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Saharanpur News: दस्तावेजों में बिकता रहा एसएसपी आवास, 30 से अधिक हुए बैनामे

Sun, 09 Jun 2024 03:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sun, 09 Jun 2024 03:26 AM IST
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SSP residence kept getting sold in documents, more than 30 deeds were made
सहारनपुर। करीब 150 करोड़ की कीमत वाले एसएसपी आवास पर मालिकाना हक का दावा करने के मामले में अहम जानकारी सामने आई है। 2017 से पहले इस संपत्ति की 30 से अधिक लोगों ने खरीद-फरोख्त की। एक के बाद एक बैनामे किए गए। हैरानी की बात यह है कि न ही बेचने वाले ने कभी कब्जा लिया और न ही खरीदने वाला कब्जा लेने पहुंचा। आवास में लगातार 1889 से सहारनपुर एसएसपी रहते आ रहे हैं।
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दरअसल, एसएसपी आवास को लेकर कुछ लोगों ने मालिकाना हक का दावा किया था। जिस पर मौजूदा एसएसपी डॉ. विपिन ताडा और डीएम डॉ. दिनेश चंद्र के आदेश पर सात सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। हाल ही में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी थी कि जो लोग संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा कर रहे हैं वह गलत तथ्यों के आधार पर है। इस दौरान यह भी सामने आया कि मालिकाना हक का दावा करने वालों ने पहले नगर निगम के स्वामित्व में अपना दर्ज कराया। इसके बाद राजस्व परिषद से भी आदेश करा लिया। राजस्व परिषद के आदेश के बाद जब खेवट उनके नाम पर होने लगी, तब जाकर पता चला कि 2017 से पहले इस संपत्ति के करीब 30 से अधिक लोगों के नाम पर बैनामे किए गए। एक के बाद एक बैनामे होते रहे, लेकिन कभी किसी ने कब्जा नहीं लिया। केवल दस्तावेजों में ही कार्रवाई चलती रही। राजस्व परिषद का आदेश आने के बाद मालिकाना हक का दावा करने वालों ने मामले को अदालत में डाला।
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उधर, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि पुलिस-प्रशासन की संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट अदालत में दी गई है। जिसमें सभी तथ्यों का उल्लेख विस्तार से किया गया है।
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स्वामित्व के नाम पर आ चुके हैं फर्जीवाड़े सामने
केस : 1

माधोनगर के रहने वाले सत्यपाल शर्मा के भाई की मौत 28 अप्रैल 2021 को हुई थी। वह नवाबगंज स्थित मकान नंबर 4/1424 में रहते थे। यह मकान उन्होंने जून 2010 को शराफत से खरीदा था। आरोप है कि मृतक के नौकर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर नगर निगम के राजस्व रिकॉर्ड में स्वामित्व बदलवा लिया। निगम के राजस्व रिकॉर्ड में स्वामित्व बदलने के लिए कोई ठोस दस्तावेज भी नहीं दिए गए। कोर्ट के आदेश पर इसमें मार्च माह में केस दर्ज हुआ था।


केस : 2
वाराणसी के अन्नपूर्णा नगर निवासी पवन मल्होत्रा के परिवार का हकीकतनगर में मकान है, जिसके स्वामी उसके दादा रामलाल थे। उनका निधन हो गया था। उनके दादा ने मकान के वारिस उनके पिता गोविंदराम, चाचा शादीलाल, तिलकराज को वारिस बना दिया था। तीनाें का नाम गृहकर विभाग नगर निगम में दर्ज था। आरोप है कि पड़ोसी दंपती ने नगर निगम में सांठगांठ कर मकान के वारिस से उनका नाम हटवाकर अपने नाम पर चढ़वा लिया था। इसमें दंपती व नगर निगम के कर्मचारियों समेत नौ लोगों के खिलाफ कुतुबशेर थाने में अदालत के आदेश पर केस दर्ज हुआ था।



यह है स्वामित्व की प्रक्रिया
स्वामित्व कराने वाले को एक फार्म के साथ रजिस्ट्री, बैनामा या वसीयत के दस्तावेज लगाकर नगर निगम के टैक्स विभाग में जमा करने होते हैं। संबंधित लिपिक इंस्पेक्टर मौके पर जाकर देखा है कि जिस व्यक्ति ने आवेदन किया है उस संपत्ति पर वही रह रहा है या नहीं। संबंधित लिपिक पुरानी पार्टी को धारा-213 का नोटिस जारी करता है। यदि एक महीने में आपत्ति दर्ज नहीं होती है तो संपत्ति का नामांतरण कर दिया जाता है।
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