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Saharanpur : अब छह राज्यों में बंटेगा हथिनीकुंड बैराज का पानी, 30 साल पहले हुआ था यह समझौता

Wed, 29 May 2024 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा जगदीप कुमार, सहारनपुर
जगदीप कुमार, सहारनपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 29 May 2024 06:19 AM IST
सार

इसके लिए पांचों राज्यों के बीच 1994 में एमओयू हुआ था, जो अब 2025 में फिर से होना है।  इसमें अब उत्तराखंड को शामिल किया जाएगा।

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Saharanpur: Now the water of Hathnikund Barrage will be distributed among six states
हथिनीकुंड बैराज - फोटो : संवाद

विस्तार

हथिनीकुंड बैराज प्राकृतिक पानी का बड़ा स्रोत है, जहां से पांच राज्यों को पीने और सिंचाई के लिए पानी का बंटवारा होता है। इसके लिए पांचों राज्यों के बीच 1994 में एमओयू हुआ था, जो अब 2025 में फिर से होना है।  इसमें अब उत्तराखंड को शामिल किया जाएगा।

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12 मई 1994 में हुआ समझौता हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के बीच था। इसमें पांचों राज्यों के लिए प्रति वर्ष के लिए पानी की अलग-अलग मात्रा निर्धारित है। इस पानी का इस्तेमाल दिल्ली पीने के लिए और सिंचाई, बाकी राज्य केवल सिंचाई में करते हैं। 
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समझौते में यह भी तय हुआ था कि पहले उस राज्य को पानी दिया जाएगा, जो पानी का इस्तेमाल पीने के लिए करता है। इसलिए सबसे पहले दिल्ली को पानी दिया जाता है। इसके बाद शेष पानी का बाकी चार राज्यों को दिया जाता है। अब यह समझौता 30 साल बाद 2025 में होगा। इसमें उत्तराखंड भी शामिल रहेगा, क्योंकि 1994 तक उत्तराखंड नहीं बना था। प्रत्येक वर्ष कुल 11.983 बीसीएम (बिलियन क्यूसेक मीटर) पानी का बंटवारा पांच राज्यों को होता है। उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश अपने हिस्से में से पानी देता है। (संवाद)
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समझौते में यह प्रतिनिधि हुए थे शामिल 
1994 में पानी के बंटवारे को लेकर हुए समझौते में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल, राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत, हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना शामिल थे। 


राजस्थान अलग से चाहता है पानी 
हथिनीकुंड बैराज से पानी के बंटवारे को लेकर उच्च स्तर से ही कार्रवाई होनी है। फिलहाल राजस्थान अलग से पानी चाहता है, जिसके लिए उच्च स्तर पर बैठकें चल रही हैं। आचार संहिता के बाद इसके आगे बढ़ने की उम्मीद है। 
-अभिमन्यु सिंह राय, अधिशासी अभियंता, अपर खंड पूर्वी यमुना नहर।

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