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Saharanpur News: विभिन्न भाषाओं को सीखेंगे का विद्यार्थी
Mon, 16 Jan 2023 12:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 16 Jan 2023 12:08 AM IST
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सहारनपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में एक ओर जहां देश की विभिन्न भाषाओं का विकास होगा। वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों को अपनी भाषा के साथ ही देश की अन्य भाषाओं को सीखने का मौका मिलेगा। मां शाकंभरी विश्वविद्यालय ने शिक्षा नीति को लेकर महाविद्यालयों एवं निजी उच्च शिक्षण संस्थाओं को पत्र जारी कर इस संबंध में निर्देशित किया है।
कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव लाने वाली है। उन्होंने बताया कि हिन्दी के अलावा भारत की अन्य भाषाओं को शिक्षा नीति में खासा महत्व दिया गया है। प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में भारतीय भाषा विकास क्लब की स्थापना की जानी है। इसके लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। क्लब के माध्यम से भारत की विभिन्न भाषाओं को जानने वाले शिक्षक और विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा, जिससे भाषा का आदान प्रदान हो सके। इसके अलावा विद्यार्थियों को भाषाएं सिखाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि भाषा एक माध्यम है, जिसके जरिए हम अपनी बात दूसरों को कह सकते हैं और दूसरों की बात समझ सकते हैं। भारत अनेक भाषाओं का देश है। ऐसे में जरूरी है कि विद्यार्थी अधिक से अधिक भाषााओं को जानें और समझें, जिससे उन्हें देश के किसी भी राज्य में रहने या काम करने में कोई परेशानी ना आए।
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कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव लाने वाली है। उन्होंने बताया कि हिन्दी के अलावा भारत की अन्य भाषाओं को शिक्षा नीति में खासा महत्व दिया गया है। प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में भारतीय भाषा विकास क्लब की स्थापना की जानी है। इसके लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। क्लब के माध्यम से भारत की विभिन्न भाषाओं को जानने वाले शिक्षक और विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा, जिससे भाषा का आदान प्रदान हो सके। इसके अलावा विद्यार्थियों को भाषाएं सिखाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि भाषा एक माध्यम है, जिसके जरिए हम अपनी बात दूसरों को कह सकते हैं और दूसरों की बात समझ सकते हैं। भारत अनेक भाषाओं का देश है। ऐसे में जरूरी है कि विद्यार्थी अधिक से अधिक भाषााओं को जानें और समझें, जिससे उन्हें देश के किसी भी राज्य में रहने या काम करने में कोई परेशानी ना आए।
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