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Saharanpur News: मानक 135 लीटर प्रतिदिन, खर्च कर रहे 146 लीटर, पानी हो रहा बर्बाद

Sat, 27 Apr 2024 03:44 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Apr 2024 03:44 AM IST
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Standard is 135 liters per day, 146 liters are being spent, water is getting wasted.
सहारनपुर। गर्मी आते ही महानगर में पेयजल की खपत 25 फीसदी तक बढ़ गई है। मानक के अनुसार, एक व्यक्ति के हिस्से में प्रतिदिन 135 लीटर पानी आता है, लेकिन महानगर का प्रत्येक नागरिक हर दिन 146 लीटर से अधिक पानी खर्च रहा है। यानी मानक से 11 लीटर पानी ज्यादा। जून में पानी की खपत के और बढ़ने का अनुमान है। उधर, गर्मी के कारण भू-गर्भ जल स्तर भी दो फीट तक नीचे चला गया है।
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पेयजल आपूर्ति के लिए नगर निगम के पास 22 ओवरहेड टैंक बने हैं। 124 बड़े और 117 छोटे नलकूप हैं। उक्त नलकूपों की क्षमता प्रतिदिन 140 मिलियन लीटर पानी आपूर्ति की है, लेकिन जनता की जरूरत के हिसाब से प्रतिदिन 110 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। महानगर में करीब 1.62 लाख मकान हैं, जिनमें करीब 7.5 लाख आबादी रहती है। 7.5 लाख आबादी पर प्रतिदिन 110 मिलियन लीटर पानी खर्च होने का मतलब है कि प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से में करीब 146 लीटर से अधिक पानी आना, जबकि मानक के अनुसार, एक व्यक्ति के हिस्से में प्रतिदिन 135 लीटर पानी आता है। इस प्रकार महानगर में प्रत्येक व्यक्ति करीब 11 लीटर पानी अधिक खर्च रहा है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी में पानी का करीब 25 फीसदी खर्च बढ़ जाता है। नलकूपों के अलावा पेयजल आपूर्ति के लिए 33 वाटर कूलर और 2,755 हैंडपंप इससे हैं। (संवाद)
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पानी की बर्बादी भी कम नहीं
महानगर में गाड़ियों के धुलाई के सेंटर बने हैं, जिनमें से ज्यादातर बिना पंजीकरण के हैं। दो साल पहले नगर निगम ने उक्त सेंटरों को चिह्नित करने की बात कही थी, लेकिन निगम के पास वाहन धुलाई सेंटरों की कोई ब्योरा फिलहाल नहीं है। इसके अलावा लीकेज भी पानी की बर्बादी का बड़ा कारण है। प्रतिदिन किसी ना किसी वार्ड में लीकेज की समस्या रहती है, जो पानी की बर्बादी का बड़ा कारण है।
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17 नलकूपों को रिबोरिंग की जरूरत
124 बड़े नलकूपों में से दस नलकूप तथा 117 छोटे नलकूपों में से सात नलकूप ऐसे हैं, जिनको रिबोर किए जाने की जरूरत है। नगर निगम के जलकल विभाग ने उक्त नलकूपों को रिबोर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिससे की आगामी दिनों में पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहे। साथ ही खराब हैंडपंपों को भी रिबोर कराया जा रहा है।

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प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से में हर दिन 135 लीटर पानी आता है, लेकिन गर्मियों में खपत बढ़ जाती है। प्रयास यही रहता है कि पानी बर्बाद ना हो। इसके लिए आम नागरिकों को भी सजग होना पड़ेगा, क्योंकि यदि आज पानी बर्बाद करेंगे तो आने वाले समय में परेशानी होगी।
- बीके सिंह, महाप्रबंधक जलकल/मुख्य अभियंता, निर्माण, नगर निगम
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