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ऐसे मनाया गया मां शाकंभरी का जयंती महोत्सव
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 03 Jan 2018 12:14 AM IST
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मां शाकंभरी को भोग लगाने जाते श्रद्धालु और संत।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के बेहट में धार्मिक एवं एतिहासिक सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी मंदिर में मंगलवार को मां शाकंभरी जयंती महोत्सव आस्था के साथ मनाया गया। शंकराचार्य आश्रम में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में पूर्णाहुति के बाद संत समाज और भक्तों ने मां शाकंभरी देवी को 56 भोग अर्पित किए।
उधर, मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार द्वारा भी माता की विशेष पूजा अर्चना की गई। इस दौरान शिवालिक पहाड़ियों में वातावरण मां के जयकारों से गूंज उठा। पिछले एक सप्ताह से शंकराचार्य आश्रम में जयंती उत्सव की तैयारियां की जा रही थी।
मां को अर्पण किए जाने वाले 56 भोग एवं 36 व्यंजन तैयार किए जाने के साथ ही आश्रम को भव्य रूप दिया जा रहा था। माता के मंदिर में भी राणा परिवार द्वारा उत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही थी। मंगलवार को दोपहर में आश्रम में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई, जिसमें बड़ी संख्या में संत समाज एवं माता के भक्तों ने भाग लिया।
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इसके बाद आश्रम व्यवस्थापक सिद्ध भैरवा तंत्राचार्य महंत सहजानंद ब्रह्मचारी के सानिध्य में भक्तों और संतों ने मां की विशेष पूजा अर्चना कर 56 भोग एवं 36 व्यंजन मां को अर्पण किए।
मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार की तरफ से भी विद्वान पंडितों द्वारा महामयी आदिशक्ति की विशेष पूजा अर्चना की और मां को भोग अर्पण किए। इसके बाद भंडारों का आयोजन किया गया। माता के गुणगान से शिवालिक पहाड़ियां गूंज उठी।
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उधर, मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार द्वारा भी माता की विशेष पूजा अर्चना की गई। इस दौरान शिवालिक पहाड़ियों में वातावरण मां के जयकारों से गूंज उठा। पिछले एक सप्ताह से शंकराचार्य आश्रम में जयंती उत्सव की तैयारियां की जा रही थी।
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मां को अर्पण किए जाने वाले 56 भोग एवं 36 व्यंजन तैयार किए जाने के साथ ही आश्रम को भव्य रूप दिया जा रहा था। माता के मंदिर में भी राणा परिवार द्वारा उत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही थी। मंगलवार को दोपहर में आश्रम में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई, जिसमें बड़ी संख्या में संत समाज एवं माता के भक्तों ने भाग लिया।
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इसके बाद आश्रम व्यवस्थापक सिद्ध भैरवा तंत्राचार्य महंत सहजानंद ब्रह्मचारी के सानिध्य में भक्तों और संतों ने मां की विशेष पूजा अर्चना कर 56 भोग एवं 36 व्यंजन मां को अर्पण किए।
मंदिर व्यवस्थापक राणा परिवार की तरफ से भी विद्वान पंडितों द्वारा महामयी आदिशक्ति की विशेष पूजा अर्चना की और मां को भोग अर्पण किए। इसके बाद भंडारों का आयोजन किया गया। माता के गुणगान से शिवालिक पहाड़ियां गूंज उठी।