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तीन तलाक का दुरुपयोग करने पर सामाजिक बहिष्कार सही : उलमा

Tue, 18 Apr 2017 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद Updated Tue, 18 Apr 2017 01:37 AM IST
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Social boycott right after misusing three divorce
पत्रकारों से वार्ता करते उलमा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
ट्रिपल तलाक के मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों का देवबंदी उलमा ने समर्थन किया है। उलमा का कहना है कि तीन तलाक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लेकर बोर्ड ने बेवजह इस मुद्दे को तूल देने वालों को करारा जवाब दिया है। 
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सोमवार को दारुल उलूम चौक स्थित कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता में अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी और उत्तर प्रदेश राब्ता कमेटी के सचिव डॉक्टर उबैद इकबाल आसिम ने संयुक्त रुप से कहा कि तीन तलाक के मुद्दे को जिस तरीके से बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है इसका तथ्य से कोई संबंध नहीं है।
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सच बात यह है कि गए गुजरे दौर में भी मुस्लिम समाज में तलाक फीसद दूसरे धर्मों के मुकाबले बहुत कम है और जहां कहीं मजबूरी के रुप में इस मामले को अपनाना पड़ता है तो उसके लिए तीन तलाक जरूरी नहीं है।
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दोनों विद्वानों ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार मुसलमानों तथा देश के मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर पूरा जोर इस बात पर लगा रही है जैसे मुसलमानों के लिए कोई और दूसरी समस्या नहीं है और हर मुसलमान तीन तलाक का उपयोग आवश्यक समझता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सिफारिशों और वर्तमान सत्र में पारित किए गए संकल्प पत्र में इस बात को स्पष्ट कर दिया गया है कि तीन तलाक किसी भी हालत में कभी भी पसंदीदा नहीं रही।

जो मुसलमान इसका उपयोग करता है उन्हें मुस्लिम समाज में पसंदीदगी की दृष्टि से न देखना चाहिए। बल्कि ऐसे लोग मिल्लते इस्लामिया के लिए एक कलंक हैं जिनका सामाजिक बहिष्कार किया जाना बहुत जरूरी है। 

वहीं, दारुल उलूम जकरिया के वरिष्ठ उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन के प्रभारी मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि एक साथ तीन तलाक का इस्तेमाल करने वाले लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का बोर्ड का फैसला एकदम दुरुस्त है। तमाम मस्जिदों के इमामों को चाहिए कि वह इसके बारे में लोगों को जागरूक करें।

इसके साथ ही मुफ्ती अरशद फारुकी ने बेटियों को शादी में दहेज की जगह जायदाद में हिस्सा देने के बोर्ड के फैसले पर भी मुहर लगाते हुए कहा कि कुरआन में भी इसका हुक्म दिया गया है, लेकिन लोग इसको नजर अंदाज कर जायदाद के मालिक बने बैठे हैं। बेटी या बहन का हक मारकर जो लोग उस जायदाद से रोटी खा रहे वो सरासर हराम है। 

तीन तलाक देना मजहब या शरीयत की गलती नहीं : अंसारी
देवबंद। देवबंद मोमिन कांफ्रेंस के अध्यक्ष नसीम अंसारी एडवोकेट ने कहा कि तीन तलाक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुस्लिम औरतों के लिए हमदर्दी एक ढोंग है। उनका मकसद कॉमन सिविल कोड लागू कराना है।


अगर पीएम को मुसलमानों की फिक्र है तो वह रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट लागू करें। सोमवार को जारी बयान में नसीम अंसारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पीएम ने इस्लाम धर्म में प्रचलित तीन तलाक को वक्त और मुस्लिम महिलाओं की जरूरत बताकर कानून के जरिए खत्म करने की बात की थी, जबकि चुनाव के बाद भी कई बार उनकी और उनकी पार्टी की तरफ से इस्लाम मजहब और शरीयत में तब्दीली करके तीन तलाक के प्रचलन और हलाला प्रक्रिया को खत्म करने की बातें की जा रही हैं। भुवनेश्वर में हुई भाजपा की बैठक में भी उन्होंने यही बातें दोहराई हैं जो सरासर गलत हैं। 
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