{"_id":"5f8745e68ebc3e1a231f02e9","slug":"sanjhi-will-be-decorated-from-house-to-house-will-praise-maiah-saharanpur-news-mrt506180348","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर-घर सजेगी सांझी, होगा मैय्या का गुणगान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घर-घर सजेगी सांझी, होगा मैय्या का गुणगान
विज्ञापन
चकराता मार्ग पर सांझी बनाती कोमल
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना संक्रमण काल में इस सप्ताह शनिवार से शारदीय नवरात्र की शुरूआत हो रहे हैं। कोविड नियमों के चलते इस बार बड़े पंडालों में मां दुर्गा के बड़े जागरण तो आयोजित नहीं किए जाएंगे। लेकिन सांझी मैय्या को घर-घर सजाया जाएगा। श्रद्धालु भक्ति भाव से घर पर ही मां का पूजन करेंगे।
इस बार पश्चिम बंगाल सहित आसपास के राज्यों से आने वाले मूर्तिकारों द्वारा बनायी जाने वाली बड़ी मूर्तियां बाजार में देखने को नहीं मिल रही हैं। हालांकि अलग-अलग आकारों और आकर्षक डिजाइनों के साथ सांझी (छोटी और मध्यम आकार की मूर्तियां) से बाजार सजने लगे हैं। मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनने वाली मूर्तियों को कई रंगों में सजाया, संवारा गया है। बाजार में सांझी की खरीददारी बढ़ गई है।
इन प्रमुख बाजारों में हो रही बिक्री
- महानगर के हकीकत नगर, खलासी लाइन, नुमाईश कैंप, शुगर मिल, बेरी बाग, नवाब गंज चौक, कोर्ट रोड, गिल कालोनी सहित अन्य जगहों पर आकर्षक सांझियां नजर आ रही हैं।
विज्ञापन
इस बार तो सांझी मैय्या ही लगाएगी बेड़ा पार
- शहर के अलग-अलग जगहों पर सांझियों की बिक्री करने वाले रघुबीर, बसंती, झूलाराम और किशन सिंह सहित अन्य ने बताया कि कोरोना काल में सभी त्योहार फीके पड़ गए। लेकिन नवरात्र से कुछ उम्मीदें हैं। कुछ मूर्तियां बिक जाएंगी तो उनके परिवारों को भी कुछ सहारा मिल सकेगा।
रात में बनाते हैं, दिन में सजाते हैं सांझी
- सांझी और कुछ बड़ी मूर्तियां बनाने वाले मूर्तिकार जितेंद्र बताते हैं कि वह और उनके बच्चे मिलकर रात में मूर्तियां बनाते हैं। इन्हें रंगों से सजाने के बाद दिन में बिक्री के लिए बाजारों में लाते हैं।
30 रुपये से 300 रुपये तक की हैं मूर्तियां
- छोटे से बड़े आकार और आकर्षक डिजाइनों के अनुरूप मां की मूर्तियां 30 से 300 रुपये तक में उपलब्ध हैं। इनमें सबसे अधिक शेर की सवारी वाली मां दुर्गा की मूर्ति की मांग बताई जा रही है।
विज्ञापन
इस बार पश्चिम बंगाल सहित आसपास के राज्यों से आने वाले मूर्तिकारों द्वारा बनायी जाने वाली बड़ी मूर्तियां बाजार में देखने को नहीं मिल रही हैं। हालांकि अलग-अलग आकारों और आकर्षक डिजाइनों के साथ सांझी (छोटी और मध्यम आकार की मूर्तियां) से बाजार सजने लगे हैं। मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनने वाली मूर्तियों को कई रंगों में सजाया, संवारा गया है। बाजार में सांझी की खरीददारी बढ़ गई है।
विज्ञापन
इन प्रमुख बाजारों में हो रही बिक्री
- महानगर के हकीकत नगर, खलासी लाइन, नुमाईश कैंप, शुगर मिल, बेरी बाग, नवाब गंज चौक, कोर्ट रोड, गिल कालोनी सहित अन्य जगहों पर आकर्षक सांझियां नजर आ रही हैं।
विज्ञापन
इस बार तो सांझी मैय्या ही लगाएगी बेड़ा पार
- शहर के अलग-अलग जगहों पर सांझियों की बिक्री करने वाले रघुबीर, बसंती, झूलाराम और किशन सिंह सहित अन्य ने बताया कि कोरोना काल में सभी त्योहार फीके पड़ गए। लेकिन नवरात्र से कुछ उम्मीदें हैं। कुछ मूर्तियां बिक जाएंगी तो उनके परिवारों को भी कुछ सहारा मिल सकेगा।
रात में बनाते हैं, दिन में सजाते हैं सांझी
- सांझी और कुछ बड़ी मूर्तियां बनाने वाले मूर्तिकार जितेंद्र बताते हैं कि वह और उनके बच्चे मिलकर रात में मूर्तियां बनाते हैं। इन्हें रंगों से सजाने के बाद दिन में बिक्री के लिए बाजारों में लाते हैं।
30 रुपये से 300 रुपये तक की हैं मूर्तियां
- छोटे से बड़े आकार और आकर्षक डिजाइनों के अनुरूप मां की मूर्तियां 30 से 300 रुपये तक में उपलब्ध हैं। इनमें सबसे अधिक शेर की सवारी वाली मां दुर्गा की मूर्ति की मांग बताई जा रही है।

नवाबगंज पर दुकान पर सजी सांझी- फोटो : SAHARANPUR

नवाबगंज पर दुकान पर नवरात्रि के लिये सांझी खरीदती महिला- फोटो : SAHARANPUR

बेहट रोड़ स्थित दुकान पर नवरात्रि के लिये सांझी खरीदती महिलाएं- फोटो : SAHARANPUR