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बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन
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सहारनपुर। आरटीई (शिक्षा का अधिकार कानून) और आरटीआई (सूचना का अधिकार कानून) के विरोध में मान्यता प्राप्त विद्यालयों के संचालकों ने बीएसए कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर धरना किया। बीएसए की गैर मौजूदगी में उनके कार्यालय पर ज्ञापन चस्पा किया। इसके बाद एडी बेसिक को ज्ञापन सौंपा।
धरना और प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक मलिक ने सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा सरकार निजी स्कूल संचालकों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है, मगर विद्यालय संचालक झुकने वाले नहीं हैं। आरटीई और आरटीआई को निजी स्कूलों पर थोपा जाना गलत है। इससे विद्यालय संचालकों का उत्पीड़न बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय आरटीई के तहत बच्चों को पढ़ा रहे हैं, मगर सरकार उनकी फीस का पैसा नहीं भेज रही है। करीब एक हजार करोड़ रुपया सरकार पर विद्यालयों का बकाया है। सरकार पहले इसका भुगतान करें अन्यथा निजी विद्यालय आरटीई को नहीं मानेंगे। विरेंद्र पंवार, अमजद अली और समरीन फात्मा ने कहा कि त्रिभाषा संस्कृत अध्यापक आज भुखमरी के कगार पर हैं। त्रिभाषा अनुदान तत्काल बहाल किया जाए। निजी विद्यालयों को आरटीआई एक्ट से मुक्त रखा जाए। साथ ही मदरसा शिक्षकों के समान मान्यता प्राप्त हिंदी माध्यम के शिक्षकों को मानदेय और अल्पसंख्यक बच्चों के समान बहुसंख्यक बच्चों की छात्रवृत्ति दी जाए।
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धरना स्थल पर हुई सभा में अशोक सैनी, केपी सिंह, अरविंद शर्मा आदि ने भी विचार व्यक्त किए। धरने में गय्यूर आलम, मुकेश सहजवा, मनीष कुमार, भोपाल प्रधान, परवेज अली, विक्रांत शर्मा, नरेश वर्मा, दिनेश रुपड़ी, मुस्तजार, संजय रोहिला, शशिकांत, सरफराज, मुजाहिद हसन, संजय शर्मा, ऋषिपाल सैनी, शिव लाल, अमरीश शर्मा, मंजीत सैनी, हंस कुमार, गफ्फार, रजनी अरोड़ा, पूजा रानी, नीतू, महीपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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धरना और प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक मलिक ने सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा सरकार निजी स्कूल संचालकों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है, मगर विद्यालय संचालक झुकने वाले नहीं हैं। आरटीई और आरटीआई को निजी स्कूलों पर थोपा जाना गलत है। इससे विद्यालय संचालकों का उत्पीड़न बढ़ेगा।
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उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय आरटीई के तहत बच्चों को पढ़ा रहे हैं, मगर सरकार उनकी फीस का पैसा नहीं भेज रही है। करीब एक हजार करोड़ रुपया सरकार पर विद्यालयों का बकाया है। सरकार पहले इसका भुगतान करें अन्यथा निजी विद्यालय आरटीई को नहीं मानेंगे। विरेंद्र पंवार, अमजद अली और समरीन फात्मा ने कहा कि त्रिभाषा संस्कृत अध्यापक आज भुखमरी के कगार पर हैं। त्रिभाषा अनुदान तत्काल बहाल किया जाए। निजी विद्यालयों को आरटीआई एक्ट से मुक्त रखा जाए। साथ ही मदरसा शिक्षकों के समान मान्यता प्राप्त हिंदी माध्यम के शिक्षकों को मानदेय और अल्पसंख्यक बच्चों के समान बहुसंख्यक बच्चों की छात्रवृत्ति दी जाए।
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धरना स्थल पर हुई सभा में अशोक सैनी, केपी सिंह, अरविंद शर्मा आदि ने भी विचार व्यक्त किए। धरने में गय्यूर आलम, मुकेश सहजवा, मनीष कुमार, भोपाल प्रधान, परवेज अली, विक्रांत शर्मा, नरेश वर्मा, दिनेश रुपड़ी, मुस्तजार, संजय रोहिला, शशिकांत, सरफराज, मुजाहिद हसन, संजय शर्मा, ऋषिपाल सैनी, शिव लाल, अमरीश शर्मा, मंजीत सैनी, हंस कुमार, गफ्फार, रजनी अरोड़ा, पूजा रानी, नीतू, महीपाल सिंह आदि मौजूद रहे।