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मौत से जंग लड़ रही खुशी को मदद की दरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 30 May 2017 12:52 AM IST
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मां की गोद में मुस्कान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में महज ढाई साल की उम्र में जब वह मां और पापा बोलना सीख ही रही थी, तब वक्त ने ऐसी पटखनी दी, जिसने उस मासूम को जिंदगी की बजाय मौत की तरफ धकेल दिया।
जिंदगी के नौ बरस पूरे कर चुकी खुशी नाम की इस बच्ची को जिंदगी के लिए मदद की जरूरत है। उधर, इस मामले में सांसद ने भी पीड़ित की मदद के लिए पीएम को पत्र लिखा है।
आईटीसी रोड से सटी गांधी कॉलोनी में किराए के मकान में रहने वाले मनोज की चार बेटियां ही हैं, जिनमें सबसे छोटी बेटी नौ साल की खुशी है। ढाई साल की उम्र तक खुशी की ग्रोथ ठीकठाक थी, मगर एक दिन खेलते हुए खुशी सीढ़ियों से नीचे आ गिरी।
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परिजनों को उसके जबड़े में लगी चोट नजर आई, जिसका इलाज छोटे-मोटे चिकित्सक के यहां करा दिया गया। मगर कुछ दिन बाद अहसास हुआ कि हादसे में खुशी की सुनने की क्षमता खत्म हो गई है।
न सुन पाने की वजह से वह मां और पापा बोलने से आगे बोलना नहीं सीख पाई। नौ साल की हो जाने के बावजूद देखने में चार से पांच साल की लगने वाली खुशी को लेकर परिजनों को चिंता हुई तो पिता मनोज और मां ममता ने उसे सहारनपुर में ही चिकित्सक को दिखाया, जहां खुशी को चंडीगढ़ ले जाने की सलाह दी गई।
इसके बाद वह खुशी को पीजीआई चंडीगढ़ ले गए, जहां खुशी के तमाम टेस्ट किए गए। टेस्ट में पता चला कि खुशी की किडनी खराब हो गई है, जिन्हें शीघ्र बदला जाना बेहद जरूरी है।
उसके बाद से मनोज का परिवार बेटी को बचाने के लिए लगातार जद्दोजहद में जुटा है, जिन्हें आर्थिक मदद की सख्त दरकार है। चिकित्सकों ने कहा है कि यदि समय रहते किडनी न बदली गई तो बच्ची को बचाना मुश्किल होगा।
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जिंदगी के नौ बरस पूरे कर चुकी खुशी नाम की इस बच्ची को जिंदगी के लिए मदद की जरूरत है। उधर, इस मामले में सांसद ने भी पीड़ित की मदद के लिए पीएम को पत्र लिखा है।
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आईटीसी रोड से सटी गांधी कॉलोनी में किराए के मकान में रहने वाले मनोज की चार बेटियां ही हैं, जिनमें सबसे छोटी बेटी नौ साल की खुशी है। ढाई साल की उम्र तक खुशी की ग्रोथ ठीकठाक थी, मगर एक दिन खेलते हुए खुशी सीढ़ियों से नीचे आ गिरी।
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परिजनों को उसके जबड़े में लगी चोट नजर आई, जिसका इलाज छोटे-मोटे चिकित्सक के यहां करा दिया गया। मगर कुछ दिन बाद अहसास हुआ कि हादसे में खुशी की सुनने की क्षमता खत्म हो गई है।
न सुन पाने की वजह से वह मां और पापा बोलने से आगे बोलना नहीं सीख पाई। नौ साल की हो जाने के बावजूद देखने में चार से पांच साल की लगने वाली खुशी को लेकर परिजनों को चिंता हुई तो पिता मनोज और मां ममता ने उसे सहारनपुर में ही चिकित्सक को दिखाया, जहां खुशी को चंडीगढ़ ले जाने की सलाह दी गई।
इसके बाद वह खुशी को पीजीआई चंडीगढ़ ले गए, जहां खुशी के तमाम टेस्ट किए गए। टेस्ट में पता चला कि खुशी की किडनी खराब हो गई है, जिन्हें शीघ्र बदला जाना बेहद जरूरी है।
उसके बाद से मनोज का परिवार बेटी को बचाने के लिए लगातार जद्दोजहद में जुटा है, जिन्हें आर्थिक मदद की सख्त दरकार है। चिकित्सकों ने कहा है कि यदि समय रहते किडनी न बदली गई तो बच्ची को बचाना मुश्किल होगा।