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योजनाएं एक जैसी, बजट अलग
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 27 Jun 2016 12:34 AM IST
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govt officials
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में गरीबों के लिए चलाई जा रही केंद्र और राज्य की आवास योजना का मकसद भले ही एक हो, मगर इनके लाभार्थियों के साथ नियमों ने भारी छल कर दिया है।
बीपीएल सूची में शामिल गरीबों की अपेक्षा सामान्य गरीबों को दोगुने से भी अधिक बजट आवास निर्माण के लिए जारी किया जा रहा है। सिर्फ बजट ही नहीं अन्य सुविधाएं भी दी जा रहीं हैं।
इंदिरा आवास योजना को खत्म कर केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना शुरू की है। इंदिरा आवास के लिए लाभार्थी को अब तक सिर्फ 75,000 रुपये ही दिए जा रहे थे। जिसे प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये कर दिया गया।
विशेष बात यह है कि इस योजना में उन गरीबों का चयन किया गया है जो 2002 की बीपीएल सूची में शामिल हैं और 2011 में आर्थिक जातिगत आधार पर बीपीएल की श्रेणी में माना गया।
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राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही डाक्टर राम मनोहर लोहिया ग्रामीण आवास योजना में भी गरीबों के लिए आवास बनाए जा रहे हैं। इस योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को लगभग 3.30 लाख रुपये तक का बजट दिया जा रहा है।
जिसमें 2.70 लाख रुपये तो आवास निर्माण के लिए, 30 हजार रुपये सोलर लाइट के लिए, 12 हजार रुपये शौचालय के लिए और 172 रुपये रोजाना की दर से 90 दिन का मानव दिवस का मनरेगा योजना से बजट दिया जा रहा है।
हैरानी की बात तो यह है कि इस योजना के लिए अत्यंत गरीब मानी जाने वाली बीपीएल सूची में शामिल गरीबों का चयन नहीं किया जा सकता। उन्हें 1.20 लाख रुपये ही मिलेंगे। जो इस सूची से बाहर हैं और मासिक आय 3000 रुपये तक है, उसे 3.30 लाख रुपये आवास निर्माण के लिए मिलेंगे।
इसके लिए उन गरीबों का चयन किया गया जो बीपीएल सूची एवं 2011 के सर्वे में बीपीएल श्रेणी में शामिल किए गए लोगों से बाहर थे। केंद्र और प्रदेश सरकार की एक जैसी योजनाओं की विसंगतियों में गरीब फंसकर रह गए हैं।
अधिकारी भी मानते हैं कि जो अधिक गरीब हैं उन्हें आवास के लिए अधिक बजट मिलना चाहिए। लेकिन शासन से ही व्यवस्था ऐसी है कि इसमें कोई बदलाव भी नहीं हो सकता। इस योजना को देखकर कई लोग तो बीपीएल सूची से हटाने तक के प्रयास कर चुके हैं।
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बीपीएल सूची में शामिल गरीबों की अपेक्षा सामान्य गरीबों को दोगुने से भी अधिक बजट आवास निर्माण के लिए जारी किया जा रहा है। सिर्फ बजट ही नहीं अन्य सुविधाएं भी दी जा रहीं हैं।
इंदिरा आवास योजना को खत्म कर केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना शुरू की है। इंदिरा आवास के लिए लाभार्थी को अब तक सिर्फ 75,000 रुपये ही दिए जा रहे थे। जिसे प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये कर दिया गया।
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विशेष बात यह है कि इस योजना में उन गरीबों का चयन किया गया है जो 2002 की बीपीएल सूची में शामिल हैं और 2011 में आर्थिक जातिगत आधार पर बीपीएल की श्रेणी में माना गया।
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राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही डाक्टर राम मनोहर लोहिया ग्रामीण आवास योजना में भी गरीबों के लिए आवास बनाए जा रहे हैं। इस योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को लगभग 3.30 लाख रुपये तक का बजट दिया जा रहा है।
जिसमें 2.70 लाख रुपये तो आवास निर्माण के लिए, 30 हजार रुपये सोलर लाइट के लिए, 12 हजार रुपये शौचालय के लिए और 172 रुपये रोजाना की दर से 90 दिन का मानव दिवस का मनरेगा योजना से बजट दिया जा रहा है।
हैरानी की बात तो यह है कि इस योजना के लिए अत्यंत गरीब मानी जाने वाली बीपीएल सूची में शामिल गरीबों का चयन नहीं किया जा सकता। उन्हें 1.20 लाख रुपये ही मिलेंगे। जो इस सूची से बाहर हैं और मासिक आय 3000 रुपये तक है, उसे 3.30 लाख रुपये आवास निर्माण के लिए मिलेंगे।
इसके लिए उन गरीबों का चयन किया गया जो बीपीएल सूची एवं 2011 के सर्वे में बीपीएल श्रेणी में शामिल किए गए लोगों से बाहर थे। केंद्र और प्रदेश सरकार की एक जैसी योजनाओं की विसंगतियों में गरीब फंसकर रह गए हैं।
अधिकारी भी मानते हैं कि जो अधिक गरीब हैं उन्हें आवास के लिए अधिक बजट मिलना चाहिए। लेकिन शासन से ही व्यवस्था ऐसी है कि इसमें कोई बदलाव भी नहीं हो सकता। इस योजना को देखकर कई लोग तो बीपीएल सूची से हटाने तक के प्रयास कर चुके हैं।