यहां गुड़ बनने का काम शुरु हो चुका है। ऐसे में इसकी खुशबू फैलने लगी है। चीनी मिल नहीं चले हैं ऐसे में किसान भी अपने घरेलू खर्च पूरे करने को इन पर गन्ना डाल रहे हैं। क्षेत्र के देवबंद -नानौता रोड 8 पर बड़गांव से महेशपुर तक के तीन किमी के एरिया में दर्जन भर से ज्यादा गन्ना कोल्हुओं का हर वर्ष संचालन होता है। इस बार भी कच्चे मीठे के व्यापारियों ने कोल्हू लगाकर गुड़, शक्कर आदि बनाना शुरू कर दिया है।
चीनी मिल न चलने से कम दाम पर गन्ना बेचने की मजबूरी
वैसे तो देवोत्थान एकादशी पर गन्ने से देवताओं की पूजा अर्चना करने के बाद गन्ना खाने व रस पीने आदि का चलन है, लेकिन क्षेत्र में ईख की पैदावार अधिक होने और कारोबारी मजबूरी के चलते देवोत्थान से पूर्व ही गन्ना कोल्हू शुरू हो जाते हैं। हालांकि देवबंद व नानौता चीनी मिल अभी शुरू नहीं हो सकी है। बावजूद इसके गन्ना कोल्हुओं पर तेजी से गन्ने की खरीद हो रही है। कोल्हू संचालक भी चीनी मिल न चलने का फायदा उठाते हुए 230 से 260 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से गन्ने की खरीद कर रहे हैं, जबकि मिल द्वारा 325 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की जाएगी। छोटे किसान घरेलू खर्च और पशुओं के लिए चारा बरसीम आदि की बुवाई करने के लिए खेत खाली करने की खातिर औने पौने दामों पर गन्ना बेचने को मजबूर हैं।
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मिठाई के तौर पर भिजवाते हैं रिश्तेदारी में
अक्तूबर माह में शुरू हुए गन्ना कोल्हू अप्रैल-मई तक चलते हैं। गांवों के लोग चीनी के उपयोग से बचते हुए गुड़, शक्कर, रवा खाना अधिक पसंद करते हैं। गुड़ की कतरी तिल, मूंगफली, घी, सौंठ आदि डलवा कर बनवाने के बाद रिश्तेदारी में भी इसे दिया जाता है। ग्रामीण गुड़ व शक्कर को ही कच्ची मिठाई मानते हैं। लोगों का यह भी मानना है कि गुड़ खाने से शरीर स्वस्थ रहता है। बीमारियों से बचाव होता है।
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साल भर का खर्च निकालते हैं कोल्हू संचालक
कोल्हू संचालक रामपाल, जितेंद्र, भोला, लाल सिंह, मांगा आदि का कहना है कि छह माह का रोजगार उन्हें क्रेशर पर गुड़ शक्कर बनाने से मिल जाता है जिससे उनका पूरे साल का खर्च चलता है।

मन्नू सिंह

मन्नू सिंह- फोटो : SAHARANPUR

सतीश शर्मा

सतीश शर्मा- फोटो : SAHARANPUR

बड़गांव के महशेपुर में चालु हुआ गन्ना कोल्हू

बड़गांव के महशेपुर में चालु हुआ गन्ना कोल्हू- फोटो : SAHARANPUR

कोल्हू पर गुड़ बनाते कारीगर

कोल्हू पर गुड़ बनाते कारीगर- फोटो : SAHARANPUR

कोल्हू में गुड़ तैयार करते कारीगर

कोल्हू में गुड़ तैयार करते कारीगर- फोटो : SAHARANPUR

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