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सफाई में पिछड़ गया सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 05 May 2017 12:50 AM IST
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मार्ग पर लगे कूड़े के ढेर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में स्वच्छता सर्वेक्षण में सहारनपुर देश के 434 शहरों में 245वां स्थान पर है। हालांकि सूबे में सफाई के मामले में सहारनपुर पांचवें स्थान पर है कानपुर, झांसी, अलीगढ़ और वाराणसी भी सहारनपुर से आगे हैं।
हालांकि निगम अधिकारियों ने शहर को चमकाने के प्रयास किए होते तो स्थिति और भी अच्छी होती शहर में कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं कर सके हैं। केवल कचरे को शहर के बीच से उठाकर बाहर फेंका जा रहा है।
स्वच्छता सर्वेक्षण में सहारनपुर 245 वें स्थान पर रहा है। यानी टॉप 100 में भी हम स्थान नहीं बना सके हैं। यूपी के 41 शहरों में से केवल वाराणसी टॉप 100 सिटी में जगह बना सका है।
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इन 41 शहरों में सहारनपुर बेहद गंदे शहरों में शामिल है। सहारनपुर को कुल 2000 में से 894.37 अंक मिले हैं। शहर के गंदा होने के लिए सबसे प्रमुख वजह नगर निगम अधिकारियों की अनदेखी है। दरअसल, सहारनपुर को नगर निगम का दर्जा वर्ष 2009 में मिल गया था, मगर अभी तक अधिकारी कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं कर सके हैं।
नगर निगम पहले शहर से कचरा उठाकर पुराना कलसिया रोड और चिलकाना रोड पर फेंक रहा था और अब कमेला क्षेत्र में फेंका जा रहा है। इन जगहों पर कचरे के बड़े चट्टे लगे हैं, जो स्थानीय लोगों में बीमारियां बांट रहे हैं।
नगर निगम के अधिकारी पिछले आठ साल में कचरा निस्तारण के लिए जगह चिह्नित नहीं कर पाए हैं। यही वजह है कि शहर की हालत कचरे का ढेर जैसी हो गई है।
वहीं, शहर में सफाई व्यवस्था बनाने के लिए नगर निगम के पास नौ ट्रक, तीन लोडर और चार जेसीबी हैं। शहर में कुल 103 जगहों पर कचरा इकट्ठा किया जाता है, जहां से जेसीबी और ट्रकों के माध्यम से कचरा उठाकर शहर के बाहर फेंका जाता है।
मैन पावर की बात करें तो एक नगर स्वास्थ्य अधिकारी, आठ सेनेट्री इंस्पेक्टर समेत अनेक अधिकारी लगे हैं। इनके अलावा कुल 1364 सफाईकर्मी लगे हैं। इनमें 735 कर्मचारी ठेका प्रथा, 461 कर्मी स्थाई और 166 संविदा पर काम करने वाले हैं। यानी मशीनरी और मैन पावर पर प्रत्येक महीने लाखों रुपया खर्च करने के बाद भी शहर साफ नहीं है।
उधर, नगरायुक्त ओपी वर्मा ने बताया कि शहर की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। बजट बढ़ाने के लिए शासन को लिखा जाएगा। इसके अलावा कचरा निस्तारण की व्यवस्था हम जल्द ही करने जा रहे हैं। इस सबके अलावा प्रत्येक नागरिक को भी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए शहर को साफ रखने में सहयोग करना होगा।
सड़कों और नालियों के साथ ही शहर के बीच से होकर गुजर रही नदियों की हालत भी ठीक नहीं है। शहर के बीच से गुजर रही ढमोला नदी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। एनजीटी भी इसे प्रदूषित घोषित कर चुका है।
इसके अलावा सहारनपुर की गंगा कही जाने वाली पांवधोई नदी की हालत भी दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इसके लिए सब्जी मंडी के आसपास सब्जी और फल विक्रेता हैं, जो शाम के समय पूरा कचरा नदी में फेंकते हैं। निगम हर साल इसकी सफाई भी कराता है, मगर उसके नाम पर भी खानापूर्ति की जाती है।
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हालांकि निगम अधिकारियों ने शहर को चमकाने के प्रयास किए होते तो स्थिति और भी अच्छी होती शहर में कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं कर सके हैं। केवल कचरे को शहर के बीच से उठाकर बाहर फेंका जा रहा है।
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स्वच्छता सर्वेक्षण में सहारनपुर 245 वें स्थान पर रहा है। यानी टॉप 100 में भी हम स्थान नहीं बना सके हैं। यूपी के 41 शहरों में से केवल वाराणसी टॉप 100 सिटी में जगह बना सका है।
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इन 41 शहरों में सहारनपुर बेहद गंदे शहरों में शामिल है। सहारनपुर को कुल 2000 में से 894.37 अंक मिले हैं। शहर के गंदा होने के लिए सबसे प्रमुख वजह नगर निगम अधिकारियों की अनदेखी है। दरअसल, सहारनपुर को नगर निगम का दर्जा वर्ष 2009 में मिल गया था, मगर अभी तक अधिकारी कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं कर सके हैं।
नगर निगम पहले शहर से कचरा उठाकर पुराना कलसिया रोड और चिलकाना रोड पर फेंक रहा था और अब कमेला क्षेत्र में फेंका जा रहा है। इन जगहों पर कचरे के बड़े चट्टे लगे हैं, जो स्थानीय लोगों में बीमारियां बांट रहे हैं।
नगर निगम के अधिकारी पिछले आठ साल में कचरा निस्तारण के लिए जगह चिह्नित नहीं कर पाए हैं। यही वजह है कि शहर की हालत कचरे का ढेर जैसी हो गई है।
वहीं, शहर में सफाई व्यवस्था बनाने के लिए नगर निगम के पास नौ ट्रक, तीन लोडर और चार जेसीबी हैं। शहर में कुल 103 जगहों पर कचरा इकट्ठा किया जाता है, जहां से जेसीबी और ट्रकों के माध्यम से कचरा उठाकर शहर के बाहर फेंका जाता है।
मैन पावर की बात करें तो एक नगर स्वास्थ्य अधिकारी, आठ सेनेट्री इंस्पेक्टर समेत अनेक अधिकारी लगे हैं। इनके अलावा कुल 1364 सफाईकर्मी लगे हैं। इनमें 735 कर्मचारी ठेका प्रथा, 461 कर्मी स्थाई और 166 संविदा पर काम करने वाले हैं। यानी मशीनरी और मैन पावर पर प्रत्येक महीने लाखों रुपया खर्च करने के बाद भी शहर साफ नहीं है।
उधर, नगरायुक्त ओपी वर्मा ने बताया कि शहर की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। बजट बढ़ाने के लिए शासन को लिखा जाएगा। इसके अलावा कचरा निस्तारण की व्यवस्था हम जल्द ही करने जा रहे हैं। इस सबके अलावा प्रत्येक नागरिक को भी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए शहर को साफ रखने में सहयोग करना होगा।
सड़कों और नालियों के साथ ही शहर के बीच से होकर गुजर रही नदियों की हालत भी ठीक नहीं है। शहर के बीच से गुजर रही ढमोला नदी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। एनजीटी भी इसे प्रदूषित घोषित कर चुका है।
इसके अलावा सहारनपुर की गंगा कही जाने वाली पांवधोई नदी की हालत भी दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इसके लिए सब्जी मंडी के आसपास सब्जी और फल विक्रेता हैं, जो शाम के समय पूरा कचरा नदी में फेंकते हैं। निगम हर साल इसकी सफाई भी कराता है, मगर उसके नाम पर भी खानापूर्ति की जाती है।