व्यवस्था बेहाल : सहारनपुर जिला अस्पताल में बेहोशी का मात्र एक ही डॉक्टर, कैसे 24 घंटे होंगे ऑपरेशन
डॉ. नवदीप ने तीनों शिफ्ट में काम करने को अव्यवहारिक बताया है। उन्होंने अधिकारियों के सामने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल एक ही शिफ्ट में काम कर सकेंगे।
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सहारनपुर शासन ने जिला महिला अस्पताल से बेहोशी के एक और डॉक्टर का स्थानांतरण कर दिया है, जिसके बाद अस्पताल में बेहोशी का मात्र एक डॉक्टर बचा है। ऐसे में 24 घंटे ऑपरेशन की सेवा गड़बड़ा गई है। सीएमएस की ओर से इस संबंध में शासन को पत्र लिखकर बेहोशी का डॉक्टर भेजने की मांग की गई है।
जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए गर्भवतियों के ऑपरेशन की 24 घंटे की सुविधा रहती है। डॉक्टरों की ड्यूटी आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट में लगाई जाती है। इस लिहाज से महिला अस्पताल में बेहोशी के कम से कम तीन डॉक्टर होने चाहिए। जिला महिला अस्पताल लंबे समय से मात्र दो डॉक्टरों से काम चला रहा था। चूंकि गर्भवतियों के सामने ऑपरेशन की स्थिति किसी भी समय बन सकती है।
ऐसे में दोनों डॉक्टरों में से कोई ना कोई मौजूद रहता था। मगर शासन ने अब एक और डॉक्टर का स्थानांतरण किया गया है। उन्हें बागपत भेजा गया है। उनके बाद अब डॉ. नवदीप गुप्ता एकलौते बेहोशी के डॉक्टर बचे हैं, जिन पर तीनों शिफ्ट में काम करने की जिम्मेदारी है।
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डॉ. नवदीप ने तीनों शिफ्ट में काम करने को अव्यवहारिक बताया है। उन्होंने अधिकारियों के सामने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल एक ही शिफ्ट में काम कर सकेंगे। ऐसे में बाकी दो शिफ्ट में यदि किसी गर्भवती के ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है तो उनके सामने मुश्किल खड़ी होगी।
प्रतिदिन होते हैं 15 से 20 ऑपरेशन
जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 15 से 20 गर्भवतियों के प्रसव ऑपरेशन के द्वारा किए जाते हैं। बीते माह जिला महिला अस्पताल ने 460 महिलाओं के ऑपरेशन कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था। इनमें रात के भी 155 ऑपरेशन शामिल थे।
जिला महिला अस्पताल में बेहोशी का केवल एक डॉक्टर रह गया है, जिससे तीनों शिफ्ट में काम लिया जाना संभव नहीं है। ऐसे में हमारे और बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाली गरीब घरों की गर्भवतियों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। शासन को पत्र लिखकर बेहोशी के डॉक्टर की मांग की गई है। -डॉ. इंदिरा सिंह, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल