गजब: डीएम से पत्नी के अंतिम संस्कार की लगाई गुहार, रुपये मिलते ही बुजुर्ग फरार, श्मशान में ढूंढता रहा लेखपाल
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में एक बुजुर्ग ने जिलाधिकारी को ही ठग लिया। बुजुर्ग ने डीएम से पत्नी के अंतिम संस्कार कराने की गुहार लगाते हुए मदद की मांग की। इसके बाद डीएम ने वृद्ध को कुछ रुपये दिए जिन्हें लेकर वह चंपत हो गया। वहीं लेखपाल श्मशान घाट में बुजुर्ग को तलाशता रहा।
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दरअसल, शनिवार दोपहर के समय जिलाधिकारी अपने कार्यालय में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इस दौरान एक बुजुर्ग(65) वहां पहुंचा और फफक-फफक रोने लगा। जिसने अपना नाम मवीकलां की कांशीराम कॉलोनी निवासी प्रकाश बताया।
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बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि साहब, मेरी पत्नी फुल्ली (58) की बीमारी से मौत हो गई है, जिसका शव घर पर रखा हुआ है। एक बेटा था जो घर छोड़कर जा चुका है। अब मेरे पास इतने भी रुपये नहीं है कि उसका अंतिम संस्कार कर सकूं।
इस पर जिलाधिकारी ने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत उसे दो हजार रुपये दिए। साथ ही कहा तहसीलदार अमित कुमार को निर्देश दिए कि लेखपाल को साथ भेजकर अंतिम संस्कार के लिए सामान दिलाओ। इसके अलावा किसी के माध्यम से तेहरवीं के दिन 10 हजार रुपये भी दिए जाएं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर एक लेखपाल को बुजुर्ग के साथ अंतिम संस्कार का सामान दिलाने के लिए भेजा गया। कार्यालय से बाहर निकलने के बाद बुजुर्ग ने कहा कि आप सीधे श्मशान घाट पर मिल जाओ। लेखपाल बाइक पर था और बुजुर्ग साइकिल पर, जो हसनपुर चुंगी तक साथ था। इसके बाद बुजुर्ग रास्ते से गायब हो गया।
लेखपाल पहले एक और दूसरे श्मशानघाट में जाकर बुजुर्ग को तलाश करता रहा, लेकिन कोई पता नहीं चला। लेखपाल कांशीराम कॉलोनी में उस पते पर पहुंचा जो बुजुर्ग ने बताया था। तब जाकर पता चला कि वहां इस नाम से कोई नहीं है और न ही किसी की मौत हुई है।
बुजुर्ग ने पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगी थी। इंसानियत के नाते उसे दो हजार रुपये दिए गए थे और लेखपाल को सामान दिलाने के लिए साथ भेजा था। जब जांच पड़ताल की गई तो वह फर्जी निकला। जिसकी तलाश की जा रही है। - डॉ. दिनेश चंद्र, जिलाधिकारी सहारनपुर