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कोविड टीकाकरण केंद्रों से लौटाए जा रहे किशोर
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जिला अस्पताल से बिना टीका लगवाए लौट रहे किशोर।
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कई कोविड टीकाकरण केंद्रों से किशोरों को बिना टीका लगाए लौटाया जा रहा है। विभाग का तर्क है कि एक या दो किशोरों के लिए वैक्सीन की नई वॉयल नहीं खोली जा सकती है, क्योंकि यदि अन्य किशोर नहीं आते हैं तो खुली वॉयल में चार घंटे बाद वैक्सीन खराब हो जाती है। ऐसे में किशोरों को आठ से दस किशोरों के समूह में आने को कहा जा रहा है, जो आसान नहीं है। ऐसे में किशोर मायूस होकर लौट रहे हैं।
पुल खुमरान रोड निवासी 14 वर्षीय मयंक गुप्ता ने कोविड वैक्सीन की पहली खुराक अपने स्कूल में लगवाई थी, लेकिन बाद में वहां टीकाकरण बंद कर दिया गया। वह दूसरी खुराक के लिए जिला महिला अस्पताल पहुंचे, जहां कोर्विवैक्स वैक्सीन नहीं होने की बात कहते हुए मयंक को एसबीडी जिला अस्पताल के एमआरआई भवन में चल रहे टीकाकरण केंद्र पर जाने की सलाह दी गई। वहां पहुंचे तो स्टाफ ने बताया कि वह एक किशोर के लिए वैक्सीन की वॉयल नहीं खोल सकते हैं। इसी दौरान माधोनगर निवासी किशोर भी पहुंचा, जिसे भी टीका लगाने से मना कर दिया गया। दोनों किशोरों को आशा मॉडर्न स्कूल जाकर टीका लगवाने की सलाह दी गई। स्टाफ का कहना था कि उन्हें दो या चार बच्चों के लिए वैक्सीन की वॉयल नहीं खोलने के लिए कहा गया है। इसके बाद किशोरों को वहां से मायूस होकर लौटना पड़ा। हालांकि आशा मॉडर्न स्कूल में उन्हें टीका लगा दिया गया।
शत प्रतिशत किशोरों को वैक्सीन लगाने के लिए वैक्सीन को खराब होने से बचाना भी बेहद जरूरी है। चूंकि खुली वॉयल में यदि वैक्सीन बची हो तो वह चार घंटे बाद खराब हो जाती है। यही वजह है कि स्टाफ से कहा गया है कि जब आठ से दस किशोर इकट्ठे हो जाएं तो ही वॉयल खोली जाए। इसकी वजह से कुछ किशोरों को परेशानी हुई होगी। यह राष्ट्रहित का अभियान है, जिसमें सभी का सहयोग जरूरी है।
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डॉ. सुनील कुमार वर्मा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।
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पुल खुमरान रोड निवासी 14 वर्षीय मयंक गुप्ता ने कोविड वैक्सीन की पहली खुराक अपने स्कूल में लगवाई थी, लेकिन बाद में वहां टीकाकरण बंद कर दिया गया। वह दूसरी खुराक के लिए जिला महिला अस्पताल पहुंचे, जहां कोर्विवैक्स वैक्सीन नहीं होने की बात कहते हुए मयंक को एसबीडी जिला अस्पताल के एमआरआई भवन में चल रहे टीकाकरण केंद्र पर जाने की सलाह दी गई। वहां पहुंचे तो स्टाफ ने बताया कि वह एक किशोर के लिए वैक्सीन की वॉयल नहीं खोल सकते हैं। इसी दौरान माधोनगर निवासी किशोर भी पहुंचा, जिसे भी टीका लगाने से मना कर दिया गया। दोनों किशोरों को आशा मॉडर्न स्कूल जाकर टीका लगवाने की सलाह दी गई। स्टाफ का कहना था कि उन्हें दो या चार बच्चों के लिए वैक्सीन की वॉयल नहीं खोलने के लिए कहा गया है। इसके बाद किशोरों को वहां से मायूस होकर लौटना पड़ा। हालांकि आशा मॉडर्न स्कूल में उन्हें टीका लगा दिया गया।
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शत प्रतिशत किशोरों को वैक्सीन लगाने के लिए वैक्सीन को खराब होने से बचाना भी बेहद जरूरी है। चूंकि खुली वॉयल में यदि वैक्सीन बची हो तो वह चार घंटे बाद खराब हो जाती है। यही वजह है कि स्टाफ से कहा गया है कि जब आठ से दस किशोर इकट्ठे हो जाएं तो ही वॉयल खोली जाए। इसकी वजह से कुछ किशोरों को परेशानी हुई होगी। यह राष्ट्रहित का अभियान है, जिसमें सभी का सहयोग जरूरी है।
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डॉ. सुनील कुमार वर्मा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।