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सत्र शुरू होने के ढाई माह बाद भी विद्यार्थियों को नहीं मिली किताबें
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सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नया सत्र शुरू हुए करीब ढाई माह बीत चुके हैं, लेकिन किताबों का अभी तक कोई अता पता नहीं है। ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बीच 16 जून से पुन: विद्यालय खुल रहे हैं, लेकिन उन्हें बिना किताबों के ही सत्र को आगे बढ़ाना होगा।
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत परिषदीय एवं एडेड विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को किताबें नि:शुल्क मिलती हैं। यह किताबें शासन के द्वारा क्रय कर बेसिक शिक्षा विभाग को भेजी जाती हैं, जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग उक्त किताबों को विद्यालयों में भेजता है। जहां शिक्षकों के द्वारा विद्यार्थियों को किताबों का वितरण किया जाता है। विद्यालयों में सत्र की शुरुआत एक अप्रैल से हो जाती है। ऐसे में किताबें एक अप्रैल तक विद्यार्थियों को उपलब्ध हो जानी चाहिए, लेकिन सरकार के ढुलमुल रवैये के चलते कभी भी समय से किताबें उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। इस बार भी यही स्थिति है। जनपद में परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 1438 हैं। इनमें करीब 2.20 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। एक अप्रैल से 21 मई तक विद्यार्थियों ने पुरानी किताबों या ज्यादातर से बिना किताबों के कक्षाएं की, जबकि नए नामांकित करीब 30 हजार विद्यार्थियों को भी अभी तक कोई किताब नहीं मिली है। 21 मई को ग्रीष्मकालीन छुट्टियां शुरू हो चुकी थी, जो 16 जून तक चलेंगी। इस बीच किताबें आ जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक नहीं आई।
दो दिन पहले मिला क्रय आदेश जारी करने का आदेश
जो किताबें एक अप्रैल तक विद्यार्थियों को मिल जानी चाहिए थी। उन किताबों के लिए क्रय आदेश जारी करने के लिए शासन से दो दिन पहले यानी 11 जून को आदेश जारी किया गया है। इसके बाद फर्मों के माध्यम से किताबें विभाग को उपलब्ध कराई जाएंगी। जिनके विद्यालय पहुंचने में अभी समय लगेगा।
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कक्षा एक से आठ के विद्यार्थियों के लिए किताबें अभी नहीं आई हैं। हाल ही में किताबों के लिए क्रय आदेश जारी किया जा चुका है। जुलाई माह में किताबें विभाग को उपलब्ध हो जाएंगी, जिसके बाद उन्हें बच्चों को सौंप दिया जाएगा।
अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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शिक्षा का अधिकार कानून के तहत परिषदीय एवं एडेड विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को किताबें नि:शुल्क मिलती हैं। यह किताबें शासन के द्वारा क्रय कर बेसिक शिक्षा विभाग को भेजी जाती हैं, जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग उक्त किताबों को विद्यालयों में भेजता है। जहां शिक्षकों के द्वारा विद्यार्थियों को किताबों का वितरण किया जाता है। विद्यालयों में सत्र की शुरुआत एक अप्रैल से हो जाती है। ऐसे में किताबें एक अप्रैल तक विद्यार्थियों को उपलब्ध हो जानी चाहिए, लेकिन सरकार के ढुलमुल रवैये के चलते कभी भी समय से किताबें उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। इस बार भी यही स्थिति है। जनपद में परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 1438 हैं। इनमें करीब 2.20 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। एक अप्रैल से 21 मई तक विद्यार्थियों ने पुरानी किताबों या ज्यादातर से बिना किताबों के कक्षाएं की, जबकि नए नामांकित करीब 30 हजार विद्यार्थियों को भी अभी तक कोई किताब नहीं मिली है। 21 मई को ग्रीष्मकालीन छुट्टियां शुरू हो चुकी थी, जो 16 जून तक चलेंगी। इस बीच किताबें आ जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक नहीं आई।
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दो दिन पहले मिला क्रय आदेश जारी करने का आदेश
जो किताबें एक अप्रैल तक विद्यार्थियों को मिल जानी चाहिए थी। उन किताबों के लिए क्रय आदेश जारी करने के लिए शासन से दो दिन पहले यानी 11 जून को आदेश जारी किया गया है। इसके बाद फर्मों के माध्यम से किताबें विभाग को उपलब्ध कराई जाएंगी। जिनके विद्यालय पहुंचने में अभी समय लगेगा।
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कक्षा एक से आठ के विद्यार्थियों के लिए किताबें अभी नहीं आई हैं। हाल ही में किताबों के लिए क्रय आदेश जारी किया जा चुका है। जुलाई माह में किताबें विभाग को उपलब्ध हो जाएंगी, जिसके बाद उन्हें बच्चों को सौंप दिया जाएगा।
अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।