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शुगर, बीपी के मरीजों को लकवा होने का अधिक खतरा
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सहारनपुर। पैरालिसिस जिसे सामान्य भाषा में लकवा कहा जाता है, यह तेजी से बढ़ती बीमारी है, जिसके होने का प्रमुख कारण बीपी, शुगर, दिल की बीमारियां और कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना है। इन बीमारियों से ग्रसित मरीजों को पैरालिसिस से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
सहारनपुर जिला अस्पताल में लकवा के 30 से 35 मामले हर महीने पहुंच रहे हैं, जबकि एक साल पूर्व तक यह संख्या 20 से 25 तक रहती थी। इस बीमारी के पीछे मुख्य वजह गलत खानपान और आरामदायक जीवनशैली मनुष्य को शुगर, बीपी, दिल और अन्य बीमारियों को माना जा रहा है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अनिल वोहरा ने बताया कि सर्दियों में खून गाढ़ा हो जाने के कारण ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ जाती है, जिससे पैरालिसिस का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि पैरालिसिस सबसे अधिक बीपी, शुगर और दिल के मरीजों को होता है। जरूरी है कि अपनी दिनचर्या और खानपान में सुधार लाएं। प्रतिदिन व्यायाम कर ऐसी बीमारियों से बचा जा सकता है। पैरालिसिस के लक्षण नजर आते ही तीन घंटे के भीतर यदि योग्य चिकित्सक को दिखाया जाए तो पैरालिसिस को ठीक किया जा सकता है।
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पैरालिसिस होने के लक्षण
- शरीर के एक हिस्से में कमजोरी आना।
- चलने में लड़खड़ाना और ठीक से शब्दों को नहीं बोल पाना।
- आंखों में धुंधलापन होना चीजें दो-दो नजर आना।
- हाथों और पैरों का सुन रहना।
- चेहरे का टेढ़ा हो जाना।
पैरालिसिस मरीजों का आहार
- हरी सब्जियां खाएं, सप्ताह में दो बार मछली खाएं।
- साबुत अनाज और दालें खानी चाहिए।
- दो से तीन बार ताजे फलों का सेवन करें।
बचाव के लिए यह करें
- ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें।
- मोटापा कम करें, प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा टहलें।
- शराब का अधिक सेवन ना करें, धूम्रपान ना करें।
- कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाली चीजें जैसे बर्गर, मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा आदि खाने से बचें।
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सहारनपुर जिला अस्पताल में लकवा के 30 से 35 मामले हर महीने पहुंच रहे हैं, जबकि एक साल पूर्व तक यह संख्या 20 से 25 तक रहती थी। इस बीमारी के पीछे मुख्य वजह गलत खानपान और आरामदायक जीवनशैली मनुष्य को शुगर, बीपी, दिल और अन्य बीमारियों को माना जा रहा है।
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जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अनिल वोहरा ने बताया कि सर्दियों में खून गाढ़ा हो जाने के कारण ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ जाती है, जिससे पैरालिसिस का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि पैरालिसिस सबसे अधिक बीपी, शुगर और दिल के मरीजों को होता है। जरूरी है कि अपनी दिनचर्या और खानपान में सुधार लाएं। प्रतिदिन व्यायाम कर ऐसी बीमारियों से बचा जा सकता है। पैरालिसिस के लक्षण नजर आते ही तीन घंटे के भीतर यदि योग्य चिकित्सक को दिखाया जाए तो पैरालिसिस को ठीक किया जा सकता है।
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पैरालिसिस होने के लक्षण
- शरीर के एक हिस्से में कमजोरी आना।
- चलने में लड़खड़ाना और ठीक से शब्दों को नहीं बोल पाना।
- आंखों में धुंधलापन होना चीजें दो-दो नजर आना।
- हाथों और पैरों का सुन रहना।
- चेहरे का टेढ़ा हो जाना।
पैरालिसिस मरीजों का आहार
- हरी सब्जियां खाएं, सप्ताह में दो बार मछली खाएं।
- साबुत अनाज और दालें खानी चाहिए।
- दो से तीन बार ताजे फलों का सेवन करें।
बचाव के लिए यह करें
- ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें।
- मोटापा कम करें, प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा टहलें।
- शराब का अधिक सेवन ना करें, धूम्रपान ना करें।
- कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाली चीजें जैसे बर्गर, मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा आदि खाने से बचें।