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बूचड़खाने तो बंद हुए, हालात नहीं बदले
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 19 Apr 2017 01:33 AM IST
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प्रदेश की महंत आदित्यनाथ योगी सरकार को एक माह पूरे हो गए हैं। सरकार ने ताबड़तोड़ फैसले लेकर बड़े बदलाव का संकेत दिया, मगर अब तक सहारनपुर में ज्यादा कुछ हालात नहीं बदले हैं। सरकार बनने के तुरंत बाद अफसरों ने पहले कागजी खानापूर्ति की और बाद में जिले के चारों बूचड़खानों को बंद जरुर कराया। मगर, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं में आम जनता को कोई राहत नहीं मिल पाई है। इसके अलावा चरमराई हुई कानून व्यवस्था में भी बहुत हद तक सुधार की गुंजाइश है।
सरकार गठन के साथ ही सहारनपुर के लाखों लोगों को काफी उम्मीदें हैं। मगर बीते एक माह में खासकर सहारनपुर के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। प्रदेशव्यापी फैसलों में गन्ना भुगतान और किसानों के ऋण माफी का लाभ जरुर मिला है। मगर, पिछले कई वर्षो से टूटी सड़कों का दंश झेल रहे सहारनपुर की यह समस्या हल नहीं हुई है।
हालांकि सीएम योगी ने सड़कों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। मगर, अफसर इस मामले में गंभीर नहीं दिख रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि खनन कार्य नहीं होने से सामग्री के अभाव में कार्य प्रभावित हो रहा है। सहारनपुर के मेडिकल कालेज को एम्स जैसी सुविधा देने का दावा किया जा रहा है। मगर, अब तक यहां गंभीर रोगियों के इलाज तक की व्यवस्था नहीं है।
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साफ-सफाई का जोर भी थमा
सीएम योगी के सरकारी कार्यालयों में श्रमदान के निर्देश के दो-चार दिन तक अफसरों ने खूब झाड़ू लगाया। मगर, अब सरकारी दफ्तरों के हालात फिर से पुराने जैसे होने लगे हैं। हालांकि उस वक्त हुई पुुताई के चलते गुटके आदि के दाग नहीं दिखते, मगर अफसर जरूर सफाई करना भूल गए हैं।
बिजली की हालत पहले से बदतर ः पहली कैबिनेट बैठक में मुख्यालयों पर 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूति का दावा किया गया। हालांकि अब तक बिजली आपूर्ति में कोई सुधार नहीं है।
बल्कि आपूर्ति पहले से ज्यादा खराब हुई है। एक्सट्रा कट बढ़े हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में आठ घंटे बिजली भी बमुश्किल ही मिल रही है। अफसरों का दावा है कि निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए मरम्मत कार्य किया जा रहा है।
कानून व्यवस्था में भी सुधार की गुंजाइश ः तीन प्रदेशों की सीमा से सटे सहारनपुर में कानून व्यवस्था भी पटरी से उतरी है। योगी सरकार बनने के बाद देवबंद में डाक्टर से रंगदारी मांगने और नहीं देने पर उस पर सरेशाम फायरिंग की घटना हुई थी।
हालांकि पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी पकड़ा, मगर एक फरार है। इसके बाद सहारनपुर में चिकित्सक से रंगदारी ने दहशत फैलाई। यहां भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने में कामयाब हुई। पहले हुई राकेश अरोड़ा हत्याकांड जैसे कई अनसुलझे मामले पुलिस के लिए चुनौती है। हत्याओं पर पुलिस अब तक लगाम नहीं कस पाई है।
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सरकार गठन के साथ ही सहारनपुर के लाखों लोगों को काफी उम्मीदें हैं। मगर बीते एक माह में खासकर सहारनपुर के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। प्रदेशव्यापी फैसलों में गन्ना भुगतान और किसानों के ऋण माफी का लाभ जरुर मिला है। मगर, पिछले कई वर्षो से टूटी सड़कों का दंश झेल रहे सहारनपुर की यह समस्या हल नहीं हुई है।
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हालांकि सीएम योगी ने सड़कों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। मगर, अफसर इस मामले में गंभीर नहीं दिख रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि खनन कार्य नहीं होने से सामग्री के अभाव में कार्य प्रभावित हो रहा है। सहारनपुर के मेडिकल कालेज को एम्स जैसी सुविधा देने का दावा किया जा रहा है। मगर, अब तक यहां गंभीर रोगियों के इलाज तक की व्यवस्था नहीं है।
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साफ-सफाई का जोर भी थमा
सीएम योगी के सरकारी कार्यालयों में श्रमदान के निर्देश के दो-चार दिन तक अफसरों ने खूब झाड़ू लगाया। मगर, अब सरकारी दफ्तरों के हालात फिर से पुराने जैसे होने लगे हैं। हालांकि उस वक्त हुई पुुताई के चलते गुटके आदि के दाग नहीं दिखते, मगर अफसर जरूर सफाई करना भूल गए हैं।
बिजली की हालत पहले से बदतर ः पहली कैबिनेट बैठक में मुख्यालयों पर 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूति का दावा किया गया। हालांकि अब तक बिजली आपूर्ति में कोई सुधार नहीं है।
बल्कि आपूर्ति पहले से ज्यादा खराब हुई है। एक्सट्रा कट बढ़े हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में आठ घंटे बिजली भी बमुश्किल ही मिल रही है। अफसरों का दावा है कि निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए मरम्मत कार्य किया जा रहा है।
कानून व्यवस्था में भी सुधार की गुंजाइश ः तीन प्रदेशों की सीमा से सटे सहारनपुर में कानून व्यवस्था भी पटरी से उतरी है। योगी सरकार बनने के बाद देवबंद में डाक्टर से रंगदारी मांगने और नहीं देने पर उस पर सरेशाम फायरिंग की घटना हुई थी।
हालांकि पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी पकड़ा, मगर एक फरार है। इसके बाद सहारनपुर में चिकित्सक से रंगदारी ने दहशत फैलाई। यहां भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने में कामयाब हुई। पहले हुई राकेश अरोड़ा हत्याकांड जैसे कई अनसुलझे मामले पुलिस के लिए चुनौती है। हत्याओं पर पुलिस अब तक लगाम नहीं कस पाई है।