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Saharanpur News: ग्राम सचिवालय नहीं, मिस्त्री की दुकान और गोदाम कहिए जनाब

Thu, 26 Jun 2025 12:28 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Jun 2025 12:28 AM IST
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Sir, don't call it a village secretariat, call it a mechanic's shop or a warehouse
गंगोह। गांव जंधेड़ा के जिस ग्राम सचिवालय में ग्राम प्रधान, पंचायत सहायक और सचिव को बैठकर ग्रामीण विकास योजनाओं का संचालन करना था, वहां बिजली मिस्त्री अपनी दुकान खोलकर लोगों के उपकरण ठीक कर रहा है। इतना ही नहीं इस सरकारी भवन के एक कमरे में प्याज का गोदाम बना दिया गया है।
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शासन की मंशा है कि गांवों में ग्राम सचिवालयों को सशक्त बनाकर वहां से सभी जरूरी योजनाएं संचालित हो, जिससे ग्रामीणों को अपने अधिकारों और सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। न्याय पंचायत सांगाठेड़ा के गांव जंधेड़ा स्थित सचिवालय भवन के एक हिस्से में प्याज भरी हुई है। इससे साफ है कि इसे गोदाम के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। वहीं सचिवालय के दूसरे कमरे में बिजली मिस्त्री द्वारा खुलेआम दुकान संचालित की जा रही है, जहां रोजाना मरम्मत कार्य होता है। यह हाल तब है जब सचिवालय में ग्राम पंचायत सहायक की प्रतिदिन उपस्थिति अनिवार्य है। सप्ताह में दो दिन सचिव को वहां बैठकर योजनाओं की निगरानी और ग्रामीणों से संवाद करना होता है।
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कामकाज के लिए ब्लॉक के चक्कर काटते हैं ग्रामीण
ग्राम प्रधान को भी यहीं से पंचायत के कार्यों का संचालन करना चाहिए, लेकिन सचिवालय की वर्तमान स्थिति के चलते वहां कोई सरकारी गतिविधि नहीं हो पा रही। इसके चलते ऑनलाइन प्रमाणपत्र, परिवार पहचान पत्र व अन्य सरकारी पोर्टलों के जरूरी दस्तावेजों के लिए ग्रामीणों को ब्लाॅक कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसमें उनके समय और धन की बर्बादी होती है। यह स्थिति शासन द्वारा पंचायत सचिवालयों को डिजिटल और सक्षम बनाने की मंशा के विपरीत है।
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यह बोले प्रधान
ग्राम प्रधान सुखपाल सिंह कहना है कि ग्राम पंचायत भवन के सुंदरीकरण व कंप्यूटर सहित अन्य संसाधनों की खरीद में काफी खर्च हुआ है। पंचायत भवन को कब्जा मुक्त कराकर पंचायत सहायक से कहा जाएगा कि वह नियमित रूप से वहां बैठे, जिससे ग्रामीणों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके।
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वर्जन
यह बेहद गंभीर मामला है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि सच्चाई मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अमित नारंग, बीडीओ गंगोह
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